Last updated: June 30th, 2026 at 06:59 pm

भारत मौसम विभाग (IMD) ने जुलाई 2026 के लिए सामान्य से कम मानसूनी बारिश का अनुमान जारी किया है। यह अनुमान ऐसे समय में आया है जब जून का महीना भी पिछले कई वर्षों की तुलना में काफी शुष्क रहा। मौसम विभाग के अनुसार जुलाई में देशभर में औसत वर्षा सामान्य से कम रहने की संभावना है। हालांकि कुछ क्षेत्रों में शुरुआती दिनों में अच्छी बारिश हो सकती है, लेकिन पूरे महीने का औसत सामान्य से नीचे रहने का अनुमान है।
मौसम विभाग के अनुसार जून 2026 देश के लिए पिछले एक दशक से अधिक समय का सबसे शुष्क जून महीनों में शामिल रहा। सामान्य से लगभग 40 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई, जिससे कई राज्यों में खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हुई। जुलाई का महीना किसानों के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि इसी दौरान धान, मक्का, सोयाबीन, कपास और अन्य खरीफ फसलों की बुवाई बड़े पैमाने पर होती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि जुलाई में भी पर्याप्त वर्षा नहीं होती है तो कृषि क्षेत्र पर इसका सीधा प्रभाव पड़ सकता है। भारत की लगभग आधी कृषि भूमि अब भी वर्षा पर निर्भर है। ऐसे में कमजोर मानसून से उत्पादन घटने की आशंका बढ़ जाती है। इसका असर किसानों की आय के साथ-साथ खाद्यान्न उत्पादन पर भी पड़ सकता है।
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि बारिश में कमी आने पर सिंचाई की मांग बढ़ जाती है। जिन क्षेत्रों में नहर या भूजल की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है, वहां किसानों को सबसे अधिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है। कई राज्यों में किसान पहले ही मानसून की अच्छी शुरुआत का इंतजार कर रहे थे, लेकिन जून में अपेक्षित बारिश नहीं मिलने से बुवाई का काम प्रभावित हुआ है।
कम बारिश का असर केवल खेती तक सीमित नहीं रहता। जलाशयों में पानी का स्तर, पेयजल आपूर्ति और बिजली उत्पादन पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है। यदि लंबे समय तक वर्षा सामान्य से कम रहती है तो कई राज्यों में जल संकट की स्थिति पैदा होने की आशंका रहती है। यही कारण है कि मौसम विभाग की इस चेतावनी को गंभीरता से देखा जा रहा है।
आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर मानसून का असर महंगाई पर भी दिखाई दे सकता है। यदि कृषि उत्पादन प्रभावित होता है तो सब्जियों, दालों, दूध और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतों में बढ़ोतरी संभव है। इससे आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।
हालांकि मौसम विभाग ने यह भी कहा है कि जुलाई के शुरुआती दिनों में उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में अच्छी बारिश होने की संभावना है, जिससे मौजूदा वर्षा की कमी कुछ हद तक कम हो सकती है। विभाग लगातार मौसम की निगरानी कर रहा है और समय-समय पर नए पूर्वानुमान जारी करेगा।
विशेषज्ञ किसानों को सलाह दे रहे हैं कि वे स्थानीय कृषि विभाग और मौसम विभाग की सलाह के अनुसार फसल प्रबंधन करें। जिन क्षेत्रों में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है, वहां पानी का संतुलित उपयोग करने और मौसम के पूर्वानुमान को ध्यान में रखते हुए बुवाई की योजना बनाने की सलाह दी गई है।
फिलहाल पूरे देश की नजर जुलाई के मानसून पर टिकी हुई है। आने वाले कुछ सप्ताह यह तय करेंगे कि मानसून की रफ्तार कितनी तेज होती है और इसका कृषि, जल संसाधनों तथा देश की अर्थव्यवस्था पर कितना प्रभाव पड़ता है। सरकार और संबंधित एजेंसियां भी स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं ताकि जरूरत पड़ने पर आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
![]()
Comments are off for this post.