Last updated: September 7th, 2026 at 10:28 am

IRCTC होटल टेंडर से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग मामले में आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव और उनके परिवार के सदस्यों को फिलहाल अदालत से कोई राहत नहीं मिली है। राउज एवेन्यू कोर्ट ने आरोप तय करने को लेकर अपना फैसला एक बार फिर टाल दिया है। अब अदालत 10 सितंबर 2026 को इस मामले में आदेश सुना सकती है।
कई तारीखों के बाद भी नहीं आया फैसला
स्पेशल जज विशाल गोगने की अदालत में आरोप तय करने के मुद्दे पर लंबे समय से सुनवाई चल रही है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने अपना आदेश सुरक्षित रखा था, लेकिन तय तारीखों पर फैसला नहीं सुनाया जा सका।
इससे पहले 13 फरवरी, 6 मई, 22 मई, 9 जून, 16 जुलाई, 31 जुलाई और 14 अगस्त को भी आदेश टल चुका है। 29 अगस्त की सुनवाई के बाद अदालत ने 7 सितंबर की तारीख तय की थी। सोमवार की सुनवाई के बाद भी फैसला नहीं आया और अब अगली तारीख 10 सितंबर निर्धारित की गई है।
ED की चार्जशीट में लालू परिवार के कई नाम
प्रवर्तन निदेशालय ने इस मामले में लालू यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव, मीसा भारती, हेमा यादव और तेज प्रताप यादव समेत कई लोगों तथा कंपनियों को आरोपी बनाया है।
जांच एजेंसी का आरोप है कि IRCTC के तहत रांची और पुरी के होटलों के संचालन से जुड़े टेंडर में कथित अनियमितताएं हुईं और निजी पक्षों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। ED ने इसी कथित लेनदेन से जुड़े आर्थिक पहलुओं की मनी लॉन्ड्रिंग के एंगल से जांच की है।
क्या है IRCTC होटल टेंडर मामला?
यह मामला उस समय का है जब लालू प्रसाद यादव केंद्र सरकार में रेल मंत्री थे। आरोप है कि IRCTC के जरिए रांची और पुरी में संचालित दो होटलों का ठेका निजी कंपनियों को देने की प्रक्रिया में नियमों की कथित अनदेखी की गई।
CBI ने भी इस मामले में कथित भ्रष्टाचार और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े आरोपों की जांच की है, जबकि ED की जांच कथित अपराध से अर्जित धन और उससे जुड़े लेनदेन पर केंद्रित रही है।
16 आरोपी और कंपनियां शामिल
मामले में कुल 16 आरोपियों और कंपनियों को आरोपी बनाया गया है। इनमें लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी, तेजस्वी यादव के अलावा सरला गुप्ता, गौरव गुप्ता, नाथमल काकरानिया, राहुल यादव, विजय त्रिपाठी और देवकी नंदन तुलस्यान समेत अन्य नाम शामिल हैं।
इसके अलावा लारा प्रोजेक्ट एलएलपी, सुजाता होटल्स और अभिषेक फाइनेंस प्राइवेट लिमिटेड जैसी कंपनियों को भी मामले में आरोपी बनाया गया है।
10 सितंबर को तय होगी आगे की दिशा
आरोप तय करने पर फैसला लगातार टलने के बाद अब सभी की नजर 10 सितंबर पर है। उस दिन अदालत यह तय कर सकती है कि मामले में आरोप तय किए जाएं या नहीं। हालांकि, आरोप तय होना किसी आरोपी के दोषी साबित होने के बराबर नहीं है और अंतिम निर्णय न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
![]()
Comments are off for this post.