Last updated: July 10th, 2026 at 04:27 pm

दिल्ली की राजनीति में आम आदमी पार्टी (आप) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बीच एक बार फिर तीखी राजनीतिक टकराव देखने को मिल रहा है। इस बार विवाद स्वास्थ्य विभाग में कथित ₹650 करोड़ की दवा और चिकित्सा उपकरण खरीद अनियमितताओं को लेकर है। आम आदमी पार्टी ने इस मामले में भाजपा सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए राजधानी के एलएनजेपी अस्पताल के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। वहीं भाजपा ने इन आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताते हुए पलटवार किया और कहा कि मामले की जांच पहले से जारी है।
आप के दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि मामले के मुख्य आरोपी को समय रहते गिरफ्तार नहीं किया गया और उसे विदेश जाने का मौका मिल गया। पार्टी नेताओं का दावा है कि स्वास्थ्य विभाग में दवाओं और मेडिकल उपकरणों की खरीद में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। विरोध प्रदर्शन में पार्टी के कई विधायक और कार्यकर्ता शामिल हुए और सरकार से पूरे मामले पर जवाब मांगा।
भाजपा ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि जिस अधिकारी पर कार्रवाई की गई है, वह पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल में भी महत्वपूर्ण पदों पर रह चुकी थीं। भाजपा नेताओं का कहना है कि वर्तमान सरकार ने शिकायत सामने आते ही भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) से जांच शुरू कराई, जिसके बाद आवश्यक कार्रवाई की गई। पार्टी का दावा है कि कानून अपना काम कर रहा है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।
दिल्ली की राजनीति में यह मुद्दा तेजी से राजनीतिक रंग ले चुका है। आप का आरोप है कि भाजपा सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के प्रबंधन में विफल रही है और अब जवाबदेही से बचने की कोशिश कर रही है। वहीं भाजपा का कहना है कि विपक्ष तथ्यों के बजाय केवल राजनीतिक लाभ लेने के लिए आरोप लगा रहा है। दोनों दलों के नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस और सोशल मीडिया के माध्यम से एक-दूसरे पर लगातार हमले तेज कर दिए हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दिल्ली में सरकार और विपक्ष के बीच यह टकराव आने वाले दिनों में और बढ़ सकता है। स्वास्थ्य सेवाओं, भ्रष्टाचार और प्रशासनिक जवाबदेही जैसे मुद्दे राजधानी की राजनीति में लगातार प्रमुख बने हुए हैं। यदि जांच में कोई नया तथ्य सामने आता है तो यह विवाद और गहरा सकता है। दूसरी ओर यदि जांच एजेंसियां जल्द रिपोर्ट पेश करती हैं तो इससे राजनीतिक बहस की दिशा भी बदल सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में किसी भी भ्रष्टाचार के आरोप की निष्पक्ष जांच आवश्यक होती है। साथ ही राजनीतिक दलों को भी जांच पूरी होने तक तथ्यों के आधार पर अपनी बात रखनी चाहिए। जनता की अपेक्षा है कि स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सेवाओं से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए ताकि सरकारी व्यवस्था पर लोगों का भरोसा बना रहे।
दिल्ली में आप और भाजपा के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। आने वाले दिनों में जांच एजेंसियों की कार्रवाई और दोनों दलों की राजनीतिक रणनीति इस मुद्दे की दिशा तय करेगी। राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यह मामला दिल्ली की राजनीति में आने वाले समय तक चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है।
![]()
Comments are off for this post.