Last updated: June 30th, 2026 at 07:01 pm

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन से टेलीफोन पर बातचीत कर पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सहयोग को लेकर विस्तार से चर्चा की। इस बातचीत के दौरान क्षेत्रीय शांति, स्थिरता, समुद्री सुरक्षा और आर्थिक सहयोग जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श हुआ। हाल के दिनों में पश्चिम एशिया में बढ़े तनाव के बीच दोनों नेताओं की यह बातचीत कूटनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान कहा कि भारत हमेशा संवाद, कूटनीति और शांतिपूर्ण समाधान का समर्थक रहा है। उन्होंने क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि किसी भी प्रकार का संघर्ष न केवल संबंधित देशों बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा सुरक्षा को भी प्रभावित करता है। भारत का मानना है कि सभी विवादों का समाधान बातचीत और अंतरराष्ट्रीय कानून के दायरे में होना चाहिए।
राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने भी भारत के साथ अपने देश के संबंधों को महत्वपूर्ण बताते हुए दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने की इच्छा जताई। उन्होंने कहा कि भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं और भविष्य में इन्हें और विस्तार दिया जा सकता है।
बातचीत के दौरान दोनों नेताओं ने व्यापार, निवेश और कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर भी चर्चा की। भारत और ईरान के बीच चाबहार बंदरगाह परियोजना को क्षेत्रीय व्यापार और मध्य एशिया तक संपर्क बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह परियोजना भारत की क्षेत्रीय रणनीति में महत्वपूर्ण स्थान रखती है और भविष्य में दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई मजबूती दे सकती है।
ऊर्जा सहयोग भी इस वार्ता का प्रमुख विषय रहा। भारत अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं का बड़ा हिस्सा आयात के माध्यम से पूरा करता है और पश्चिम एशिया उसके लिए एक महत्वपूर्ण क्षेत्र है। ऐसे में क्षेत्र में शांति और समुद्री मार्गों की सुरक्षा भारत के आर्थिक हितों से भी सीधे जुड़ी हुई है। दोनों नेताओं ने सुरक्षित और निर्बाध समुद्री व्यापार मार्गों के महत्व पर भी जोर दिया।
विदेश नीति के जानकारों का कहना है कि भारत लंबे समय से पश्चिम एशिया में संतुलित कूटनीति अपनाता रहा है। भारत के ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, इज़राइल और अन्य देशों के साथ अलग-अलग क्षेत्रों में मजबूत संबंध हैं। यही कारण है कि भारत किसी भी क्षेत्रीय तनाव के दौरान संवाद और शांतिपूर्ण समाधान की वकालत करता है।
विशेषज्ञों के अनुसार भारत और ईरान के बीच सहयोग केवल व्यापार तक सीमित नहीं है। दोनों देश परिवहन, कनेक्टिविटी, ऊर्जा, शिक्षा, संस्कृति और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे अनेक क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। आने वाले समय में इन क्षेत्रों में नई पहल देखने को मिल सकती है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में भारत की सक्रिय कूटनीति उसकी विदेश नीति की एक महत्वपूर्ण विशेषता बन चुकी है। विभिन्न देशों के साथ नियमित संवाद के माध्यम से भारत क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को मजबूत करने का प्रयास कर रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के बीच हुई बातचीत को दोनों देशों के संबंधों के लिए सकारात्मक कदम माना जा रहा है। आने वाले समय में इस वार्ता के आधार पर व्यापार, निवेश, ऊर्जा और क्षेत्रीय सहयोग के क्षेत्रों में नई पहल देखने को मिल सकती है। साथ ही भारत की यह पहल पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता के समर्थन की उसकी नीति को भी स्पष्ट रूप से दर्शाती है।
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