Last updated: July 9th, 2026 at 11:27 am

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ऑस्ट्रेलिया-भारत सीईओ फोरम और इकोनॉमिक रोडमैप बिजनेस कार्यक्रम को संबोधित करते हुए दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और औद्योगिक सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने का आह्वान किया। अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और वैश्विक निवेशकों के लिए सबसे आकर्षक बाजारों में से एक बन चुका है। उन्होंने ऑस्ट्रेलियाई उद्योग जगत से भारत के बुनियादी ढांचा, विनिर्माण, हरित ऊर्जा, डिजिटल अर्थव्यवस्था, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल्स) और रक्षा उत्पादन जैसे क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं रहे हैं, बल्कि व्यापार, शिक्षा, प्रौद्योगिकी, नवाचार और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में भी उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाएं एक-दूसरे की पूरक हैं और आने वाले वर्षों में सहयोग की संभावनाएं और अधिक बढ़ेंगी। उन्होंने विश्वास जताया कि निजी क्षेत्र की सक्रिय भागीदारी से द्विपक्षीय व्यापार और निवेश में नई गति आएगी।
कार्यक्रम में भारत और ऑस्ट्रेलिया की प्रमुख कंपनियों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। चर्चा के दौरान स्वच्छ ऊर्जा, हरित हाइड्रोजन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), कृषि प्रौद्योगिकी, खाद्य प्रसंस्करण, शिक्षा, स्टार्टअप और डिजिटल भुगतान जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों के उद्योगपतियों ने नई साझेदारियों और संयुक्त निवेश परियोजनाओं में रुचि दिखाई। सरकार का मानना है कि इससे रोजगार सृजन और तकनीकी विकास को भी बढ़ावा मिलेगा।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भारत के आर्थिक सुधारों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में कर सुधार, डिजिटल गवर्नेंस, बुनियादी ढांचे का विस्तार, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजना और कारोबार करने में आसानी जैसे कदमों से भारत वैश्विक निवेशकों के लिए अधिक भरोसेमंद गंतव्य बना है। उन्होंने कहा कि सरकार स्थिर नीतिगत वातावरण और पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से विदेशी निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
बैठक में महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति पर भी विशेष चर्चा हुई। इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी निर्माण और सेमीकंडक्टर उद्योग के विस्तार के लिए आवश्यक लिथियम और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच सहयोग को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों देशों ने इस क्षेत्र में दीर्घकालिक साझेदारी को मजबूत करने की इच्छा व्यक्त की।
विदेश नीति और आर्थिक मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते वैश्विक परिदृश्य के बीच भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक सहयोग का महत्व लगातार बढ़ रहा है। दोनों देश सुरक्षित आपूर्ति श्रृंखला, समुद्री सुरक्षा और तकनीकी सहयोग के माध्यम से क्षेत्रीय स्थिरता को भी मजबूत करना चाहते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, व्यापार और निवेश में वृद्धि से दोनों देशों की अर्थव्यवस्थाओं को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा।
कार्यक्रम के दौरान कई व्यावसायिक प्रतिनिधियों ने भारत में निवेश की संभावनाओं पर सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उद्योग जगत का मानना है कि भारत का विशाल उपभोक्ता बाजार, तेज आर्थिक विकास और सरकार की निवेश समर्थक नीतियां विदेशी कंपनियों के लिए नए अवसर प्रदान कर रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत वैश्विक उद्योग जगत के साथ मिलकर विकास, नवाचार और सतत आर्थिक प्रगति का नया अध्याय लिखने के लिए तैयार है। उन्होंने दोनों देशों के उद्योगपतियों से दीर्घकालिक साझेदारी के साथ आगे बढ़ने का आह्वान किया।
विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की ऑस्ट्रेलिया यात्रा और सीईओ फोरम में दिया गया संदेश भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक संबंधों को नई दिशा देगा। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिल सकती है, जिससे हिंद-प्रशांत क्षेत्र में आर्थिक साझेदारी और अधिक मजबूत होगी।
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