Last updated: September 14th, 2026 at 12:33 pm

दिल्ली सरकार ने राजधानी में अवैध शराब की बिक्री और तस्करी के खिलाफ कार्रवाई तेज कर दी है। आबकारी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल से अगस्त 2026 के बीच अवैध शराब से जुड़े मामलों में 725 एफआईआर दर्ज की गईं और 730 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इस दौरान कथित तौर पर अवैध शराब के परिवहन में इस्तेमाल किए जा रहे 197 वाहनों को भी जब्त किया गया और करीब 2.2 लाख बोतलें बरामद की गईं।
इस साल की कार्रवाई पिछले साल की इसी अवधि की तुलना में काफी अधिक रही। अप्रैल से अगस्त 2025 के दौरान 315 एफआईआर दर्ज हुई थीं और 312 लोगों को गिरफ्तार किया गया था। उस समय 112 वाहन जब्त किए गए थे और करीब एक लाख बोतलें अवैध शराब की बरामद हुई थीं। इस तरह इस साल आबकारी विभाग की कार्रवाई के आंकड़ों में स्पष्ट बढ़ोतरी दिखाई दे रही है। हालांकि, ज्यादा मामले दर्ज होना और ज्यादा गिरफ्तारियां होना मुख्य रूप से बढ़ी हुई प्रवर्तन कार्रवाई को दर्शाता है; इससे अकेले यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि अवैध शराब का कारोबार उतनी ही दर से बढ़ा है।
दिल्ली की भौगोलिक स्थिति भी अवैध शराब की तस्करी रोकने में एक चुनौती मानी जाती है। राजधानी की सीमाएं पड़ोसी राज्यों से लगती हैं और शहर में करीब 70 बड़े और छोटे प्रवेश मार्ग हैं। अधिकारियों के अनुसार, इन रास्तों के जरिए दूसरे राज्यों से बिना वैध अनुमति या नियमों का उल्लंघन करते हुए शराब दिल्ली में लाए जाने की संभावना रहती है। इसी वजह से आबकारी विभाग की प्रवर्तन टीम इन मार्गों और संदिग्ध परिवहन पर निगरानी रखती है।
सरकार ने आने वाले त्योहारी सीजन को देखते हुए कार्रवाई और तेज करने की बात कही है। त्योहारों के दौरान शराब की मांग बढ़ने की संभावना रहती है, ऐसे में विभाग का लक्ष्य अवैध आपूर्ति पर रोक लगाने के साथ कानूनी माध्यमों से शराब की उपलब्धता सुनिश्चित करना भी है। अधिकारियों के मुताबिक, वैध चैनलों के जरिए आपूर्ति बनाए रखने पर भी ध्यान दिया जाएगा, ताकि अवैध कारोबार को बढ़ावा न मिले।
कार्रवाई केवल बिना लाइसेंस वाले कारोबार तक सीमित नहीं है। आबकारी विभाग ने लाइसेंस प्राप्त शराब प्रतिष्ठानों में नियमों के उल्लंघन के मामलों में भी कदम उठाए हैं। सरकार के अनुसार, ऐसे मामलों में सात एफआईआर दर्ज की गई हैं। संबंधित मामलों में बार सील करने, जुर्माना लगाने और अन्य कानूनी कार्रवाई जैसे कदम उठाए गए हैं। इसका उद्देश्य लाइसेंस प्राप्त दुकानों और प्रतिष्ठानों में भी निर्धारित नियमों का पालन सुनिश्चित करना है।
दिल्ली सरकार की ओर से आबकारी व्यवस्था को लेकर नई नीति पर भी काम किया जा रहा है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा है कि नई नीति में सार्वजनिक सुरक्षा, शराब कारोबार का जिम्मेदार नियमन, गुणवत्ता सुनिश्चित करने और सरकारी राजस्व बढ़ाने पर ध्यान दिया जाएगा। सरकार अवैध शराब के कारोबार के प्रति जीरो-टॉलरेंस की नीति अपनाने की बात कह रही है।
दिल्ली फिलहाल 2020-21 की आबकारी नीति के विस्तारित ढांचे के तहत काम कर रही है। सरकार ने मार्च 2026 में इस व्यवस्था को 31 मार्च 2027 तक बढ़ाने का फैसला किया था। इससे पहले सितंबर 2022 में 2021-22 की आबकारी नीति को लेकर उठे विवादों के बाद दिल्ली पुरानी व्यवस्था पर वापस लौट गई थी। अब नई दीर्घकालिक आबकारी नीति तैयार करने की प्रक्रिया भी चल रही है।
अवैध शराब पर कार्रवाई का संबंध केवल राजस्व से नहीं बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य और सुरक्षा से भी है। गैरकानूनी तरीके से बेची जाने वाली शराब निर्धारित गुणवत्ता जांच और नियामकीय प्रक्रिया से बाहर हो सकती है। इसलिए सरकार का जोर अवैध बिक्री और तस्करी रोकने के साथ उपभोक्ताओं तक वैध और नियंत्रित माध्यम से शराब पहुंचाने पर भी है।
आने वाले त्योहारी दिनों में आबकारी विभाग की कार्रवाई और बढ़ने की संभावना है। विभाग का लक्ष्य एक तरफ अवैध शराब की आपूर्ति करने वाले नेटवर्क पर कार्रवाई करना और दूसरी तरफ लाइसेंस प्राप्त चैनलों के जरिए पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना है। अप्रैल से अगस्त के आंकड़े बताते हैं कि इस साल दिल्ली में अवैध शराब के खिलाफ प्रवर्तन अभियान को काफी तेज किया गया है।
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