Last updated: September 14th, 2026 at 12:31 pm

दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ यानी DUSU के चुनाव से पहले छात्र आवास और हॉस्टल की सुविधा बड़ा मुद्दा बनकर सामने आया है। 18 सितंबर को होने वाले छात्रसंघ चुनाव में अलग-अलग छात्र संगठन अपने घोषणापत्र में सुरक्षित और सस्ते छात्र आवास की मांग को प्रमुखता दे रहे हैं। यह मुद्दा दक्षिण दिल्ली के सत्य निकेतन में छात्र आवास वाली इमारत के ढहने के बाद और ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। इस हादसे में सात लोगों की मौत हुई थी, जिनमें कई छात्र शामिल थे।
सत्य निकेतन हादसे ने दिल्ली विश्वविद्यालय के उन छात्रों की मुश्किलों को सामने ला दिया है जो पढ़ाई के लिए दूसरे शहरों से दिल्ली आते हैं और विश्वविद्यालय के पर्याप्त हॉस्टल उपलब्ध नहीं होने के कारण निजी PG या किराये के कमरों पर निर्भर रहते हैं। दिल्ली हाई कोर्ट ने भी इस मामले में छात्र आवास की कमी और निजी PG की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। अदालत ने विश्वविद्यालय और संबंधित अधिकारियों से हॉस्टल की उपलब्धता तथा PG व्यवस्था से जुड़े कई सवालों पर जवाब मांगा है।
DUSU चुनाव में हिस्सा ले रहे छात्र संगठनों ने अब छात्र आवास को अपने चुनावी एजेंडे में शामिल किया है। AISA-SFI गठबंधन ने कॉलेजों के आसपास किराये को नियंत्रित करने, सत्यापित निजी आवास के लिए सब्सिडी और हर कॉलेज में कम से कम दो हॉस्टल की मांग रखी है। संगठन का कहना है कि बड़ी संख्या में छात्र महंगे और असुरक्षित निजी आवास पर निर्भर हैं, इसलिए विश्वविद्यालय स्तर पर स्थायी समाधान जरूरी है।
ABVP ने भी अपने घोषणापत्र में हॉस्टल और छात्र सुरक्षा को प्रमुख स्थान दिया है। संगठन ने लड़कियों के लिए अलग हॉस्टल, Student Housing Cell, सुरक्षा हेल्पलाइन और नियमित फायर सेफ्टी ऑडिट जैसे प्रस्ताव रखे हैं। ABVP ने अपने घोषणापत्र में छात्र आवास के साथ कैंपस सुरक्षा, मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा की गुणवत्ता को भी प्रमुख मुद्दों में शामिल किया है।
दूसरी ओर, Association of Students for Alternative Politics यानी ASAP ने “Hostels for All” के नारे के साथ अभियान चलाया है। छात्र संगठनों के बीच इस मुद्दे पर बढ़ती सक्रियता से साफ है कि हॉस्टल की कमी अब केवल रहने की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि छात्र सुरक्षा और शिक्षा से भी जुड़ा बड़ा विषय बन गई है। कई छात्र संगठनों का तर्क है कि दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लेने वाले बाहरी राज्यों के छात्रों के लिए पर्याप्त और सुरक्षित आवास उपलब्ध कराना विश्वविद्यालय की प्राथमिकताओं में होना चाहिए।
सत्य निकेतन हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने भी PG और छात्र आवासों की सुरक्षा को लेकर कदम उठाने की बात कही है। सरकार ने PG, हॉस्टल और सार्वजनिक उपयोग वाली इमारतों के लिए संरचनात्मक ऑडिट और समय-समय पर सुरक्षा प्रमाणन की व्यवस्था मजबूत करने की योजना बताई है। प्रशासन का जोर इस बात पर है कि केवल कागजी जांच के बजाय इमारतों की वास्तविक स्थिति की नियमित जांच हो।
MCD ने भी सत्य निकेतन हादसे के बाद भवन सुरक्षा से जुड़े नियमों की जांच तेज कर दी है। अधिकारियों की जांच में स्वीकृत भवन योजना, इमारत में रहने वाले लोगों की संख्या, फायर NOC, संरचनात्मक स्थिरता और निर्धारित उपयोग जैसे पहलुओं को शामिल किया जा रहा है। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि छात्र आवास के रूप में इस्तेमाल हो रही इमारतें निर्धारित नियमों का पालन कर रही हैं या नहीं।
DUSU चुनाव के नतीजे 19 सितंबर को घोषित किए जाने हैं। ऐसे में चुनावी बहस में छात्र आवास का मुद्दा आने वाले दिनों में और प्रमुख हो सकता है। छात्रों के लिए केवल हॉस्टल की संख्या बढ़ाना ही नहीं, बल्कि सुरक्षित भवन, उचित किराया, बुनियादी सुविधाएं और आपातकालीन सुरक्षा व्यवस्था भी महत्वपूर्ण हैं। सत्य निकेतन की घटना ने इन सवालों को चुनावी राजनीति के केंद्र में ला दिया है और अब छात्र संगठन अपने-अपने प्रस्तावों के जरिए इसका समाधान पेश करने की कोशिश कर रहे हैं।
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