Human Live Media

HomeNewsबिहार दारोगा भर्ती परीक्षा में धांधली का खुलासा, पूर्णिया के केंद्र से बाहर भेजे गए प्रश्नपत्र; केंद्राधीक्षक और कर्मचारी की भूमिका जांच के घेरे में

बिहार दारोगा भर्ती परीक्षा में धांधली का खुलासा, पूर्णिया के केंद्र से बाहर भेजे गए प्रश्नपत्र; केंद्राधीक्षक और कर्मचारी की भूमिका जांच के घेरे में

  बिहार में पुलिस अवर निरीक्षक यानी दारोगा भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। आर्थिक
images (11)

 

Table of Contents

    बिहार में पुलिस अवर निरीक्षक यानी दारोगा भर्ती परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की विशेष जांच टीम की पड़ताल में पूर्णिया के एक परीक्षा केंद्र से परीक्षा के दौरान प्रश्नपुस्तिकाएं अनधिकृत रूप से बाहर भेजे जाने के साक्ष्य सामने आए हैं। जांच में आरोप है कि बाहर भेजे गए प्रश्नों के उत्तर सॉल्वर गिरोह की मदद से तैयार कराए गए और संबंधित अभ्यर्थियों तक पहुंचाए गए। इस मामले में आर्थिक अपराध इकाई ने प्राथमिकी दर्ज कर आगे की जांच शुरू कर दी है।

     

    यह मामला बिहार पुलिस अवर सेवा आयोग (BPSSC) की ओर से आयोजित दारोगा भर्ती की प्रारंभिक परीक्षा से जुड़ा है। जांच के अनुसार, पूर्णिया सिटी स्थित 2 आरपीसी हाई स्कूल परीक्षा केंद्र पर 18 जनवरी 2026 को आयोजित परीक्षा की दोनों पालियों में कथित गड़बड़ी हुई। पहली पाली में प्रश्नपुस्तिका संख्या 51212241 और दूसरी पाली में प्रश्नपुस्तिका संख्या 52212038 को कथित तौर पर परीक्षा केंद्र से बाहर भेजा गया। जांचकर्ताओं का कहना है कि इन प्रश्नपुस्तिकाओं के उत्तर बाहर तैयार कराकर अभ्यर्थियों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई थी।

     

    आर्थिक अपराध इकाई की जांच में परीक्षा केंद्र के संचालन से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका भी सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्राधीक्षक मोहम्मद मुज्जफर आलम और कार्यालय कर्मचारी विवेक कुमार की कथित संलिप्तता की जांच की जा रही है। जांच टीम ने परीक्षा से संबंधित दस्तावेजों, सीसीटीवी फुटेज, बैठने की व्यवस्था और ड्यूटी चार्ट की पड़ताल की। वीक्षकों के बयान भी जांच का हिस्सा बनाए गए हैं।

     

    जांच में यह भी आरोप सामने आया कि परीक्षा केंद्र पर वास्तविक सीटिंग प्लान में बदलाव करके नया प्लान तैयार किया गया। कुछ अभ्यर्थियों को निर्धारित व्यवस्था से अलग बैठाने, वीक्षकों की नियुक्ति में नियमों की अनदेखी करने और ड्यूटी चार्ट में गलत हस्ताक्षर होने जैसी अनियमितताओं की बात कही गई है। जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इन कथित बदलावों का उद्देश्य क्या था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

     

    रिपोर्ट के अनुसार, इस मामले में दो अभ्यर्थियों रूपेश कुमार और नरेश कुमार को अनुचित लाभ मिलने की आशंका जताई गई है। दोनों के प्रारंभिक परीक्षा में सफल होने की जानकारी सामने आई है। बताया गया है कि रूपेश कुमार मुख्य परीक्षा में भी सफल हुआ था। जांच एजेंसी ने दोनों अभ्यर्थियों के विरुद्ध उचित कार्रवाई के लिए आयोग को अनुशंसा भेजने की बात कही है। हालांकि, आरोपों के आधार पर अंतिम जिम्मेदारी तय करने से पहले संबंधित साक्ष्यों और प्रत्येक व्यक्ति की भूमिका का आकलन आवश्यक है।

     

    इस मामले में आर्थिक अपराध इकाई ने भारतीय न्याय संहिता, 2023 और बिहार लोक परीक्षा (अनुचित साधन निवारण) अधिनियम, 2024 की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है। जांच टीम ने यह भी स्पष्ट करने की कोशिश की है कि प्रश्नपत्र परीक्षा शुरू होने से पहले लीक हुआ था या परीक्षा चलने के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में सेंध लगाकर बाहर भेजा गया। उपलब्ध जांच रिपोर्ट के मुताबिक, इन दो प्रश्नपुस्तिकाओं को परीक्षा शुरू होने के बाद बाहर भेजे जाने के साक्ष्य मिले हैं।

     

    दारोगा भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी की शिकायतें सामने आने के बाद भर्ती प्रक्रिया पहले ही विवादों में आ चुकी है। आर्थिक अपराध इकाई ने गया और पूर्णिया से जुड़े मामलों की जांच के लिए विशेष जांच टीम गठित की थी। इसके बाद आयोग ने 27 मई 2026 को आयोजित मुख्य लिखित परीक्षा रद्द कर दी थी। भर्ती प्रक्रिया में शामिल अभ्यर्थियों के लिए यह फैसला महत्वपूर्ण है, क्योंकि परीक्षा की निष्पक्षता और आगे की चयन प्रक्रिया को लेकर सवाल उठे हैं।

     

    इस घटना ने सरकारी भर्ती परीक्षाओं की निगरानी, प्रश्नपत्रों की सुरक्षा और परीक्षा केंद्रों की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले अभ्यर्थी लंबे समय तक मेहनत करते हैं, ऐसे में किसी भी प्रकार की कथित धांधली उनके भविष्य और व्यवस्था पर भरोसे को प्रभावित कर सकती है। इसलिए जांच का निष्पक्ष और समयबद्ध तरीके से पूरा होना जरूरी है।

     

    आर्थिक अपराध इकाई मामले से जुड़े साक्ष्यों की जांच कर रही है। केंद्राधीक्षक, कर्मचारी और अभ्यर्थियों की भूमिका के संबंध में अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। आगे की कार्रवाई इस बात पर निर्भर करेगी कि जांच में कौन-कौन से आरोप प्रमाणित होते हैं और आयोग भर्ती प्रक्रिया को लेकर क्या निर्णय लेता है।

    Loading

    Comments are off for this post.