Last updated: July 9th, 2026 at 11:22 am

राजधानी दिल्ली की जेलों में लगातार बढ़ रही कैदियों की संख्या को देखते हुए दिल्ली सरकार ने नई जेल के निर्माण की दिशा में कदम तेज कर दिए हैं। सरकार ने रोहिणी जेल परिसर के विस्तार और नई जेल बनाने के लिए आसपास के लगभग 48 शहरी गांवों में उपयुक्त जमीन की पहचान करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इस संबंध में संबंधित विभागों को विस्तृत सर्वेक्षण करने और उपलब्ध भूमि का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं। सरकार का कहना है कि मौजूदा जेलों पर बढ़ते दबाव को कम करने और कैदियों के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से यह पहल की जा रही है।
अधिकारियों के अनुसार, दिल्ली की तिहाड़, मंडोली और रोहिणी जेलों में क्षमता से अधिक कैदी रह रहे हैं। इसके कारण सुरक्षा प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं और पुनर्वास कार्यक्रमों को प्रभावी ढंग से संचालित करने में कई व्यावहारिक चुनौतियां सामने आती हैं। नई जेल बनने से इन जेलों पर दबाव कम होगा और बंदियों के लिए बेहतर आवास, चिकित्सा, कानूनी सहायता तथा कौशल विकास जैसी सुविधाओं का विस्तार किया जा सकेगा।
सूत्रों के अनुसार, भूमि चयन के दौरान यह सुनिश्चित किया जाएगा कि नई जेल तक सड़क संपर्क बेहतर हो और भविष्य में आवश्यक विस्तार की भी पर्याप्त संभावना रहे। संबंधित विभागों को राजस्व रिकॉर्ड, भूमि स्वामित्व और स्थानीय विकास योजनाओं का अध्ययन करने के निर्देश दिए गए हैं। जमीन चिन्हित होने के बाद परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जाएगी, जिसके आधार पर आगे की प्रशासनिक और वित्तीय मंजूरी की प्रक्रिया शुरू होगी।
दिल्ली सरकार का कहना है कि आधुनिक जेल केवल बंदियों को रखने का स्थान नहीं होती, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा में वापस लाने का भी महत्वपूर्ण माध्यम होती है। इसी उद्देश्य से प्रस्तावित नई जेल में व्यावसायिक प्रशिक्षण, शिक्षा, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, पुस्तकालय, खेल सुविधाएं और पुनर्वास कार्यक्रमों को भी शामिल करने की योजना बनाई जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि इससे सुधारात्मक न्याय व्यवस्था को और मजबूती मिलेगी।
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत के कई बड़े शहरों में जेलों में क्षमता से अधिक कैदी रहने की समस्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में केवल नई जेलों का निर्माण ही पर्याप्त नहीं होगा, बल्कि अंडरट्रायल मामलों के शीघ्र निस्तारण, ई-कोर्ट प्रणाली के विस्तार और वैकल्पिक दंड व्यवस्था जैसे उपायों पर भी समान रूप से ध्यान देना होगा। उनका मानना है कि न्यायिक सुधार और आधुनिक जेल प्रबंधन साथ-साथ चलने चाहिए।
राजनीतिक दृष्टि से भी इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि राजधानी में कानून-व्यवस्था और न्यायिक ढांचे को मजबूत करने के लिए लंबे समय से नई जेल की आवश्यकता महसूस की जा रही थी। यदि भूमि चयन और अन्य औपचारिकताएं समय पर पूरी हो जाती हैं तो आने वाले समय में दिल्ली की जेल व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। सरकार का कहना है कि परियोजना का उद्देश्य केवल क्षमता बढ़ाना नहीं, बल्कि एक आधुनिक और मानवीय सुधार गृह प्रणाली विकसित करना भी है।
संबंधित विभाग संभावित स्थानों का सर्वेक्षण कर रहे हैं और विस्तृत रिपोर्ट तैयार की जा रही है। इसके बाद भूमि अधिग्रहण, पर्यावरणीय स्वीकृति और निर्माण प्रक्रिया से जुड़े अगले चरण शुरू किए जाएंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह परियोजना समय पर पूरी होती है तो इससे दिल्ली की जेल व्यवस्था को दीर्घकालिक राहत मिलेगी और सुधारात्मक न्याय प्रणाली को नई दिशा प्राप्त होगी।
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