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गुवाहाटी में BRICS एंटी-ड्रग एजेंसियों की बैठक शुरू, सिंथेटिक ड्रग्स और अंतरराष्ट्रीय तस्करी पर भारत का बड़ा फोकस

भारत की अध्यक्षता में गुवाहाटी (असम) में BRICS देशों की एंटी-ड्रग एजेंसियों की दो दिवसीय उच्चस्तरीय बैठक सोमवार से शुरू
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भारत की अध्यक्षता में गुवाहाटी (असम) में BRICS देशों की एंटी-ड्रग एजेंसियों की दो दिवसीय उच्चस्तरीय बैठक सोमवार से शुरू हो गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका सहित विस्तारित BRICS समूह के सदस्य देशों के वरिष्ठ अधिकारी और मादक पदार्थ नियंत्रण एजेंसियों के प्रमुख हिस्सा ले रहे हैं। बैठक का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ती सिंथेटिक ड्रग्स, डार्कनेट के जरिए मादक पदार्थों की तस्करी और क्रिप्टोकरेंसी आधारित अवैध वित्तीय लेनदेन जैसी चुनौतियों से मिलकर निपटने की रणनीति तैयार करना है।

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    यह बैठक केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) द्वारा आयोजित की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, भारत इस मंच का उपयोग केवल विचार-विमर्श तक सीमित नहीं रखना चाहता, बल्कि BRICS देशों के बीच व्यावहारिक और परिणाम-आधारित सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है। इसी उद्देश्य से खुफिया जानकारी साझा करने, संयुक्त अभियान चलाने और संस्थागत सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

    बैठक के दौरान सदस्य देश अपने-अपने देशों में मादक पदार्थों की स्थिति और उससे निपटने के अनुभव साझा करेंगे। छह प्रमुख विषयों पर विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, जिनमें सिंथेटिक ड्रग्स की रोकथाम, प्रीकर्सर केमिकल्स की निगरानी, डार्कनेट के माध्यम से होने वाली तस्करी, डिजिटल तकनीक का उपयोग, क्षमता निर्माण और अंतरराष्ट्रीय सहयोग शामिल हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते वैश्विक अपराध नेटवर्क से निपटने के लिए इस तरह का समन्वय पहले से कहीं अधिक आवश्यक हो गया है।

    भारत ने हाल के वर्षों में नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ व्यापक अभियान चलाया है। सरकार का कहना है कि प्रवर्तन कार्रवाई के साथ-साथ जागरूकता, पुनर्वास और तकनीकी निगरानी को भी समान महत्व दिया जा रहा है। हाल ही में भारत ने ‘विजन डॉक्यूमेंट ऑन नारकोटिक्स कंट्रोल 2026–2029’ भी जारी किया है, जिसका उद्देश्य देश की मादक पदार्थ नियंत्रण प्रणाली को और मजबूत बनाना है।

    विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर सिंथेटिक ड्रग्स का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है। नई साइकोएक्टिव दवाओं (NPS), ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और क्रिप्टोकरेंसी के माध्यम से होने वाले अवैध लेनदेन ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं। ऐसे में BRICS देशों के बीच तकनीकी सहयोग और वास्तविक समय में खुफिया जानकारी साझा करना बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

    भारत की 2026 BRICS अध्यक्षता के दौरान आयोजित यह बैठक देश की वैश्विक नेतृत्व भूमिका को भी मजबूत करती है। भारत लगातार यह संदेश दे रहा है कि अंतरराष्ट्रीय अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए केवल राष्ट्रीय प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि बहुपक्षीय सहयोग और साझा रणनीति की आवश्यकता है।

    बैठक के समापन पर एक संयुक्त घोषणा (Joint Declaration) जारी किए जाने की संभावना है, जिसमें भविष्य के सहयोग, संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रमों, सूचना आदान-प्रदान और मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ समन्वित कार्रवाई की रूपरेखा तय की जा सकती है।

    गुवाहाटी में आयोजित यह सम्मेलन भारत की वैश्विक कूटनीतिक और सुरक्षा प्राथमिकताओं के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सदस्य देशों के बीच प्रस्तावित सहयोग प्रभावी रूप से लागू होता है, तो इससे अंतरराष्ट्रीय ड्रग तस्करी के नेटवर्क पर अंकुश लगाने और क्षेत्रीय सुरक्षा को मजबूत करने में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है।

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