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गोमती बाढ़ का स्थायी समाधान, लखनऊ से नैमिषारण्य तक तटबंध बनाने की तैयारी

लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद अब सरकार ने बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा
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लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने के बाद अब सरकार ने बाढ़ की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कदम बढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोमती नदी के किनारे बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेते हुए भविष्य में ऐसी स्थिति को रोकने के लिए मजबूत तटबंध और सुरक्षा व्यवस्था विकसित करने की जरूरत पर जोर दिया है। प्रस्तावित योजना के तहत लखनऊ से सीतापुर के नैमिषारण्य क्षेत्र तक नदी के संवेदनशील हिस्सों में तटबंध बनाए जाने की योजना पर काम किया जा सकता है।

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    हाल के दिनों में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से लखनऊ के कई निचले इलाकों में पानी भर गया। नदी के आसपास रहने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई जगहों पर सड़कें पानी में डूब गईं और कुछ रिहायशी इलाकों में भी पानी पहुंच गया। प्रशासन को राहत और बचाव अभियान चलाना पड़ा। प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के लिए नावों का इस्तेमाल किया गया और राहत सामग्री भी उपलब्ध कराई गई।

     

    मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि गोमती नदी में आने वाली बाढ़ की समस्या को केवल तत्काल राहत कार्यों के जरिए नहीं बल्कि स्थायी योजना के माध्यम से हल किया जाना चाहिए। इसके लिए नदी के किनारे ऐसे क्षेत्रों की पहचान करने की जरूरत है जहां हर साल या भारी बारिश के दौरान पानी फैलने का खतरा रहता है।

     

    प्रस्तावित तटबंध योजना का उद्देश्य नदी के पानी को रिहायशी और आबादी वाले इलाकों में फैलने से रोकना है। इसके साथ ही नदी के किनारे जल निकासी व्यवस्था और बाढ़ नियंत्रण से जुड़े दूसरे उपायों को भी मजबूत किया जा सकता है। अधिकारियों को संवेदनशील स्थानों का सर्वे करने और वहां की भौगोलिक स्थिति का अध्ययन करने के निर्देश दिए जा सकते हैं।

     

    लखनऊ में इस बार आई बाढ़ की स्थिति ने एक बार फिर शहर की जल निकासी व्यवस्था और नदी के आसपास हुए विकास को लेकर सवाल खड़े किए हैं। कई इलाकों में बारिश का पानी और नदी का बढ़ा हुआ पानी एक साथ जमा होने से जलभराव की समस्या गंभीर हो गई। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि केवल तटबंध बनाना ही पर्याप्त नहीं होगा। नदी के प्राकृतिक प्रवाह, नालों की सफाई, जल निकासी और बाढ़ क्षेत्र में होने वाले निर्माण को भी ध्यान में रखना होगा।

     

    गोमती के ऊपरी हिस्सों में भारी बारिश होने के बाद पानी धीरे-धीरे नदी के निचले हिस्सों की ओर पहुंचता है। यही कारण है कि कई बार लखनऊ में बारिश रुकने के बाद भी नदी का जलस्तर बढ़ता रहता है। इस परिस्थिति को देखते हुए बाढ़ की पूर्व चेतावनी और निगरानी प्रणाली को भी मजबूत करने की जरूरत महसूस की जा रही है।

     

    नई योजना के तहत नदी के किनारे बाढ़ की दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्रों का विस्तृत सर्वे कराया जा सकता है। सर्वे के आधार पर यह तय किया जाएगा कि किन स्थानों पर तटबंध की आवश्यकता है और कहां जल निकासी की अतिरिक्त व्यवस्था की जानी चाहिए। इससे भविष्य में बाढ़ के दौरान नुकसान को कम करने में मदद मिल सकती है।

     

    नैमिषारण्य क्षेत्र धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। यदि लखनऊ से लेकर नैमिषारण्य तक गोमती के किनारे बाढ़ नियंत्रण की व्यवस्था मजबूत होती है तो इससे नदी के आसपास रहने वाले लोगों के साथ-साथ इस क्षेत्र में आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को भी अप्रत्यक्ष रूप से लाभ मिल सकता है।

     

    सरकार की प्राथमिकता फिलहाल प्रभावित लोगों को राहत पहुंचाना और मौजूदा बाढ़ की स्थिति को नियंत्रित करना है। इसके साथ ही भविष्य में ऐसी परिस्थितियां दोबारा न बनें, इसके लिए दीर्घकालिक योजना तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है।

     

    गोमती नदी की बाढ़ को लेकर तैयार की जा रही स्थायी योजना आने वाले समय में लखनऊ और आसपास के क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकती है। यदि तटबंध, जल निकासी, नदी प्रबंधन और बाढ़ पूर्व चेतावनी प्रणाली को एक साथ मजबूत किया जाता है तो भारी बारिश के दौरान होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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