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उत्तर प्रदेश में बाढ़ का संकट गहराया, 24 जिले प्रभावित; हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया

उत्तर प्रदेश में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। राज्य के 24 जिले इस समय बाढ़ की चपेट
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उत्तर प्रदेश में बाढ़ की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। राज्य के 24 जिले इस समय बाढ़ की चपेट में हैं और कई नदियां खतरे के निशान के ऊपर बह रही हैं। लगातार बारिश और बैराजों से छोड़े गए पानी के कारण कई निचले इलाकों में पानी फैल गया है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है तथा संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई गई है।

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    बाढ़ का असर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई दे रहा है। कई गांवों का मुख्य इलाकों से संपर्क प्रभावित हुआ है, जबकि कुछ स्थानों पर सड़क मार्ग से आवाजाही भी मुश्किल हो गई है। प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए नावों और राहत दलों की मदद ली जा रही है। बाढ़ की स्थिति को देखते हुए स्थानीय स्तर पर राहत शिविर और मेडिकल सुविधाएं भी सक्रिय की गई हैं।

    पिछले कुछ दिनों में राज्य के 26 जिलों में लगभग 3.53 लाख लोगों के प्रभावित होने की जानकारी सामने आई थी। 17,500 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया था, जबकि करीब 5,000 लोग राहत शिविरों में रह रहे थे। प्रशासन ने बड़ी संख्या में बाढ़ चौकियां, नावें और मेडिकल टीमें तैनात की हैं।

    नदियों का बढ़ता जलस्तर प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती बना हुआ है। गंगा समेत कई प्रमुख नदियों के जलस्तर में वृद्धि दर्ज की गई है। वाराणसी में गंगा का पानी चेतावनी स्तर से ऊपर पहुंचने के कारण घाटों और आसपास के निचले क्षेत्रों में भी असर देखा गया। कुछ प्रमुख घाटों के डूबने से सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुई हैं और प्रशासन को अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ रही है।

    चित्रकूट भी बाढ़ से प्रभावित प्रमुख क्षेत्रों में शामिल है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया और राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने प्रभावित लोगों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। प्रशासन को राहत सामग्री समय पर पहुंचाने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने के लिए कहा गया है।

    बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में प्रशासन ने राहत सामग्री पहुंचाने के लिए बड़े स्तर पर व्यवस्था की है। भोजन के पैकेट और पका हुआ भोजन लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। पानी से होने वाली बीमारियों के खतरे को देखते हुए क्लोरीन की गोलियां और ओआरएस पैकेट भी वितरित किए जा रहे हैं। मेडिकल टीमें प्रभावित इलाकों में पहुंचकर लोगों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों की निगरानी कर रही हैं।

    पशुओं की सुरक्षा के लिए भी प्रशासन ने अलग व्यवस्था की है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चारे की आपूर्ति की जा रही है, ताकि ग्रामीण परिवारों के पशुओं को भोजन की कमी का सामना न करना पड़े। कई इलाकों में लोगों के साथ-साथ पशुओं को भी सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने की जरूरत पड़ रही है।

    राहत और बचाव अभियान में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और स्थानीय प्रशासन की टीमें जुटी हुई हैं। जहां सड़क मार्ग से पहुंचना मुश्किल है, वहां नावों के जरिए लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है। कुछ स्थानों पर बाढ़ के कारण रेल और सड़क यातायात भी प्रभावित हुआ है, जिसके चलते प्रशासन और संबंधित विभाग लगातार स्थिति की निगरानी कर रहे हैं।

    बाढ़ की स्थिति को देखते हुए आने वाले दिनों में भी प्रशासन को सतर्क रहने की जरूरत है। जलस्तर में अचानक वृद्धि होने की स्थिति में निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की तैयारी रखी गई है। अधिकारियों को तटबंधों और संवेदनशील स्थानों की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।

    उत्तर प्रदेश में बाढ़ प्रभावित जिलों में राहत और बचाव अभियान जारी है। प्रशासन का फोकस प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखने, भोजन और चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने तथा जलस्तर की लगातार निगरानी पर है। आने वाले दिनों में नदियों के जलस्तर और स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर बाढ़ की स्थिति में बदलाव की संभावना बनी हुई है।

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