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दिल्ली के सीमापुरी में इमारत गिरने से 4 की मौत, 8 घायल; अवैध निर्माण और कमजोर नींव की जांच

  दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाके न्यू सीमापुरी में चार मंजिला आवासीय इमारत गिरने की दर्दनाक घटना में चार लोगों की
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    दिल्ली के उत्तर-पूर्वी इलाके न्यू सीमापुरी में चार मंजिला आवासीय इमारत गिरने की दर्दनाक घटना में चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि आठ लोग घायल हुए हैं। यह हादसा 7 अक्टूबर को दोपहर करीब 3:30 बजे ईदगाह मछली मंडी के पास हुआ। इमारत के मलबे में कई लोग दब गए थे, जिसके बाद दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और अन्य एजेंसियों ने संयुक्त रूप से राहत एवं बचाव अभियान चलाया। हादसे के बाद इलाके में मातम पसरा है और इमारतों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

     

    प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, इमारत गिरने के समय उसके आसपास और अंदर मौजूद कई लोग मलबे की चपेट में आ गए। स्थानीय निवासियों ने बचाव दल के पहुंचने से पहले भी लोगों को निकालने में मदद की। इसके बाद दमकलकर्मियों, पुलिस और अन्य बचावकर्मियों ने मलबा हटाकर फंसे लोगों को बाहर निकाला। घायलों को उपचार के लिए राजीव गांधी सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल, ताहिरपुर पहुंचाया गया। अधिकारियों के अनुसार, मृतकों में एक गर्भवती महिला, दो बच्चे और एक अन्य महिला शामिल हैं। मलबे से मिले कुछ अवशेषों की पहचान को लेकर डीएनए जांच की जरूरत भी बताई गई, इसलिए शुरुआती रिपोर्टों में मृतकों की संख्या को लेकर अंतर सामने आया।

     

    इस हादसे में जान गंवाने वालों में 21 वर्षीय गुलफसा शामिल थीं, जो करीब चार महीने की गर्भवती थीं। इसके अलावा बच्चों और एक अन्य महिला की भी मौत हुई। घटना ने स्थानीय परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। संकरी गलियों और आसपास की इमारतों के कारण बचाव अभियान में भी कठिनाइयां आईं। प्रशासन को मलबा हटाने के साथ यह भी सुनिश्चित करना पड़ा कि आसपास के क्षतिग्रस्त भवनों से कोई और खतरा पैदा न हो।

     

    पुलिस और जिला प्रशासन हादसे के कारणों की जांच कर रहे हैं। शुरुआती जांच में इमारत की कमजोर नींव, पुराने निर्माण पर अतिरिक्त मंजिलें बनाए जाने और पास की इमारत में चल रहे तोड़फोड़ या निर्माण कार्य की भूमिका की पड़ताल की जा रही है। अधिकारियों के अनुसार, पड़ोसी इमारत में काम के दौरान मशीनों से होने वाले कंपन का असर भी जांच के दायरे में है। हालांकि, किसी एक कारण को हादसे के लिए जिम्मेदार मानने से पहले विस्तृत जांच जरूरी है।

     

    स्थानीय लोगों के अनुसार, मंगलवार को आए भूकंप के झटकों के बाद इमारत में दरारें दिखाई देने की बात भी सामने आई थी। जांच एजेंसियां इस पहलू की भी पड़ताल कर रही हैं कि क्या पहले से कमजोर संरचना पर भूकंप के झटकों का कोई असर पड़ा था। फिलहाल इन कारणों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।

     

    मामले में दिल्ली पुलिस ने लापरवाही और संभावित आपराधिक जिम्मेदारी के पहलुओं को ध्यान में रखते हुए मामला दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक, मकान मालिक मोहम्मद अनवर हादसे के समय वहां मौजूद नहीं थे और घटना के बाद से उनके फरार होने की जानकारी सामने आई है। मामले में भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत कार्रवाई की जा रही है। जिला प्रशासन ने भी घटना की मजिस्ट्रेट जांच शुरू की है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि इमारत की स्थिति, निर्माण संबंधी नियमों और आसपास चल रहे काम में कोई चूक हुई थी या नहीं।

     

    हादसे के बाद नगर निगम और प्रशासन ने आसपास की क्षतिग्रस्त इमारतों का निरीक्षण करने तथा खतरनाक हिस्सों को हटाने की कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों का कहना है कि मलबा हटाने के बाद आसपास की संरचनाओं की स्थिति का आकलन किया जाएगा, ताकि किसी अन्य दुर्घटना को रोका जा सके।

     

    सीमापुरी की घटना ने दिल्ली में पुराने भवनों, अनधिकृत निर्माण और सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। घनी आबादी वाले इलाकों में कई परिवार छोटी जगहों पर बने बहुमंजिला मकानों में रहते हैं। ऐसे में भवन की मजबूती, नींव की क्षमता और अतिरिक्त मंजिलों के निर्माण की नियमित जांच जरूरी है। हादसे की जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि इमारत गिरने के पीछे कौन-से कारण निर्णायक रहे और संबंधित लोगों की क्या जिम्मेदारी बनती है।

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