Last updated: July 6th, 2026 at 12:40 pm

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने महत्वपूर्ण तीन देशों के विदेश दौरे की शुरुआत की। इस यात्रा के दौरान वे इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड का दौरा करेंगे। विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह यात्रा भारत की ‘एक्ट ईस्ट नीति’ (Act East Policy) और हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) क्षेत्र में रणनीतिक सहयोग को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। दौरे के दौरान व्यापार, निवेश, रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, स्वच्छ ऊर्जा और प्रौद्योगिकी जैसे कई अहम विषयों पर चर्चा होगी।
प्रधानमंत्री के दौरे का पहला पड़ाव इंडोनेशिया है, जहां उनकी राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ द्विपक्षीय वार्ता होगी। दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा, रक्षा सहयोग, डिजिटल अर्थव्यवस्था और व्यापारिक संबंधों को और मजबूत करने पर विशेष जोर दिया जाएगा। भारत और इंडोनेशिया हिंद महासागर क्षेत्र के महत्वपूर्ण साझेदार हैं और दोनों देश मुक्त एवं सुरक्षित समुद्री मार्गों के पक्षधर रहे हैं।
इसके बाद प्रधानमंत्री ऑस्ट्रेलिया पहुंचेंगे। भारत और ऑस्ट्रेलिया के संबंध हाल के वर्षों में तेजी से मजबूत हुए हैं। दोनों देश क्वाड (Quad) समूह के सदस्य हैं और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता तथा नियम-आधारित व्यवस्था बनाए रखने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग, महत्वपूर्ण खनिज (Critical Minerals), शिक्षा, ऊर्जा और निवेश से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
दौरे का अंतिम चरण न्यूज़ीलैंड में होगा। भारत और न्यूज़ीलैंड के बीच कृषि, डेयरी, शिक्षा, पर्यटन और व्यापार के क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर बातचीत होगी। दोनों देशों के बीच आर्थिक संबंधों को मजबूत करने और लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने पर भी जोर दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह यात्रा भारत की प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती कूटनीतिक सक्रियता का महत्वपूर्ण संकेत है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस दौरे का उद्देश्य केवल द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना ही नहीं, बल्कि वैश्विक चुनौतियों जैसे जलवायु परिवर्तन, आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain), ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दों पर साझा रणनीति विकसित करना भी है। इसके अलावा भारतीय कंपनियों के लिए निवेश और व्यापार के नए अवसरों पर भी चर्चा की जाएगी।
विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में हिंद-प्रशांत क्षेत्र का महत्व लगातार बढ़ रहा है। चीन की बढ़ती सक्रियता, समुद्री सुरक्षा और वैश्विक व्यापार मार्गों की सुरक्षा जैसे विषयों के बीच भारत अपने रणनीतिक साझेदारों के साथ सहयोग को और मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। ऐसे में प्रधानमंत्री का यह दौरा भारत की दीर्घकालिक विदेश नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
आर्थिक दृष्टि से भी यह यात्रा महत्वपूर्ण है। भारत विदेशी निवेश आकर्षित करने, निर्यात बढ़ाने और नई तकनीकों में सहयोग प्राप्त करने पर लगातार जोर दे रहा है। ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड जैसे देशों के साथ व्यापारिक संबंधों का विस्तार भारतीय उद्योग, शिक्षा, कृषि और ऊर्जा क्षेत्र के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है। वहीं इंडोनेशिया के साथ समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय संपर्क को बढ़ावा मिलने की संभावना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की यह तीन देशों की यात्रा भारत की वैश्विक कूटनीतिक सक्रियता का एक महत्वपूर्ण चरण मानी जा रही है। आने वाले दिनों में होने वाली उच्चस्तरीय बैठकों, संभावित समझौतों और संयुक्त घोषणाओं पर देश और दुनिया की नजर रहेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इस दौरे से भारत के रणनीतिक, आर्थिक और कूटनीतिक हितों को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
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