Last updated: October 19th, 2026 at 06:30 am

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में दिवाली से पहले वायु प्रदूषण तेजी से बढ़ने लगा है। बारिश का दौर थमने और हवा की गति कम होने के बाद प्रदूषक तत्व वातावरण में जमा होने लगे हैं। सोमवार, 19 अक्टूबर 2026 को सामने आई रिपोर्टों के अनुसार, राजधानी के कई इलाकों में वायु गुणवत्ता खराब से गंभीर श्रेणी तक पहुंच गई। आईटीओ क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 430 तक दर्ज किया गया, जो गंभीर प्रदूषण की स्थिति को दर्शाता है। इस बढ़ते प्रदूषण ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।
केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, रविवार को दिल्ली का औसत AQI शाम चार बजे 187 दर्ज किया गया था। यह भारतीय मानकों के अनुसार मध्यम श्रेणी में आता है, लेकिन शहर के कई निगरानी केंद्रों पर स्थिति इससे काफी खराब रही। आईटीओ में AQI 425 से ऊपर पहुंच गया, जबकि विवेक विहार, आरके पुरम, सिरी फोर्ट और जहांगीरपुरी जैसे इलाकों में भी प्रदूषण का स्तर खराब श्रेणी में दर्ज किया गया। इससे स्पष्ट है कि राजधानी के अलग-अलग हिस्सों में प्रदूषण का प्रभाव समान नहीं है।
विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के बाद हवा साफ होने से प्रदूषण के स्तर में कुछ समय के लिए राहत मिली थी। हालांकि, मौसम शुष्क होने और हवा की गति कम होने से वातावरण में मौजूद धूल और अन्य प्रदूषक तत्वों का फैलाव धीमा पड़ गया। वाहनों से निकलने वाला धुआं, निर्माण गतिविधियों से उड़ने वाली धूल और स्थानीय स्तर पर होने वाला उत्सर्जन दिल्ली की वायु गुणवत्ता को प्रभावित कर रहा है।
आने वाले दिनों को लेकर भी चिंता जताई गई है। मौसम और वायु गुणवत्ता संबंधी पूर्वानुमानों के अनुसार, 19 से 21 अक्टूबर के बीच दिल्ली की हवा खराब श्रेणी में पहुंच सकती है। यदि हवा की गति कम बनी रहती है और बारिश नहीं होती, तो प्रदूषण का स्तर और बढ़ सकता है। सर्दियों की शुरुआत के साथ तापमान, हवा की दिशा और वातावरण में प्रदूषकों के फैलाव की स्थिति भी वायु गुणवत्ता को प्रभावित करेगी।
दिल्ली में वायु प्रदूषण बढ़ने का असर सबसे अधिक बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों पर पड़ सकता है। प्रदूषित हवा में मौजूद सूक्ष्म कण फेफड़ों में पहुंचकर खांसी, गले में जलन, सांस लेने में परेशानी और आंखों में जलन जैसी समस्याएं पैदा कर सकते हैं। लंबे समय तक प्रदूषण के संपर्क में रहने से हृदय और फेफड़ों से जुड़ी बीमारियों का जोखिम भी बढ़ सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि जब प्रदूषण का स्तर अधिक हो, तब बाहर लंबे समय तक शारीरिक गतिविधियां करने से बचना चाहिए। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। यदि किसी व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई, सीने में जकड़न या असामान्य परेशानी महसूस हो, तो उसे चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। बाहर निकलना जरूरी होने पर अच्छी गुणवत्ता वाला उपयुक्त मास्क उपयोगी हो सकता है, हालांकि यह प्रदूषण के सभी प्रभावों से पूरी सुरक्षा नहीं देता।
प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए प्रशासन को निर्माण स्थलों पर धूल रोकने, सड़कों की नियमित सफाई, वाहनों से होने वाले उत्सर्जन की निगरानी और नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई जैसे उपायों पर ध्यान देना होगा। दिल्ली नगर निगम ने प्रदूषण फैलाने वाली आठ अवैध फैक्ट्रियों को सील करने की कार्रवाई भी की है। जरूरत पड़ने पर वायु प्रदूषण की स्थिति के अनुरूप ग्रेडेड रिस्पॉन्स एक्शन प्लान यानी ग्रैप के उपाय लागू किए जा सकते हैं।
दिवाली नजदीक होने के कारण प्रदूषण को नियंत्रित करना और भी महत्वपूर्ण हो गया है। पटाखों से निकलने वाला धुआं पहले से प्रदूषित हवा की स्थिति को और खराब कर सकता है। नागरिकों से अपील की जा रही है कि वे प्रदूषण कम करने में सहयोग करें, अनावश्यक वाहन उपयोग घटाएं और कचरा या पत्तियां खुले में न जलाएं।
दिल्ली में प्रदूषण की स्थिति पर नजर रखी जा रही है। आने वाले दिनों में हवा की गति, मौसम और स्थानीय उत्सर्जन के आधार पर वायु गुणवत्ता में बदलाव हो सकता है। ऐसे में नागरिकों के लिए जरूरी है कि वे नियमित रूप से आधिकारिक AQI अपडेट देखें और प्रदूषण बढ़ने पर अपनी स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता दें।
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