Last updated: November 1st, 2026 at 03:14 pm

दिल्ली में बढ़ते वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए रविवार, 1 नवंबर 2026 से दूसरे राज्यों में पंजीकृत गैर-BS-VI वाहनों के प्रवेश पर सख्ती लागू कर दी गई। दिल्ली सरकार और संबंधित एजेंसियों ने राजधानी की सीमाओं पर जांच अभियान शुरू किया। इस दौरान दिल्ली-गुरुग्राम सीमा सहित कई प्रवेश मार्गों पर वाहनों की जांच की गई। नए नियम के तहत दूसरे राज्यों में पंजीकृत BS-III और BS-IV श्रेणी के पेट्रोल तथा डीजल वाहनों को दिल्ली में प्रवेश की अनुमति नहीं होगी।
सरकार का कहना है कि सर्दियों के मौसम में दिल्ली की हवा की गुणवत्ता तेजी से खराब होती है। वाहनों से निकलने वाला धुआं प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों में शामिल है। इसी वजह से राजधानी में पुराने उत्सर्जन मानकों वाले वाहनों की आवाजाही सीमित करने का फैसला किया गया है। इस व्यवस्था का उद्देश्य दिल्ली की हवा में प्रदूषण फैलाने वाले कणों और गैसों की मात्रा को कम करना है।
नए प्रतिबंध के अनुसार, दिल्ली के बाहर पंजीकृत BS-VI मानक वाले वाहनों को राजधानी में प्रवेश की अनुमति होगी। इसके अलावा इलेक्ट्रिक और सीएनजी वाहनों को भी निर्धारित नियमों के अनुसार छूट दी गई है। BS-III और BS-IV मानक वाले पेट्रोल तथा डीजल वाहनों पर प्रतिबंध लागू होगा। ऐसे वाहन यदि दिल्ली की सीमा पर जांच के दौरान पाए जाते हैं, तो उन्हें वापस भेजा जा सकता है। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई भी की जा सकती है।
दिल्ली सरकार ने इस व्यवस्था को लागू करने के लिए परिवहन विभाग, यातायात पुलिस और अन्य संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिए हैं। राजधानी में प्रवेश करने वाले प्रमुख मार्गों पर वाहनों के दस्तावेज और उत्सर्जन मानक की जांच की जा रही है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि प्रतिबंधित श्रेणी के वाहनों को दिल्ली में प्रवेश न करने दिया जाए।
रविवार सुबह से ही दिल्ली-गुरुग्राम सीमा पर जांच अभियान का असर दिखाई दिया। दिल्ली में प्रवेश करने वाले वाहनों की जांच के कारण कुछ स्थानों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। खासकर कार्यालयों और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए दिल्ली आने-जाने वाले यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। कुछ वाहन चालकों को जांच के दौरान अतिरिक्त समय देना पड़ा, जबकि प्रतिबंधित श्रेणी के वाहनों को वापस लौटना पड़ा।
गुरुग्राम और दिल्ली के बीच रोजाना हजारों लोग नौकरी, कारोबार और अन्य कामों के लिए यात्रा करते हैं। ऐसे में नए नियम का असर सीमावर्ती क्षेत्रों में रहने वाले लोगों पर भी पड़ सकता है। कई लोग निजी कारों और अन्य वाहनों से दिल्ली आते हैं। जिन वाहन चालकों के पास BS-VI मानक वाला वाहन नहीं है, उन्हें अब दिल्ली आने के लिए सार्वजनिक परिवहन, मेट्रो, कैब या अन्य वैकल्पिक साधनों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।
दिल्ली में वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए पहले भी कई तरह के उपाय लागू किए जाते रहे हैं। इनमें निर्माण कार्यों पर प्रतिबंध, धूल नियंत्रण, कचरा जलाने पर कार्रवाई, औद्योगिक उत्सर्जन की निगरानी और वाहनों की जांच शामिल हैं। सर्दियों के दौरान हवा की गति कम होने और तापमान में बदलाव के कारण प्रदूषक तत्व वातावरण में जमा होने लगते हैं। पराली जलाने, वाहनों के धुएं, निर्माण गतिविधियों और औद्योगिक उत्सर्जन का संयुक्त प्रभाव राजधानी की वायु गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल वाहनों पर प्रतिबंध लगाने से प्रदूषण की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं होगी। इसके लिए दिल्ली-एनसीआर के सभी शहरों में एक साथ कदम उठाने की जरूरत है। सार्वजनिक परिवहन को मजबूत करना, सड़कों की धूल नियंत्रित करना, निर्माण स्थलों पर नियमों का पालन कराना और औद्योगिक प्रदूषण पर निगरानी रखना भी जरूरी है।
नए नियम को लेकर वाहन चालकों के बीच कुछ सवाल भी हैं। खासकर दूसरे राज्यों में पंजीकृत वाहनों के मालिकों को अपने वाहन का उत्सर्जन मानक पता होना चाहिए। वाहन के पंजीकरण प्रमाणपत्र में सामान्यतः उत्सर्जन मानक से जुड़ी जानकारी उपलब्ध होती है। दिल्ली में प्रवेश करने से पहले वाहन मालिकों को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि उनका वाहन प्रतिबंधित श्रेणी में तो नहीं आता।
दिल्ली सरकार का यह कदम राजधानी में सर्दियों के दौरान प्रदूषण से निपटने की व्यापक योजना का हिस्सा है। हालांकि, इसके प्रभाव का आकलन आने वाले दिनों में ही हो सकेगा। फिलहाल दिल्ली की सीमाओं पर जांच बढ़ा दी गई है और दूसरे राज्यों से आने वाले वाहन चालकों को नए नियमों का पालन करने की सलाह दी जा रही है।
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