Human Live Media

HomeNewsआपातकाल की वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर साधा निशाना, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का किया आह्वान

आपातकाल की वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कांग्रेस पर साधा निशाना, लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा का किया आह्वान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ के अवसर पर कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए वर्ष 1975
2049504-aa-7395915

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आपातकाल की 51वीं वर्षगांठ के अवसर पर कांग्रेस पर तीखा राजनीतिक हमला बोलते हुए वर्ष 1975 में लगाए गए आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र के इतिहास का सबसे अंधकारमय अध्याय बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल एक राजनीतिक घटना नहीं थी, बल्कि संविधान, लोकतांत्रिक संस्थाओं और नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर सीधा प्रहार था।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आपातकाल के दौरान अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध लगाए गए, अनेक विपक्षी नेताओं, पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया तथा लोकतांत्रिक संस्थाओं पर गंभीर दबाव बनाया गया। उन्होंने उन सभी लोगों को श्रद्धांजलि दी जिन्होंने उस दौर में लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष किया।
भाजपा ने इस अवसर पर देशभर में ‘संविधान हत्या दिवस’ के रूप में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए। पार्टी नेताओं ने कहा कि नई पीढ़ी को आपातकाल के इतिहास और उससे मिले लोकतांत्रिक सबक के बारे में जानकारी होना आवश्यक है। भाजपा का कहना है कि लोकतंत्र की रक्षा के लिए इतिहास की उन घटनाओं को याद रखना जरूरी है, जिन्होंने संविधान की मूल भावना को चुनौती दी थी।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी कांग्रेस की आलोचना करते हुए कहा कि जो दल आज संविधान बचाने की बात करता है, उसी ने आपातकाल लागू कर लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन किया था। उन्होंने कांग्रेस और राहुल गांधी पर दोहरे मानदंड अपनाने का आरोप लगाया।
दूसरी ओर कांग्रेस ने भाजपा के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि सरकार वर्तमान समय के महत्वपूर्ण मुद्दों से जनता का ध्यान हटाने का प्रयास कर रही है। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि लोकतंत्र की मजबूती केवल ऐतिहासिक घटनाओं की चर्चा से नहीं, बल्कि वर्तमान में संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और जवाबदेही सुनिश्चित करने से होती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आपातकाल का मुद्दा भारतीय राजनीति में समय-समय पर चर्चा का विषय बनता रहा है। भाजपा इसे लोकतंत्र की रक्षा और संवैधानिक मूल्यों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से जोड़कर प्रस्तुत करती है, जबकि कांग्रेस इस विषय पर अपना अलग दृष्टिकोण रखती है। ऐसे अवसरों पर दोनों दलों के बीच राजनीतिक बयानबाज़ी तेज हो जाती है।
विशेषज्ञों के अनुसार आपातकाल भारतीय राजनीतिक इतिहास की ऐसी घटना है जिसका उल्लेख चुनावी और वैचारिक बहसों में लगातार होता रहा है। यही कारण है कि इसकी वर्षगांठ पर प्रमुख राजनीतिक दल अपने-अपने दृष्टिकोण के साथ जनता के सामने आते हैं।
फिलहाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान ने एक बार फिर आपातकाल और उससे जुड़े राजनीतिक विमर्श को राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर भाजपा और कांग्रेस के बीच राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है।

Table of Contents

    Loading

    Comments are off for this post.