Last updated: October 9th, 2026 at 03:32 pm

दिल्ली का जंतर-मंतर लंबे समय से विरोध-प्रदर्शनों और आंदोलनों का प्रमुख केंद्र रहा है, लेकिन अब यहां प्रदर्शन की व्यवस्था को लेकर नई बहस शुरू हो गई है। सुप्रीम कोर्ट की हालिया टिप्पणी के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या भविष्य में प्रदर्शनकारियों के लिए किसी दूसरे स्थान की व्यवस्था की जा सकती है। सुनवाई के दौरान अदालत ने जंतर-मंतर की भौगोलिक स्थिति और सीमित जगह का जिक्र करते हुए केंद्र सरकार से वैकल्पिक स्थल पर विचार करने को कहा।
जंतर-मंतर की जगह पर सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि जंतर-मंतर का सीमित क्षेत्र प्रदर्शनकारियों के लिए कई तरह की मुश्किलें पैदा कर सकता है। अदालत के मुताबिक, जगह की कमी के कारण भोजन, स्वच्छता और एंबुलेंस जैसी जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था करना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। इससे प्रदर्शनकारियों के मौलिक अधिकारों के इस्तेमाल पर भी असर पड़ सकता है।
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने शांतिपूर्ण और वैध प्रदर्शनों के लिए जरूरी सुविधाओं से युक्त किसी वैकल्पिक स्थान की पहचान करने के सुझाव पर विचार करने की सहमति जताई। इसके बाद अदालत ने केंद्र सरकार से इस प्रस्ताव पर विचार कर उचित निर्णय लेने को कहा।
हालांकि, अदालत की टिप्पणी को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन पूरी तरह बंद करने का अंतिम आदेश नहीं माना जा सकता। फिलहाल चर्चा वैकल्पिक स्थान और प्रदर्शन के दौरान जरूरी सुविधाओं की उपलब्धता को लेकर है।
मेट्रो और सड़क परिवहन बंद नहीं करने पर जोर
सुनवाई के दौरान दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन को लेकर लगाए गए प्रतिबंधों का मुद्दा भी उठा। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सुरक्षा के मद्देनजर कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इंटरनेट संबंधी पाबंदियां सीमित क्षेत्र में लागू हैं।
इस पर अदालत ने स्पष्ट किया कि मेट्रो और ट्रेन सेवाओं को पूरी तरह बंद नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति बागची ने सड़क परिवहन जारी रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। अदालत का कहना था कि सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था को पूरी तरह बाधित करना उचित नहीं होगा।
कॉकरोच जनता पार्टी को प्रदर्शन की अनुमति क्यों नहीं मिली?
यह पूरा मामला 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रस्तावित कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से भी जुड़ा है। पार्टी की ओर से मुख्य निर्वाचन आयुक्त की जवाबदेही के मुद्दे पर प्रदर्शन की योजना बनाई गई थी, लेकिन दिल्ली पुलिस ने इसकी अनुमति देने से इनकार कर दिया।
नई दिल्ली रेंज की संयुक्त पुलिस आयुक्त नूपुर प्रसाद के मुताबिक, प्रदर्शन के संबंध में सूचना बहुत कम समय पहले दी गई थी। उन्होंने कहा कि निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार, प्रदर्शन की योजना से कम से कम 10 दिन पहले सूचना देना जरूरी है।
पुलिस ने यह भी कहा कि पार्टी ने पहले प्रदर्शन की अनुमति मिलने के दौरान तय शर्तों और कानूनी निर्देशों का पालन नहीं किया था। मौजूदा कानून-व्यवस्था, सार्वजनिक सुरक्षा और यातायात संबंधी चिंताओं को भी अनुमति नहीं देने की वजह बताया गया। पुलिस के अनुसार, नई दिल्ली क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 के तहत प्रतिबंधात्मक उपाय भी लागू हैं।
क्या जंतर-मंतर पर प्रदर्शन बंद हो जाएंगे?
सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद यह सवाल जरूर उठ रहा है कि क्या जंतर-मंतर के विकल्प के तौर पर किसी दूसरी जगह को निर्धारित किया जाएगा। हालांकि, फिलहाल ऐसा कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं है कि जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल के रूप में पूरी तरह समाप्त कर दिया जाएगा।
अब केंद्र सरकार के फैसले पर नजर रहेगी। चुनौती यह है कि प्रदर्शनकारियों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने का अवसर मिले और साथ ही आम लोगों की आवाजाही, सार्वजनिक सुविधाओं तथा सुरक्षा व्यवस्था पर भी अनावश्यक असर न पड़े।
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