Last updated: September 8th, 2026 at 03:21 pm

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा और सामाजिक कार्यकर्ता आकृति चौधरी की राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) के तहत की गई हिरासत को रद्द करते हुए गौतम बुद्ध नगर के जिलाधिकारी के फैसले पर कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने हिरासत को मनमाना और बिना पर्याप्त आधार के बताया। साथ ही छात्रा को ₹5 लाख का मुआवजा देने का आदेश दिया, जिसकी वसूली संबंधित अधिकारियों के वेतन से करने को कहा गया है।
मामला अप्रैल 2026 में नोएडा में हुए श्रमिक प्रदर्शन से जुड़ा है। 25 वर्षीय आकृति चौधरी को प्रदर्शन से जुड़े मामलों में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने 13 मई को उनके खिलाफ NSA लगाया। वह कई महीनों से जेल में थीं और उन्होंने अपनी हिरासत को चुनौती देते हुए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अदालत ने 2 सितंबर को NSA के तहत जारी हिरासत आदेश को रद्द कर दिया था। विस्तृत आदेश अब सार्वजनिक हुआ है।
दो न्यायाधीशों की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि NSA जैसे कड़े कानून का इस्तेमाल सामान्य आपराधिक कार्रवाई के विकल्प के रूप में नहीं किया जा सकता। अदालत के अनुसार, निवारक हिरासत के लिए ठोस और विश्वसनीय सामग्री आवश्यक है। केवल आरोप, अनुमान या अधिकारियों की राय के आधार पर किसी व्यक्ति को लंबे समय तक हिरासत में रखना उचित नहीं है।
अदालत ने पुलिस की ओर से पेश किए गए रिकॉर्ड की भी जांच की। कोर्ट के मुताबिक ऐसा कोई ठोस संदेश या वीडियो सामने नहीं रखा गया, जिससे यह साबित हो कि आकृति ने हिंसा, आगजनी या सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के लिए लोगों को उकसाया था। अदालत ने प्रदर्शन को श्रमिकों की मांगों से जुड़ी गतिविधि के रूप में देखा और कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांग रखने का अधिकार संविधान के तहत संरक्षित है।
अदालत ने गौतम बुद्ध नगर की जिलाधिकारी मेधा रूपम की भूमिका पर भी गंभीर टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि उपलब्ध सामग्री की गहराई से जांच किए बिना NSA लागू किया गया। कोर्ट ने जिलाधिकारी के आचरण को बेहद गंभीर माना और उनके खिलाफ अपनी नाराजगी को सेवा रिकॉर्ड में दर्ज करने का निर्देश दिया। पुलिस अधिकारियों और मामले से जुड़े अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के संबंध में भी ऐसी टिप्पणी दर्ज करने को कहा गया है।
मामले में गिरफ्तारी के रिकॉर्ड को लेकर भी सवाल उठे। अदालत ने कहा कि आकृति को 11 अप्रैल को नोएडा के बॉटनिकल गार्डन मेट्रो स्टेशन से हिरासत में लिए जाने और सरकारी रिकॉर्ड में गिरफ्तारी की तारीख को लेकर अंतर दिखाई देता है। कोर्ट ने दस्तावेजों की टाइमलाइन पर सवाल उठाते हुए रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया को भी जांच के दायरे में रखा।
हाईकोर्ट ने अधिकारियों की संवैधानिक जिम्मेदारी पर भी जोर दिया। अदालत ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारियों की निष्ठा संविधान के प्रति होनी चाहिए और उन्हें नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करते हुए कानून के अनुसार काम करना चाहिए। अदालत ने चेतावनी दी कि प्रशासनिक शक्तियों का मनमाना इस्तेमाल लोकतांत्रिक व्यवस्था में नागरिक स्वतंत्रता के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
मुआवजे के तौर पर अदालत ने ₹5 लाख की राशि तय की है। यह रकम केवल सरकारी खजाने से देने के बजाय उस अधिकारी और अन्य जिम्मेदार अधिकारियों के वेतन से वसूलने का निर्देश दिया गया है, जिन्होंने हिरासत की प्रक्रिया में भूमिका निभाई थी। इससे प्रशासनिक जवाबदेही तय करने के अदालत के रुख का संकेत मिलता है।
हालांकि NSA हिरासत रद्द होने का अर्थ यह नहीं है कि आकृति चौधरी से जुड़े सभी आपराधिक मामले खत्म हो गए हैं। अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार, प्रदर्शन से जुड़े अन्य मामलों में वह न्यायिक हिरासत में रह सकती हैं और उन मामलों में जमानत की प्रक्रिया अलग से चलेगी।
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