Last updated: October 31st, 2026 at 02:40 pm

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के मंगोलपुरी औद्योगिक क्षेत्र में शुक्रवार रात एक जूता बनाने वाली फैक्ट्री में भीषण आग लगने से चार मजदूरों की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसा इतना भयावह था कि फैक्ट्री के अंदर धुआं तेजी से फैल गया और कई लोग इमारत में फंस गए। सूचना मिलते ही दिल्ली पुलिस और दमकल विभाग की टीमें मौके पर पहुंचीं। बचाव अभियान चलाकर छह लोगों को बाहर निकाला गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने पर चार को मृत घोषित कर दिया गया। घटना के बाद पुलिस ने फैक्ट्री प्रबंधन की जिम्मेदारी और सुरक्षा व्यवस्था की जांच शुरू कर दी है।
जानकारी के मुताबिक, आग शुक्रवार रात करीब 9:30 से 9:32 बजे के बीच मंगोलपुरी इंडस्ट्रियल एरिया फेज-1 स्थित एक जूता निर्माण इकाई में लगी। दमकल विभाग को सूचना मिलने के बाद कई दमकल गाड़ियां घटनास्थल पर भेजी गईं। शुरुआती रिपोर्टों में करीब 20 दमकल गाड़ियों के पहुंचने की बात कही गई, जबकि बाद की जानकारी में 16 दमकल गाड़ियों के इस्तेमाल का उल्लेख किया गया। दमकलकर्मियों ने कई घंटों तक आग बुझाने और इमारत में फंसे लोगों को निकालने का काम किया। आग पर देर रात काबू पाया गया और इसके बाद भी इमारत में कूलिंग तथा तलाशी अभियान जारी रहा।
दमकल अधिकारियों के अनुसार, आग फैक्ट्री के बेसमेंट में लगी थी। यहां जूते बनाए और रखे जाते थे। बेसमेंट से उठा धुआं इमारत के ऊपरी हिस्सों तक फैल गया, जिससे वहां मौजूद लोगों के लिए बाहर निकलना मुश्किल हो गया। बचाव दल ने एक व्यक्ति को तीसरी मंजिल की सीढ़ियों के पास से निकाला, जबकि पांच अन्य लोगों को ऊपरी मंजिल पर स्थित एक कमरे से बाहर लाया गया। सभी छह लोग बेहोशी की हालत में मिले थे। उन्हें तुरंत संजय गांधी मेमोरियल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चार मजदूरों को मृत घोषित कर दिया गया। दो घायल मजदूरों का इलाज जारी है।
मृतकों की पहचान प्रेम चंद (50), हरिहर (40), लाल बाबू (38) और अशोक (25) के रूप में हुई है। इनमें अशोक बिहार के नालंदा जिले का रहने वाला था, जबकि हरिहर मंगोलपुरी का निवासी बताया गया है। अन्य मृतकों के बारे में भी पुलिस ने पहचान संबंधी जानकारी जुटाई है। घायलों की पहचान हरेंद्र (35) और विकास (21) के रूप में हुई है। दोनों को अस्पताल के आईसीयू में भर्ती कराया गया है और उनकी हालत पर चिकित्सक नजर बनाए हुए हैं।
घटना के बाद दिल्ली पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए गैर इरादतन हत्या और लापरवाही से संबंधित धाराओं में एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के अनुसार, भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 के तहत भी मामला दर्ज किया गया है। इस मामले में दो लोगों को हिरासत में लिया गया है। उनकी पहचान सुरेश चंद (47), निवासी पीतमपुरा, और अशोक (47), निवासी रोहिणी के रूप में बताई गई है। पुलिस अन्य संभावित आरोपियों की तलाश और घटना के समय फैक्ट्री में मौजूद लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।
जांच का एक अहम हिस्सा यह पता लगाना है कि फैक्ट्री में आग किस वजह से लगी और वहां काम करने वाले मजदूरों के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम मौजूद थे या नहीं। पुलिस फैक्ट्री मालिक, ठेकेदार और कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है। अधिकारियों ने यह भी जानने की कोशिश शुरू की है कि हादसे के समय इमारत में कुल कितने मजदूर मौजूद थे और आपात स्थिति में बाहर निकलने के लिए सुरक्षित रास्ते उपलब्ध थे या नहीं। आग लगने के वास्तविक कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
इस हादसे ने दिल्ली के औद्योगिक इलाकों में फैक्ट्री सुरक्षा व्यवस्था पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। जूता निर्माण इकाइयों में रबर, फोम, सिंथेटिक सामग्री, चिपकाने वाले पदार्थ और पैकेजिंग सामग्री का इस्तेमाल होता है। ऐसी जगहों पर आग से बचाव के इंतजाम, पर्याप्त निकास द्वार, अग्निशमन उपकरण और नियमित सुरक्षा जांच बेहद जरूरी हैं। हालांकि इस मामले में आग फैलने की परिस्थितियों और सुरक्षा मानकों से जुड़ी वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हादसे में लोगों की मौत पर दुख जताया और संबंधित एजेंसियों को घायलों के उचित इलाज तथा प्रभावित परिवारों को सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। फिलहाल पुलिस की जांच जारी है। हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों की भूमिका, फैक्ट्री में सुरक्षा नियमों के पालन और आग लगने के कारणों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा।
![]()
Comments are off for this post.