Last updated: November 7th, 2026 at 03:03 pm

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने दिवाली से पहले राज्य के लाखों सरकारी कर्मचारियों को बड़ी आर्थिक राहत दी है। शनिवार, 7 नवंबर 2026 को प्रदेश सरकार ने कर्मचारियों के महंगाई भत्ते (DA) में पांच प्रतिशत की बढ़ोतरी का शासनादेश जारी किया। इसके साथ ही महंगाई भत्ते की दर 58 प्रतिशत से बढ़कर 63 प्रतिशत हो गई है। इस फैसले से प्रदेश के 14 लाख से अधिक कर्मचारियों को लाभ मिलने की उम्मीद है। बढ़ी हुई दर 1 जुलाई 2026 से प्रभावी मानी जाएगी और कर्मचारियों को नवंबर महीने के नियमित वेतन के साथ इसका भुगतान किया जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लिए गए इस निर्णय को दिवाली से पहले कर्मचारियों के लिए महत्वपूर्ण आर्थिक राहत माना जा रहा है। महंगाई के कारण घरेलू खर्चों में लगातार वृद्धि हो रही है। ऐसे में महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी से कर्मचारियों की मासिक आय में इजाफा होगा और उन्हें दैनिक जरूरतों तथा अन्य खर्चों को पूरा करने में कुछ राहत मिलेगी। सरकार ने इस संबंध में शासनादेश जारी कर भुगतान की प्रक्रिया भी निर्धारित कर दी है।
इस फैसले का लाभ केवल राज्य सरकार के नियमित कर्मचारियों तक सीमित नहीं रहेगा। शासनादेश के अनुसार, सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थानों और प्राविधिक शिक्षण संस्थानों के पात्र कर्मचारियों को भी बढ़े हुए महंगाई भत्ते का लाभ मिलेगा। इसके अलावा शहरी स्थानीय निकायों के नियमित एवं पूर्णकालिक कर्मचारी, कार्यभारित कर्मचारी तथा यूजीसी वेतनमान पर कार्यरत पदधारक भी इस व्यवस्था के दायरे में शामिल हैं। इस तरह विभिन्न सरकारी विभागों और संस्थानों में कार्यरत बड़ी संख्या में कर्मचारियों को आर्थिक लाभ मिलेगा।
सरकार ने महंगाई भत्ते की बढ़ी हुई दर को 1 जुलाई 2026 से लागू करने का फैसला किया है। इसका मतलब है कि कर्मचारियों को जुलाई, अगस्त, सितंबर और अक्टूबर महीने के लिए भी बढ़ी हुई दर के अनुसार बकाया राशि मिलेगी। हालांकि, इस चार महीने के एरियर का भुगतान सभी कर्मचारियों को सीधे नकद नहीं किया जाएगा। सरकार ने सामान्य भविष्य निधि (GPF) और राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) से जुड़े कर्मचारियों के लिए अलग-अलग व्यवस्था निर्धारित की है।
GPF से जुड़े कर्मचारियों के मामले में जुलाई से अक्टूबर तक के एरियर की राशि निर्धारित कटौतियों के बाद उनके भविष्य निधि खाते में जमा की जाएगी। शासनादेश के अनुसार, इस राशि को निर्धारित अवधि तक खाते में रखा जाएगा और निकासी के लिए संबंधित नियम लागू होंगे। इससे कर्मचारियों की भविष्य की बचत में वृद्धि होगी, लेकिन तत्काल खर्च के लिए एरियर की पूरी रकम हाथ में नहीं आएगी।
राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) के अंतर्गत आने वाले कर्मचारियों के लिए भी सरकार ने विशेष व्यवस्था की है। उनके एरियर की 10 प्रतिशत राशि टियर-1 पेंशन खाते में जमा की जाएगी। इसके अतिरिक्त राज्य सरकार नियोक्ता के रूप में 14 प्रतिशत राशि के बराबर अंशदान भी संबंधित पेंशन खाते में जमा करेगी। शेष 90 प्रतिशत राशि पीपीएफ खाते में जमा कराने या राष्ट्रीय बचत प्रमाणपत्र (NSC) के रूप में देने की व्यवस्था की गई है। निर्धारित परिस्थितियों में यह राशि नकद भी उपलब्ध कराई जा सकती है।
सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लिए सरकार ने अलग राहत का प्रावधान किया है। जिन कर्मचारियों की सेवाएं शासनादेश जारी होने से पहले समाप्त हो चुकी हैं, जो 1 जुलाई 2026 से शासनादेश जारी होने की तारीख के बीच सेवानिवृत्त हुए हैं अथवा अगले छह महीने के भीतर सेवानिवृत्त होने वाले हैं, उन्हें महंगाई भत्ते के बकाये की पूरी राशि नकद दिए जाने की व्यवस्था की गई है। इससे सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अपनी आवश्यकताओं के अनुसार रकम इस्तेमाल करने में सुविधा मिलेगी।
महंगाई भत्ते में बढ़ोतरी के साथ सरकार ने वर्ष 2025-26 के लिए अराजपत्रित कर्मचारियों को 30 दिन के तदर्थ बोनस का लाभ देने की व्यवस्था भी की है। बोनस की अधिकतम राशि सात हजार रुपये निर्धारित की गई है। पात्र कर्मचारियों को इसका भुगतान संबंधित नियमों के अनुसार किया जाएगा। इस प्रकार महंगाई भत्ता और बोनस से कर्मचारियों को त्योहार के दौरान अतिरिक्त आर्थिक सहायता मिलने की उम्मीद है।
उत्तर प्रदेश सरकार का यह फैसला ऐसे समय आया है, जब राज्य में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले कर्मचारियों और विभिन्न वर्गों के लिए कई योजनाओं और सुविधाओं की घोषणाएं की जा रही हैं। हालांकि, महंगाई भत्ते में वृद्धि को कर्मचारियों के लिए प्रत्यक्ष आर्थिक राहत के रूप में देखा जा रहा है। नवंबर के वेतन में बढ़ी हुई दर लागू होने से कर्मचारियों को इसका लाभ मिलना शुरू होगा, जबकि जुलाई से अक्टूबर तक का एरियर निर्धारित वित्तीय व्यवस्था के तहत जमा किया जाएगा।
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