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लखनऊ में गोमती का जलस्तर बढ़ा, कई इलाकों में बाढ़ जैसे हालात; राहत-बचाव अभियान तेज

लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से शहर के कई निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं।
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लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर बढ़ने से शहर के कई निचले इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। नदी का पानी कई रिहायशी इलाकों तक पहुंच गया है, जिसके कारण लोगों को घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ रहा है। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान तेज कर दिया है। हालात को देखते हुए बड़ी संख्या में नावें तैनात की गई हैं और जरूरतमंद लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।

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    गोमती के बढ़ते जलस्तर का सबसे ज्यादा असर नदी के आसपास बसे निचले इलाकों में देखने को मिल रहा है। फैजुल्लागंज, दाउदनगर, घैला और आसपास की कई बस्तियों में सड़कों और घरों तक पानी पहुंच गया है। कुछ स्थानों पर लोगों को नावों और दूसरे साधनों की मदद से सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है। कई परिवारों ने अपने जरूरी सामान को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाना शुरू कर दिया है।

     

    गोमती नगर एक्सटेंशन के कुछ हिस्से भी जलभराव से प्रभावित हुए हैं। यहां कई घरों में पानी घुसने की खबर सामने आई है। कुछ परिवारों को अस्थायी रूप से होटल या अन्य सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा है। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है।

     

    अधिकारियों के अनुसार, लखनऊ में बाढ़ की स्थिति केवल स्थानीय बारिश का नतीजा नहीं है। गोमती के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में हुई भारी बारिश का पानी कई दिनों की यात्रा के बाद लखनऊ पहुंचा है। इसी वजह से शहर में भारी बारिश कम होने के बाद भी नदी का जलस्तर बढ़ता रहा।

     

    गोमती नदी के ऊपरी हिस्से में भारी बारिश के कारण बड़ी मात्रा में पानी नदी में आया। यह पानी धीरे-धीरे नीचे की ओर बढ़ता हुआ लखनऊ तक पहुंचा। अधिकारियों के मुताबिक नदी के प्रवाह को लखनऊ तक पहुंचने में कई दिन लग सकते हैं। इस दौरान रास्ते में मिलने वाली छोटी नदियों और नालों का पानी भी गोमती के प्रवाह को बढ़ाता है।

     

    राहत कार्यों के लिए प्रशासन ने 60 नावें तैनात की हैं और अतिरिक्त नावों को भी अभियान में शामिल किया जा रहा है। प्रभावित इलाकों में राहत सामग्री बांटी जा रही है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ाई है ताकि लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के साथ-साथ खाली पड़े घरों की निगरानी भी की जा सके।

     

    फैजुल्लागंज जैसे इलाकों में कुछ लोगों ने राहत और बचाव कार्य में देरी की शिकायत भी की है। प्रशासन ने शिकायतों को देखते हुए मोटर बोट की संख्या बढ़ाई है और अलग-अलग प्रभावित क्षेत्रों में नियंत्रण कक्ष सक्रिय किए हैं। अधिकारियों का कहना है कि जरूरत के अनुसार अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए जाएंगे।

     

    जलभराव का असर बिजली आपूर्ति पर भी पड़ा है। कई स्थानों पर सुरक्षा कारणों से बिजली आपूर्ति बंद रखी गई है, क्योंकि पानी विद्युत उपकरणों और ट्रांसफॉर्मर के आसपास जमा है। पानी कम होने के बाद ही कई इलाकों में बिजली व्यवस्था सामान्य किए जाने की संभावना है।

     

    मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई और जमीनी निरीक्षण किया है। उन्होंने प्रभावित लोगों से मुलाकात कर राहत व्यवस्था की जानकारी ली। इसके साथ ही गोमती के किनारे भविष्य में बाढ़ की समस्या को कम करने के लिए स्थायी समाधान की दिशा में काम करने के निर्देश दिए गए हैं।

     

    भविष्य में ऐसी स्थिति से निपटने के लिए गोमती के संवेदनशील हिस्सों का सर्वे कराने और नए तटबंधों की योजना तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रस्तावित योजना में लखनऊ के आसपास से लेकर सीतापुर के नैमिषारण्य क्षेत्र तक नदी के किनारे बाढ़ सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की बात कही गई है।

     

    प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना, भोजन और जरूरी सामान उपलब्ध कराना तथा संवेदनशील इलाकों में कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। यदि ऊपरी क्षेत्रों में दोबारा भारी बारिश नहीं होती है तो अधिकारियों को उम्मीद है कि गोमती का जलस्तर धीरे-धीरे स्थिर होकर कम होना शुरू हो सकता है।

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