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जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग तेज, दिल्ली प्रदर्शन से पहले नेशनल कॉन्फ्रेंस ने बढ़ाया जनसमर्थन

जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गई
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जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में आ गई है। नेशनल कॉन्फ्रेंस (एनसी) ने इस मुद्दे पर व्यापक जनसमर्थन जुटाने की कवायद तेज कर दी है। पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने श्रीनगर में विभिन्न सामाजिक संगठनों, व्यापारिक प्रतिनिधियों, शिक्षाविदों और नागरिक समाज के सदस्यों के साथ बैठक कर राज्य का दर्जा बहाल करने के समर्थन में एक साझा प्रस्ताव पारित कराया। पार्टी का कहना है कि इस मांग को लेकर नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले पूरे जम्मू-कश्मीर में जनजागरण अभियान चलाया जाएगा।

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    बैठक में शामिल विभिन्न संगठनों ने कहा कि जम्मू-कश्मीर की लोकतांत्रिक संस्थाओं को और मजबूत बनाने के लिए राज्य का दर्जा बहाल किया जाना आवश्यक है। प्रस्ताव में केंद्र सरकार से आग्रह किया गया कि वह इस विषय पर जल्द निर्णय ले और जनता की भावनाओं का सम्मान करे। नेशनल कॉन्फ्रेंस का दावा है कि यह केवल किसी एक राजनीतिक दल का मुद्दा नहीं बल्कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं से जुड़ा विषय है।

    मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बैठक के बाद कहा कि राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग संविधान और लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि पार्टी इस मुद्दे को शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आगे बढ़ाएगी। वहीं फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों की आवाज को राष्ट्रीय स्तर पर प्रभावी ढंग से उठाया जाएगा और सभी लोकतांत्रिक माध्यमों का उपयोग किया जाएगा।

    इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है। विभिन्न विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दी हैं। कुछ दलों ने राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग का समर्थन किया है, जबकि अन्य का कहना है कि इस विषय पर अंतिम निर्णय राष्ट्रीय हित और संवैधानिक प्रक्रिया के अनुरूप होना चाहिए। भारतीय जनता पार्टी की ओर से फिलहाल इस नए प्रस्ताव पर विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है, लेकिन पार्टी पहले भी कह चुकी है कि जम्मू-कश्मीर से जुड़े सभी फैसले राष्ट्रीय सुरक्षा और विकास को ध्यान में रखकर लिए जाते हैं।

    राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी महीनों में यह मुद्दा राष्ट्रीय राजनीति में महत्वपूर्ण स्थान बना सकता है। संसद के मानसून सत्र और आने वाले चुनावी माहौल को देखते हुए विभिन्न दल इस विषय पर अपना राजनीतिक रुख स्पष्ट करने की तैयारी कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जम्मू-कश्मीर की राजनीतिक स्थिति, विकास और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जुड़े प्रश्न आने वाले समय में भी राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बने रहेंगे।

    संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि राज्य का दर्जा बहाल करने का निर्णय संसद और केंद्र सरकार की संवैधानिक प्रक्रिया के तहत ही संभव होगा। उनका मानना है कि इस विषय पर सभी पक्षों के बीच संवाद और राजनीतिक सहमति महत्वपूर्ण होगी। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी निर्णय का उद्देश्य क्षेत्र में शांति, स्थिरता और विकास को मजबूत करना होना चाहिए।

    नेशनल कॉन्फ्रेंस अपने प्रस्तावित दिल्ली प्रदर्शन की तैयारियों में जुटी हुई है। पार्टी विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों से समर्थन जुटाने का प्रयास कर रही है। दूसरी ओर केंद्र सरकार की ओर से अभी इस नए प्रस्ताव पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राष्ट्रीय स्तर पर राजनीतिक गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। सभी की नजर अब इस बात पर है कि केंद्र सरकार और अन्य राजनीतिक दल इस मांग पर आगे क्या रुख अपनाते हैं।

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