Last updated: October 28th, 2026 at 03:58 pm

दिल्ली की जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में छात्र संघ चुनाव बहाल करने की मांग को लेकर जारी आंदोलन बुधवार, 28 अक्टूबर को और तेज हो गया। विश्वविद्यालय परिसर और उसके आसपास सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। दिल्ली पुलिस ने परिसर के बाहर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंध लागू किए हैं, जबकि विश्वविद्यालय के कई प्रवेश द्वार बंद कर दिए गए हैं। छात्रों और प्रशासन के बीच बातचीत के बावजूद विवाद का समाधान नहीं निकल पाया है।
यह आंदोलन विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव बहाल करने और चुनाव की निश्चित समयसीमा घोषित करने की मांग को लेकर चल रहा है। छात्रों का कहना है कि वर्ष 2006 के बाद से विश्वविद्यालय में छात्र संघ चुनाव नहीं हुए हैं। वे चाहते हैं कि छात्र प्रतिनिधित्व की व्यवस्था दोबारा शुरू की जाए और चुनाव कराने की प्रक्रिया स्पष्ट समय-सारणी के साथ आगे बढ़े।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने सोमवार को छात्रों की कुछ मांगों पर सहमति जताने की घोषणा की थी। प्रशासन के मुताबिक, छात्र संघ के संविधान को मंजूरी मिलने के 15 दिनों के भीतर चुनाव कराने की दिशा में कदम उठाया जाएगा। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी छात्रों ने आंदोलन समाप्त करने से इनकार कर दिया। उनका कहना है कि चुनाव की निश्चित तारीख, छात्र संघ के संविधान निर्माण में प्रतिनिधित्व और अन्य मांगों पर स्पष्ट आश्वासन नहीं मिला है।
मंगलवार को प्रशासन और छात्रों के बीच एक और दौर की बातचीत हुई, लेकिन गतिरोध खत्म नहीं हुआ। इसके बाद परिसर के आसपास पुलिस की तैनाती बढ़ा दी गई और धारा 163 लागू कर दी गई। इस प्रावधान के तहत संबंधित क्षेत्र में सार्वजनिक सभाओं और जमावड़े पर प्रतिबंध लगाया गया है। पुलिस ने लाउडस्पीकर के माध्यम से लोगों को समूह में एकत्र नहीं होने और प्रतिबंधों का पालन करने की चेतावनी भी दी।
विश्वविद्यालय के कई प्रवेश द्वार बंद किए जाने से परिसर में आने-जाने को लेकर भी परेशानी सामने आई है। प्रशासन ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए प्रवेश व्यवस्था कड़ी की है। विश्वविद्यालय में ऑफलाइन कक्षाएं अस्थायी रूप से बंद कर दी गई हैं और ऑनलाइन पढ़ाई 8 नवंबर तक जारी रखने का निर्णय लिया गया है। प्रशासन ने छात्रों को छात्रावास खाली करने के निर्देश भी दिए हैं, जिस पर प्रदर्शनकारी छात्रों ने आपत्ति जताई है।
इस बीच, विश्वविद्यालय प्रशासन ने बुधवार को आरोप लगाया कि मंगलवार रात परिसर में तोड़फोड़ की घटनाएं हुईं। प्रशासन के अनुसार, कुछ प्रदर्शनकारियों और कथित तौर पर बाहर से आए लोगों ने विश्वविद्यालय के प्रवेश द्वारों और दीवारों को नुकसान पहुंचाया। गेट नंबर 4C को गिराए जाने तथा सीसीटीवी कैमरों और उनके कनेक्शन को क्षतिग्रस्त किए जाने के आरोप भी लगाए गए हैं। प्रशासन ने यह भी दावा किया कि कुछ लोगों ने पत्थर फेंके और लोहे की छड़ों तथा अन्य औजारों का इस्तेमाल किया।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और घटना में शामिल लोगों की पहचान को लेकर जांच आवश्यक है। दिल्ली पुलिस ने पहले बताया था कि गेट से जुड़ी कुछ घटनाओं के संबंध में उस समय औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई थी। ऐसे में घटना की जिम्मेदारी तय करने से पहले संबंधित साक्ष्यों और उपलब्ध वीडियो की जांच महत्वपूर्ण होगी।
प्रदर्शनकारी छात्रों ने अपनी ओर से कहा है कि छात्र संघ की बहाली, चुनाव का निश्चित कार्यक्रम, छात्र संघ के संविधान निर्माण में प्रतिनिधित्व, कैंटीन और पुस्तकालय खोलने तथा प्रशासनिक कार्रवाई से जुड़े मुद्दों पर स्पष्ट समाधान जरूरी है। कुछ छात्र भूख हड़ताल भी कर रहे हैं। छात्रों ने आरोप लगाया है कि परिसर में आवश्यक सुविधाओं और भोजन-पानी तक पहुंच सीमित होने से उनकी परेशानी बढ़ रही है। प्रशासन की ओर से सुरक्षा और अनुशासन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया जा रहा है।
केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों से बातचीत के जरिए स्थिति सुलझाने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने सभी पक्षों से कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। फिलहाल जामिया परिसर में तनाव बना हुआ है और सुरक्षा बल तैनात हैं। आने वाले दिनों में स्थिति इस बात पर निर्भर करेगी कि विश्वविद्यालय प्रशासन और छात्र प्रतिनिधि चुनाव की समयसीमा तथा अन्य मांगों पर किसी ठोस सहमति तक पहुंच पाते हैं या नहीं।
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