Last updated: July 8th, 2026 at 12:31 pm

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने देशभर में आतंकी कट्टरपंथ और उसके वित्तपोषण से जुड़े नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए नौ राज्यों में एक साथ 20 स्थानों पर छापेमारी की। यह अभियान आंध्र प्रदेश में दर्ज एक आतंकी कट्टरपंथ से जुड़े मामले की जांच के सिलसिले में चलाया गया। एनआईए के साथ विभिन्न राज्यों की पुलिस और केंद्रीय सुरक्षा बलों ने भी संयुक्त रूप से इस अभियान में हिस्सा लिया। अधिकारियों के अनुसार, छापेमारी के दौरान कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल उपकरण और संदिग्ध वित्तीय लेन-देन से जुड़े रिकॉर्ड बरामद किए गए हैं।
एनआईए के मुताबिक, जांच का मुख्य उद्देश्य ऐसे नेटवर्क की पहचान करना है जो युवाओं को कट्टरपंथ की ओर प्रेरित करने, आतंकी संगठनों के लिए धन जुटाने और ऑनलाइन माध्यमों से संदिग्ध गतिविधियों को बढ़ावा देने का प्रयास कर रहे थे। प्रारंभिक जांच में यह भी सामने आया है कि कुछ संदिग्ध व्यक्तियों के माध्यम से धन का इस्तेमाल कथित तौर पर नए लोगों की भर्ती और प्रचार गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। एजेंसी ने बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेज दिया है ताकि डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर पूरे नेटवर्क का पता लगाया जा सके।
यह कार्रवाई उत्तर प्रदेश, दिल्ली, बिहार, महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल सहित कई राज्यों में एक साथ की गई। अधिकारियों का कहना है कि समन्वित अभियान के कारण विभिन्न राज्यों में सक्रिय संदिग्ध नेटवर्क के बीच आपसी संपर्कों की भी जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन गतिविधियों का संचालन किस स्तर से किया जा रहा था और क्या इसके अंतरराष्ट्रीय संपर्क भी मौजूद हैं।
एनआईए ने बताया कि छापेमारी के दौरान कई मोबाइल फोन, लैपटॉप, हार्ड डिस्क, बैंकिंग दस्तावेज और अन्य डिजिटल सामग्री जब्त की गई है। इनकी जांच के बाद यह स्पष्ट हो सकेगा कि संदिग्ध किस प्रकार एक-दूसरे के संपर्क में थे और धन का प्रवाह किन माध्यमों से किया जा रहा था। एजेंसी ने कहा कि जांच अभी शुरुआती चरण में है और आवश्यकता पड़ने पर आगे और भी छापेमारी या पूछताछ की जा सकती है।
केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि हाल के वर्षों में आतंकी संगठन सोशल मीडिया, एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और डिजिटल भुगतान प्रणालियों का अधिक उपयोग कर रहे हैं। ऐसे में केवल पारंपरिक जांच पर्याप्त नहीं है, बल्कि तकनीकी निगरानी और डिजिटल फॉरेंसिक भी बेहद महत्वपूर्ण हो गए हैं। इसी कारण इस अभियान में साइबर विशेषज्ञों और वित्तीय जांच से जुड़े अधिकारियों की भी मदद ली जा रही है।
सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि देशभर में एक साथ की गई इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल संदिग्धों को पकड़ना नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क को तोड़ना है। उनका कहना है कि यदि शुरुआती जांच में मिले साक्ष्यों की पुष्टि होती है तो इससे कई राज्यों में फैले आतंकी फंडिंग और कट्टरपंथ से जुड़े तंत्र का खुलासा हो सकता है। विशेषज्ञों ने यह भी कहा कि राज्यों और केंद्रीय एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय से इस तरह के मामलों में तेजी से कार्रवाई संभव हो रही है।
राजनीतिक स्तर पर भी इस कार्रवाई को गंभीरता से देखा जा रहा है। केंद्र सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ अपनी ‘शून्य सहिष्णुता’ नीति दोहराते हुए कहा है कि देश की सुरक्षा से समझौता करने वाले किसी भी व्यक्ति या संगठन के खिलाफ कानून के अनुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं जांच एजेंसियों ने स्पष्ट किया है कि सभी संदिग्धों के खिलाफ कार्रवाई केवल उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही की जाएगी।
फिलहाल एनआईए की जांच जारी है और बरामद दस्तावेजों व डिजिटल उपकरणों का विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है। एजेंसी का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही पूरे नेटवर्क, उसके वित्तीय स्रोतों और संभावित अंतरराष्ट्रीय संपर्कों के बारे में स्पष्ट जानकारी सामने आएगी। देशभर में चलाए गए इस समन्वित अभियान को राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है और आने वाले दिनों में इस मामले में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।
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