Last updated: August 22nd, 2026 at 05:37 pm

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सरकारी डॉक्टरों को दिए जाने वाले नॉन-प्रैक्टिसिंग अलाउंस यानी NPA को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की रिपोर्ट में कई अनियमितताओं की ओर इशारा किया गया है। ऑडिट में निर्धारित नियमों और सीमा से अधिक भुगतान किए जाने के मामलों पर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के सामने आने के बाद सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में वित्तीय अनुशासन और भुगतान प्रक्रिया को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
NPA सरकारी डॉक्टरों को निजी प्रैक्टिस नहीं करने के बदले दिए जाने वाला भत्ता है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में कार्यरत चिकित्सक अपनी सेवाओं पर पूरा ध्यान दें और सरकारी सेवा के दौरान निजी प्रैक्टिस से जुड़े हितों का टकराव न हो।
CAG की ऑडिट प्रक्रिया के दौरान सरकारी चिकित्सकों को दिए गए NPA से संबंधित रिकॉर्ड और भुगतान की जांच की गई। जांच में ऐसे मामलों की पहचान की गई जहां निर्धारित नियमों के अनुसार भुगतान किए जाने को लेकर सवाल खड़े हुए। रिपोर्ट में भुगतान की प्रक्रिया और पात्रता से जुड़े प्रावधानों के पालन पर ध्यान दिलाया गया है।
सरकारी डॉक्टरों के वेतन और भत्ते से जुड़े नियम इसलिए महत्वपूर्ण हैं क्योंकि राज्य के स्वास्थ्य बजट का बड़ा हिस्सा कर्मचारियों के वेतन और अन्य सुविधाओं पर खर्च होता है। यदि किसी भत्ते का भुगतान निर्धारित नियमों से अलग तरीके से होता है तो इससे सरकारी वित्तीय व्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है।
NPA का भुगतान डॉक्टरों की सेवा शर्तों से जुड़ा हुआ है। सरकारी सेवा में नियुक्त डॉक्टरों को निजी प्रैक्टिस से दूर रखने के लिए यह व्यवस्था लागू की जाती है। इसके बदले उन्हें निर्धारित नियमों के तहत भत्ता दिया जाता है। इसलिए इस भुगतान में पात्रता, सीमा और संबंधित शर्तों का पालन आवश्यक होता है।
ऑडिट में सामने आई आपत्तियों का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भुगतान की निगरानी कितनी प्रभावी तरीके से की गई। सरकारी विभागों में वेतन और भत्ते की प्रक्रिया कई स्तरों से गुजरती है। ऐसे में यदि किसी स्तर पर रिकॉर्ड की जांच या नियमों की पुष्टि ठीक से नहीं होती तो गलत भुगतान की संभावना बढ़ सकती है।
स्वास्थ्य विभाग के लिए यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता और सेवाओं की गुणवत्ता सीधे आम लोगों से जुड़ी है। सरकार डॉक्टरों को बेहतर सेवा शर्तें उपलब्ध कराना चाहती है, लेकिन इसके साथ सरकारी धन के इस्तेमाल में वित्तीय अनुशासन बनाए रखना भी जरूरी है।
CAG की रिपोर्ट का उद्देश्य केवल अनियमितता की ओर ध्यान दिलाना नहीं होता, बल्कि सरकारी विभागों को अपनी प्रक्रियाओं में सुधार के लिए संकेत देना भी होता है। संबंधित विभाग से ऐसे मामलों में जवाब और कार्रवाई की अपेक्षा की जाती है।
यदि भुगतान में वास्तव में नियमों से अधिक राशि दी गई है तो विभाग को यह पता लगाना होगा कि ऐसा किस स्तर पर हुआ। इसके लिए संबंधित रिकॉर्ड की दोबारा जांच, जिम्मेदारी तय करने और भविष्य में ऐसी स्थिति रोकने के लिए व्यवस्था मजबूत करने की जरूरत हो सकती है।
सरकार के सामने एक चुनौती यह भी है कि डॉक्टरों के बीच इस तरह की वित्तीय समीक्षा को लेकर असंतोष पैदा न हो। डॉक्टरों के वेतन और भत्ते उनकी सेवा शर्तों का हिस्सा हैं। इसलिए किसी भी बदलाव या वसूली की प्रक्रिया स्पष्ट नियमों और उचित जांच के आधार पर ही होनी चाहिए।
दूसरी ओर, सरकारी धन की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। स्वास्थ्य क्षेत्र में उपलब्ध बजट का इस्तेमाल अस्पतालों की सुविधाओं, दवाओं, उपकरणों, डॉक्टरों और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में किया जाता है। यदि वित्तीय अनियमितताएं होती हैं तो इससे संसाधनों के प्रभावी इस्तेमाल पर असर पड़ सकता है।
NPA से जुड़े मामलों में डिजिटल रिकॉर्ड और स्वचालित निगरानी प्रणाली भी उपयोगी साबित हो सकती है। डॉक्टर की नियुक्ति, वेतन, पात्रता और भत्ते से संबंधित जानकारी एकीकृत डिजिटल सिस्टम में उपलब्ध होने से भुगतान की निगरानी आसान हो सकती है।
सरकारी अस्पतालों में काम करने वाले डॉक्टरों के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश भी जरूरी हैं। यदि NPA लेने की शर्तें और निजी प्रैक्टिस से संबंधित नियम स्पष्ट रूप से लागू किए जाते हैं तो विवाद की संभावना कम हो सकती है।
इस मामले का असर केवल वित्तीय रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। यह सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता से भी जुड़ा है। सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले प्रत्येक भत्ते के लिए स्पष्ट नियम और प्रभावी निगरानी जरूरी होती है।
उत्तर प्रदेश सरकार के लिए अब चुनौती CAG की आपत्तियों का परीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई करना है। यदि रिकॉर्ड की समीक्षा में भुगतान संबंधी गलतियां सामने आती हैं तो उन्हें ठीक करने के साथ भविष्य में ऐसी अनियमितताओं को रोकने की व्यवस्था बनानी होगी।
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