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दिल्ली में प्रदूषण को लेकर केंद्र और सरकार की बैठक, 500 पेट्रोल पंपों पर लागू होगा ‘नो PUC, नो फ्यूल’ अभियान

  दिल्ली में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं।
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    दिल्ली में सर्दियों के दौरान वायु प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए तैयारियां तेज कर दी गई हैं। 28 सितंबर को केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच उच्चस्तरीय बैठक में राजधानी की वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए कई उपायों की समीक्षा की गई। बैठक में वाहनों से होने वाले प्रदूषण, सड़क की धूल, निर्माण गतिविधियों, कचरा जलाने, औद्योगिक उत्सर्जन और सार्वजनिक परिवहन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई।

     

    बैठक में ‘नो PUC, नो फ्यूल’ अभियान को मिशन मोड में लागू करने का फैसला किया गया है। इसके तहत दिल्ली के करीब 500 ऐसे पेट्रोल पंपों पर जागरूकता और जांच अभियान चलाया जाएगा जहां ऑटोमेटिक नंबर प्लेट पहचान कैमरों की व्यवस्था है। वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र यानी PUC के बिना आने वाले वाहनों पर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।

     

    सरकार ने सार्वजनिक परिवहन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया है। दिल्ली मेट्रो और बसों के इस्तेमाल को बढ़ाने के लिए अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी को मजबूत करने की योजना पर काम किया जा रहा है। मेट्रो के सारथी ऐप को लेकर भी जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी है, ताकि यात्रियों को सार्वजनिक परिवहन से जुड़ी सुविधाओं की जानकारी आसानी से मिल सके।

     

    प्रदूषण के हॉटस्पॉट पर विशेष निगरानी रखने की योजना भी बनाई गई है। इन स्थानों पर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों द्वारा नियमित निरीक्षण किए जाएंगे। स्थानीय स्तर पर प्रदूषण के कारणों की पहचान कर उनके समाधान के लिए संबंधित विभागों को कार्रवाई करनी होगी। अक्टूबर तक चिन्हित हॉटस्पॉट पर जनभागीदारी से जुड़े अभियान चलाने की भी योजना है।

     

    सड़क की धूल को कम करना भी इस योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है। दिल्ली में सड़क पुनर्विकास और फुटपाथ से जुड़े कामों को तेजी से पूरा करने पर जोर दिया गया है। अधिकारियों को निर्माण और सड़क कार्यों से निकलने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए निर्धारित पर्यावरणीय नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

     

    कचरा और जैविक सामग्री खुले में जलाने पर भी सख्ती की तैयारी है। वार्ड और जिला स्तर पर निगरानी बढ़ाने के साथ कचरा जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए विशेष टीमें तैनात की जाएंगी। सरकार की योजना खुले में कचरा जलाने की घटनाओं को कम करने के लिए जागरूकता और प्रवर्तन दोनों स्तरों पर कार्रवाई करने की है।

     

    निर्माण और तोड़फोड़ से होने वाले धूल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए भी सर्दियों के दौरान विशेष प्रतिबंध तय किए गए हैं। 1 नवंबर 2026 से 31 जनवरी 2027 तक धूल पैदा करने वाली कुछ निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर रोक रहेगी। इसके अलावा 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर व्यापक प्रतिबंध लागू करने की योजना है।

     

    निजी वाहनों के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के लिए पार्किंग शुल्क में बदलाव और कार्यालयों के समय में बदलाव जैसे उपाय भी प्रस्तावित हैं। 1 नवंबर से अधिकृत पार्किंग स्थलों पर पार्किंग शुल्क बढ़ाने की व्यवस्था लागू करने की योजना है। इसी अवधि में अलग-अलग सरकारी कार्यालयों के समय में भी बदलाव किया जाएगा, ताकि यातायात के दबाव को अलग-अलग समय में बांटा जा सके।

     

    वाहनों से होने वाले प्रदूषण पर निगरानी बढ़ाने के लिए पुराने और अधिक प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर भी नियमों के तहत कार्रवाई की जाएगी। सार्वजनिक परिवहन और इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। दिल्ली की इलेक्ट्रिक वाहन नीति के तहत पुराने वाहनों को स्क्रैप कराने और नए इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने से जुड़े प्रोत्साहनों को भी बढ़ावा दिया जाएगा।

     

    औद्योगिक प्रदूषण की निगरानी के लिए भी व्यवस्था मजबूत करने की योजना है। निगरानी केंद्रों की संख्या बढ़ाने और प्रदूषण फैलाने वाली औद्योगिक इकाइयों के खिलाफ कार्रवाई तेज करने की बात कही गई है। अधिकारियों को नियमों का उल्लंघन करने वाली इकाइयों की जांच और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

     

    दिल्ली में सर्दियों के दौरान प्रदूषण का स्तर बढ़ने की स्थिति को देखते हुए सरकार का जोर अब पहले से तैयारी करने पर है। वाहनों, निर्माण कार्यों, सड़क की धूल, कचरा जलाने और औद्योगिक उत्सर्जन जैसे अलग-अलग स्रोतों पर एक साथ कार्रवाई करने की योजना बनाई गई है। आने वाले महीनों में इन उपायों के क्रियान्वयन और वायु गुणवत्ता के आधार पर आगे के कदम तय किए जाएंगे।

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