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पीएमओ ने अल नीनो की संभावित चुनौती पर की उच्चस्तरीय समीक्षा, मानसून और कृषि तैयारियों पर दिया विशेष जोर

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने देश में अल नीनो (El Niño) की संभावित स्थिति और उसके प्रभावों को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा
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प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने देश में अल नीनो (El Niño) की संभावित स्थिति और उसके प्रभावों को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में मानसून की प्रगति, कृषि उत्पादन, जल संसाधनों की उपलब्धता, खाद्यान्न भंडारण और आपदा प्रबंधन की तैयारियों का विस्तृत आकलन किया गया। केंद्र सरकार ने सभी संबंधित मंत्रालयों और राज्यों को निर्देश दिए हैं कि मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जाए और किसी भी संभावित चुनौती से निपटने के लिए समय रहते आवश्यक कदम उठाए जाएं।

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    बैठक में भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD), कृषि मंत्रालय, जल शक्ति मंत्रालय, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग तथा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) के वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। अधिकारियों ने मानसून की मौजूदा स्थिति, वर्षा के क्षेत्रवार वितरण और अल नीनो की संभावित परिस्थितियों पर प्रस्तुति दी। समीक्षा के दौरान इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि किसानों तक मौसम संबंधी सटीक जानकारी समय पर पहुंचे ताकि वे फसल प्रबंधन से जुड़े निर्णय बेहतर ढंग से ले सकें।

    सरकार ने कहा कि खरीफ फसलों की बुवाई, सिंचाई व्यवस्था और जलाशयों में उपलब्ध पानी की लगातार निगरानी की जा रही है। यदि किसी क्षेत्र में सामान्य से कम वर्षा होती है तो वहां वैकल्पिक फसल योजना, सिंचाई सहायता और अन्य राहत उपायों को समय पर लागू किया जाएगा। कृषि मंत्रालय को राज्यों के साथ समन्वय बढ़ाने और किसानों को आवश्यक तकनीकी सलाह उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं।

    बैठक में खाद्यान्न सुरक्षा पर भी विस्तार से चर्चा हुई। सरकार ने स्पष्ट किया कि देश में आवश्यक खाद्यान्न का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और किसी भी आपात स्थिति में सार्वजनिक वितरण प्रणाली के माध्यम से आवश्यक आपूर्ति सुनिश्चित की जाएगी। साथ ही उर्वरकों, बीजों और कृषि उपकरणों की उपलब्धता बनाए रखने पर भी जोर दिया गया ताकि किसानों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

    जल संसाधनों की स्थिति की समीक्षा करते हुए विभिन्न बांधों और जलाशयों में जलस्तर की जानकारी ली गई। जल शक्ति मंत्रालय को निर्देश दिया गया कि पेयजल आपूर्ति और सिंचाई परियोजनाओं की नियमित निगरानी की जाए। जिन क्षेत्रों में जल संकट की संभावना हो, वहां पहले से वैकल्पिक योजनाएं तैयार रखने को कहा गया है। इसके अलावा राज्यों को वर्षा जल संचयन और जल संरक्षण कार्यक्रमों को तेज करने की सलाह भी दी गई है।

    आपदा प्रबंधन एजेंसियों को भी सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं। केंद्र सरकार ने कहा कि बाढ़ और सूखे जैसी दोनों प्रकार की संभावित परिस्थितियों के लिए राज्यों को पहले से तैयार रहना होगा। राहत सामग्री, बचाव दल और संचार व्यवस्था को मजबूत रखने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसी भी आपदा की स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके।

    जलवायु विशेषज्ञों का कहना है कि अल नीनो का प्रभाव हर क्षेत्र में समान नहीं होता, इसलिए स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार तैयारी करना आवश्यक है। उनका मानना है कि समय पर मौसम संबंधी पूर्वानुमान, वैज्ञानिक कृषि सलाह और बेहतर जल प्रबंधन से संभावित नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। विशेषज्ञों ने किसानों से भी आधिकारिक मौसम बुलेटिन पर भरोसा करने और कृषि विभाग के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।

    केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और सभी संबंधित एजेंसियां समन्वय के साथ काम कर रही हैं। आने वाले हफ्तों में मानसून की प्रगति के अनुसार आगे की रणनीति तय की जाएगी। सरकार का कहना है कि किसानों के हितों की रक्षा, खाद्यान्न सुरक्षा बनाए रखने और आम जनता पर किसी भी प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए हर आवश्यक कदम उठाया जाएगा।

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