Last updated: September 14th, 2026 at 12:13 pm

उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में एंटी टेररिस्ट स्क्वाड (ATS) ने 19 वर्षीय मोहम्मद नबील को गिरफ्तार किया है। अधिकारियों के अनुसार, उस पर प्रतिबंधित आतंकी संगठन अल-कायदा की विचारधारा से जुड़ी सामग्री फैलाने और सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रभावित करने का आरोप है। नबील को आजमगढ़ के दीदारगंज इलाके से गिरफ्तार किया गया। मामले की जांच अब उसके ऑनलाइन संपर्कों और कथित नेटवर्क को लेकर आगे बढ़ाई जा रही है।
ATS के मुताबिक, नबील ने व्हाट्सऐप पर ‘ला गालिब इल्लल्लाह’ नाम से एक ग्रुप बनाया था। जांच एजेंसी का आरोप है कि इस ग्रुप के माध्यम से युवाओं के बीच कट्टरपंथी विचारधारा से जुड़ी सामग्री साझा की जाती थी। अधिकारियों ने यह भी दावा किया है कि आरोपी अल-कायदा से जुड़े विचारकों की सामग्री को ग्रुप के सदस्यों तक पहुंचाता था और उन्हें कथित तौर पर ‘जिहाद’ के लिए तैयार करने की कोशिश कर रहा था।
जांच के दौरान सामने आए कथित व्हाट्सऐप चैट्स को भी जांच का अहम हिस्सा माना जा रहा है। ATS का कहना है कि बातचीत में कुछ शब्दों का कोड के रूप में इस्तेमाल किया जाता था। अधिकारियों के अनुसार, आरोपी और उसके संपर्क में रहने वाले लोगों के बीच हथियारों, रासायनिक पदार्थों और कथित आतंकी गतिविधियों से संबंधित चर्चाएं भी सामने आई हैं। हालांकि, इन सभी आरोपों की जांच अभी जारी है और अदालत में इनकी पुष्टि होना बाकी है।
ATS ने यह भी बताया कि नबील कई अन्य ऑनलाइन ग्रुप्स से जुड़ा हुआ था। इनमें ऐसे लोग भी शामिल थे जिनके संबंध जम्मू-कश्मीर के अलावा बांग्लादेश, म्यांमार और सऊदी अरब से बताए गए हैं। एजेंसी अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि आरोपी केवल ऑनलाइन गतिविधियों तक सीमित था या उसका किसी बड़े नेटवर्क से भी संपर्क था।
जांच एजेंसी के अनुसार, नबील कथित तौर पर आतंकी गतिविधियों के नाम पर फंड जुटाने की कोशिश भी कर रहा था। अधिकारियों को उसकी बातचीत में पाकिस्तान, तुर्की और बांग्लादेश की यात्रा तथा वहां प्रशिक्षण लेने से संबंधित चर्चाओं का भी पता चला है। ATS ने इन जानकारियों को जांच का हिस्सा बनाया है और उसके डिजिटल उपकरणों तथा ऑनलाइन संपर्कों की पड़ताल की जा रही है।
मामले में पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता (BNS) की संबंधित धाराओं के साथ-साथ गैर-कानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है। एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि कथित तौर पर बनाए गए ऑनलाइन नेटवर्क में और कितने लोग शामिल थे और क्या किसी अन्य व्यक्ति ने नबील को गतिविधियों के लिए निर्देश या आर्थिक सहायता दी थी।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए इस मामले का डिजिटल पहलू भी महत्वपूर्ण है। सोशल मीडिया और एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म के माध्यम से युवाओं को प्रभावित करने की आशंका को लेकर एजेंसियां लगातार निगरानी बढ़ा रही हैं। आजमगढ़ मामले में भी जांच का एक बड़ा हिस्सा डिजिटल बातचीत, ऑनलाइन समूहों और संपर्कों की जांच पर केंद्रित है। फिलहाल नबील के खिलाफ लगाए गए आरोप जांच और न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं।
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