Last updated: July 10th, 2026 at 04:12 pm

भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से चल रही मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की वार्ता अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि दोनों पक्ष अगले 15 से 20 दिनों के भीतर समझौते के कानूनी मसौदे (लीगल स्क्रबिंग) की प्रक्रिया पूरी करने का लक्ष्य लेकर आगे बढ़ रहे हैं। इसके बाद समझौते को औपचारिक मंजूरी के लिए संबंधित प्रक्रियाओं से गुजारा जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत के निर्यात, विदेशी निवेश और आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
भारत और यूरोपीय संघ के बीच प्रस्तावित एफटीए पर कई दौर की बातचीत हो चुकी है। हाल के महीनों में दोनों पक्षों ने व्यापार, निवेश, सेवाओं, डिजिटल अर्थव्यवस्था, बौद्धिक संपदा अधिकार, हरित ऊर्जा और टिकाऊ विकास जैसे विषयों पर महत्वपूर्ण प्रगति की है। सरकार का कहना है कि समझौते का उद्देश्य दोनों पक्षों के बीच व्यापार को आसान बनाना और निवेश के नए अवसर पैदा करना है।
यूरोपीय संघ भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदारों में से एक है। ऐसे में इस समझौते के लागू होने से भारतीय वस्त्र उद्योग, फार्मास्यूटिकल्स, ऑटोमोबाइल, इंजीनियरिंग उत्पाद, कृषि उत्पाद, आईटी सेवाओं और स्टार्टअप क्षेत्र को विशेष लाभ मिलने की संभावना है। वहीं यूरोपीय कंपनियों को भी भारत के तेजी से बढ़ते बाजार में निवेश और कारोबार के नए अवसर मिलेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक सहयोग और मजबूत होगा।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि दोनों पक्ष समझौते को संतुलित और पारस्परिक हितों के अनुरूप बनाने के लिए लगातार संवाद कर रहे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद समझौते को जल्द अंतिम रूप दिया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे भारतीय उद्योगों की वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और निर्यात को नई गति मिलेगी।
आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक स्तर पर बदलते व्यापारिक माहौल के बीच भारत के लिए बड़े बाजारों के साथ मुक्त व्यापार समझौते अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। हाल के वर्षों में भारत ने संयुक्त अरब अमीरात, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन सहित कई देशों के साथ व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में तेजी से काम किया है। यूरोपीय संघ के साथ समझौता इसी रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि एफटीए लागू होने के बाद भारतीय निर्यातकों को कई उत्पादों पर शुल्क में राहत मिल सकती है, जिससे भारतीय वस्तुएं यूरोपीय बाजार में अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगी। इसके साथ ही तकनीकी सहयोग, हरित प्रौद्योगिकी, अनुसंधान, नवाचार और कौशल विकास के क्षेत्रों में भी दोनों पक्षों के बीच सहयोग बढ़ने की संभावना है। इससे भारत के विनिर्माण क्षेत्र और रोजगार सृजन को भी सकारात्मक बढ़ावा मिल सकता है।
दोनों पक्ष कानूनी प्रक्रिया को शीघ्र पूरा करने की दिशा में काम कर रहे हैं। यदि निर्धारित समयसीमा के अनुसार सभी प्रक्रियाएं पूरी होती हैं, तो वर्ष 2027 की पहली तिमाही तक यह समझौता लागू होने का रास्ता साफ हो सकता है। राजनीतिक और आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यह समझौता भारत की वैश्विक व्यापार नीति में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित होगा और देश के आर्थिक विकास को नई दिशा देने में अहम भूमिका निभाएगा।
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