Last updated: November 7th, 2026 at 03:01 pm

उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी अयोध्या में शनिवार, 7 नवंबर 2026 को दसवें दीपोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। भगवान श्रीराम की नगरी को लाखों मिट्टी के दीपों, रंग-बिरंगी रोशनी, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और आकर्षक सजावट से जगमगाया गया। इस वर्ष दीपोत्सव का मुख्य आकर्षण सरयू नदी के तट पर स्थित राम की पैड़ी सहित 56 घाटों पर 30 लाख दीये जलाने का लक्ष्य रहा। उत्तर प्रदेश सरकार ने इस आयोजन के जरिए एक नया विश्व रिकॉर्ड स्थापित करने की तैयारी की। कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल सहित कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं।
अयोध्या में दीपोत्सव की शुरुआत वर्ष 2017 में हुई थी। उस समय से यह आयोजन लगातार भव्य होता गया और हर साल दीपों की संख्या बढ़ाकर नए रिकॉर्ड बनाने का प्रयास किया गया। वर्ष 2017 में लगभग 1.71 लाख दीये जलाए गए थे, जबकि 2025 के नौवें दीपोत्सव में 26 लाख से अधिक दीयों के साथ रिकॉर्ड बनाया गया था। इस बार सरकार ने 30 लाख दीयों का लक्ष्य निर्धारित किया। आयोजन को सफल बनाने के लिए हजारों स्वयंसेवकों और विद्यार्थियों ने कई दिनों तक घाटों पर दीयों को व्यवस्थित करने का काम किया।
दीपोत्सव 2026 के मुख्य कार्यक्रम में उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने राम की पैड़ी पर पहला दीप जलाकर समारोह का औपचारिक शुभारंभ किया। उनके साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल मौजूद रहे। उपराष्ट्रपति ने श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में दर्शन-पूजन भी किया और भगवान श्रीराम के प्रतीकात्मक राज्याभिषेक कार्यक्रम में भाग लिया। इस अवसर पर संतों को सम्मानित करने का कार्यक्रम भी आयोजित किया गया।
राम की पैड़ी और सरयू के घाटों पर दीप सजाने के लिए हजारों स्वयंसेवकों ने विशेष व्यवस्था की। दीयों को निर्धारित आकृतियों और पैटर्न में रखा गया, ताकि जलने के बाद पूरा क्षेत्र एक विशाल प्रकाश दृश्य में बदल जाए। आयोजन के लिए करीब 35 हजार विद्यार्थियों और स्वयंसेवकों की भागीदारी की व्यवस्था की गई थी। प्रशासन ने दीपों को जलाने, तेल और बाती की व्यवस्था तथा रिकॉर्ड सत्यापन के लिए अलग-अलग टीमों को जिम्मेदारी दी।
इस वर्ष दीपोत्सव केवल दीयों तक सीमित नहीं रहा। कार्यक्रम में 2,100 स्वदेशी ड्रोन के माध्यम से रामायण के विभिन्न प्रसंगों को आकाश में प्रदर्शित करने की योजना बनाई गई। ड्रोन शो में भगवान श्रीराम के जीवन, अयोध्या आगमन और रामायण से जुड़े दृश्य आकर्षक आकृतियों में प्रस्तुत किए गए। इसके अलावा लेजर शो, प्रोजेक्शन मैपिंग और संगीत के साथ आतिशबाजी भी कार्यक्रम का हिस्सा रहे। रामकथा पार्क और आसपास के आयोजन स्थलों पर लगभग 2,500 कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं।
दीपोत्सव के दौरान रामायण आधारित झांकियां भी निकाली गईं। 22 झांकियों के जरिए रामायण के सात कांडों और भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े प्रसंगों को दर्शाया गया। इनमें राम रथ, राम दरबार और पुष्पक विमान जैसे दृश्य शामिल रहे। भारत के विभिन्न राज्यों के लोक कलाकारों के साथ दक्षिण अफ्रीका, श्रीलंका, नेपाल, लाओस और थाईलैंड की रामलीला टीमों ने भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में भाग लिया। इससे आयोजन को अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक स्वरूप मिला।
सरयू नदी के तट पर विशेष महाआरती का आयोजन भी किया गया। इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में आचार्य और महिलाएं शामिल हुईं। आरती के जरिए आध्यात्मिक जागरूकता, सामाजिक सद्भाव और महिला सशक्तिकरण का संदेश देने का प्रयास किया गया। धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ लोक संगीत, नृत्य और पारंपरिक कला प्रदर्शन ने दीपोत्सव को सांस्कृतिक उत्सव का व्यापक रूप दिया।
अयोध्या प्रशासन ने दीपोत्सव में आने वाले श्रद्धालुओं और अतिथियों की सुरक्षा के लिए व्यापक इंतजाम किए। पूरे आयोजन क्षेत्र को तीन सुरक्षा घेरे में बांटा गया। रामपथ और धर्मपथ पर वाहनों की आवाजाही प्रतिबंधित रखी गई, जबकि प्रमुख प्रवेश मार्गों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल तैनात किया गया। भीड़ नियंत्रण, यातायात प्रबंधन, आपातकालीन सहायता और वीआईपी आवागमन के लिए अलग-अलग व्यवस्था की गई। प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया।
दीपोत्सव का आर्थिक प्रभाव भी लगातार बढ़ रहा है। आयोजन के दौरान होटल, परिवहन, भोजन, फूल, पूजा सामग्री और स्थानीय हस्तशिल्प कारोबार से जुड़े लोगों को अतिरिक्त आमदनी के अवसर मिलते हैं। वर्ष 2025 के पांच दिवसीय दीपोत्सव से अयोध्या की स्थानीय अर्थव्यवस्था में लगभग 55 करोड़ रुपये का कारोबार होने का अनुमान लगाया गया था। इस वर्ष भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के पहुंचने से स्थानीय दुकानदारों, कुम्हारों, कलाकारों और छोटे कारोबारियों को लाभ मिलने की उम्मीद रही।
अयोध्या का दीपोत्सव अब धार्मिक आस्था के साथ सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन और स्थानीय आर्थिक विकास का महत्वपूर्ण आयोजन बन चुका है। दसवें संस्करण में 30 लाख दीयों का लक्ष्य, 2,100 ड्रोन शो और अंतरराष्ट्रीय रामलीला प्रस्तुतियों ने इसे विशेष पहचान दी। इस आयोजन के जरिए अयोध्या को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत स्थान दिलाने तथा भगवान श्रीराम की नगरी की सांस्कृतिक पहचान को दुनिया तक पहुंचाने का प्रयास किया गया।
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