Last updated: September 14th, 2026 at 12:10 pm

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में पुलिस ने नकली ₹20 के सिक्के बनाने और उन्हें बाजार में खपाने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश किया है। नगर कोतवाली पुलिस, एसओजी, स्वाट और सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई में पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। पुलिस के मुताबिक, गिरोह ने अब तक 70 करोड़ रुपये से अधिक कीमत के नकली सिक्के बाजार में चलाने का दावा किया है। हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया है कि इस रकम की वास्तविक पुष्टि विस्तृत जांच के बाद ही हो सकेगी।
पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों में गिरोह का कथित मुख्य सरगना उपकार लूथरा उर्फ अभय प्रताप सिंह भी शामिल है। उसके अलावा सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, बिहार और भदोही से जुड़े चार अन्य लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से ₹20 के 6,400 नकली सिक्के बरामद किए हैं, जिनकी कुल कीमत करीब ₹1.28 लाख बताई गई है। इसके अलावा नकली सिक्के तैयार करने के लिए इस्तेमाल होने वाली मशीनें और अन्य सामान भी बरामद किया गया है।
जांच में सामने आया कि आरोपी सहारनपुर में नकली सिक्के बनाने के लिए नया ठिकाना तैयार करने की तैयारी में थे। पुलिस के मुताबिक, उनके पास से छह मशीनें, सिक्के बनाने वाली लोहे की डाई, बिना मुहर वाली डाई, पॉलिशिंग मशीन और कई अन्य उपकरण मिले हैं। सात रजिस्टर भी बरामद हुए हैं, जिनमें लेन-देन या नेटवर्क से जुड़े हिसाब-किताब की जानकारी होने की संभावना है। दो वाहन और आठ मोबाइल फोन भी पुलिस ने जब्त किए हैं।
पुलिस का दावा है कि गिरोह बड़े पैमाने पर नकली सिक्के तैयार करता था। पूछताछ के आधार पर रोजाना करीब 10 से 12 हजार नकली ₹20 के सिक्के तैयार करने की बात सामने आई है। आरोपियों ने कथित तौर पर इन सिक्कों को शराब के ठेकों, टोल प्लाजा और छोटे-बड़े कारोबारियों के माध्यम से बाजार में चलाया। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि नकली सिक्कों की सप्लाई किन-किन शहरों और राज्यों तक पहुंची थी।
इस मामले में पुलिस ने उपकार लूथरा को गिरोह का मुख्य आरोपी बताया है। पुलिस के अनुसार, वह पहले भी नकली सिक्कों से जुड़े मामलों में गिरफ्तार हो चुका है और तिहाड़ जेल में रह चुका है। उसके खिलाफ पहले से आपराधिक मामले होने की जानकारी भी सामने आई है। पुलिस अब उसके पुराने संपर्कों और उन लोगों की भूमिका की जांच कर रही है, जो नकली सिक्कों को अलग-अलग स्थानों पर खपाने में मदद करते थे।
बरामद सामान से पुलिस को यह संकेत मिला है कि गिरोह ने नकली सिक्के बनाने के लिए एक व्यवस्थित सेटअप तैयार किया था। डाई से लेकर पॉलिशिंग और तैयार सिक्कों की जांच के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरण तक मौके से मिले हैं। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि गिरोह नकली सिक्कों को देखने में असली जैसा बनाने के लिए किस तकनीक और सामग्री का इस्तेमाल करता था। इस जांच से नकली सिक्कों के निर्माण की पूरी प्रक्रिया और नेटवर्क की जानकारी सामने आने की उम्मीद है।
मामले की गंभीरता इस वजह से भी बढ़ जाती है कि नकली सिक्कों को रोजमर्रा के छोटे लेन-देन में आसानी से खपाने की कोशिश की गई। टोल प्लाजा, शराब की दुकानों और बाजारों में नकली सिक्कों के इस्तेमाल से आम लोगों और कारोबारियों को सीधे नुकसान हो सकता है। पुलिस अब ऐसे स्थानों और व्यापारियों से भी जानकारी जुटा सकती है, जहां इस तरह के सिक्के पहुंचाए जाने की आशंका है।
पुलिस ने गिरोह के अन्य संभावित सदस्यों और सप्लाई नेटवर्क की तलाश शुरू कर दी है। जांच में यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपियों ने अब तक कितने नकली सिक्के बाजार में पहुंचाए और किन राज्यों में उनका नेटवर्क सक्रिय था। इसके अलावा आरोपियों की संपत्ति और आर्थिक लेन-देन की भी जांच की जा रही है।
गिरफ्तार पांचों आरोपियों को अदालत में पेश किए जाने के बाद जेल भेज दिया गया है। पुलिस आगे की जांच में बरामद मोबाइल फोन, रजिस्टर, मशीनों और अन्य दस्तावेजों से जानकारी जुटा रही है। अधिकारियों के मुताबिक, जांच पूरी होने के बाद नकली सिक्कों के इस नेटवर्क की वास्तविक पहुंच और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका और स्पष्ट हो सकेगी।
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