Last updated: August 25th, 2026 at 11:44 am

नई दिल्ली: दक्षिण-पश्चिम दिल्ली में पुलिस ने एक व्यक्ति को एक नाबालिग लड़की को कथित तौर पर ब्लैकमेल करने और उससे पैसे वसूलने के आरोप में गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल करके लड़की की अश्लील तस्वीर तैयार की और उसे सोशल मीडिया पर प्रसारित करने की धमकी देकर लंबे समय तक पैसे वसूले। लगभग ढाई साल तक चले इस कथित ब्लैकमेलिंग मामले में आरोपी ने करीब ₹1.2 लाख की रकम वसूली।
मामला दिसंबर 2023 का बताया जा रहा है, जब आरोपी ने सोशल मीडिया के जरिए नाबालिग लड़की से संपर्क किया था। शुरुआत में दोनों के बीच सामान्य बातचीत हुई, लेकिन बाद में आरोपी ने कथित तौर पर लड़की को अपने जाल में फंसा लिया।
जांच के अनुसार, आरोपी ने AI तकनीक का इस्तेमाल कर लड़की की एक आपत्तिजनक तस्वीर तैयार की। इसके बाद उसने तस्वीर को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक करने की धमकी दी। डर के कारण लड़की लंबे समय तक आरोपी की मांगें पूरी करती रही।
पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने इस धमकी का इस्तेमाल करके लगभग 32 महीनों तक लड़की से पैसे वसूले। इस दौरान कुल रकम करीब ₹1.2 लाख तक पहुंच गई।
इस तरह के मामलों में AI तकनीक के गलत इस्तेमाल को लेकर सुरक्षा विशेषज्ञों की चिंता बढ़ रही है। किसी व्यक्ति की वास्तविक तस्वीर को बदलकर या उसके चेहरे को किसी आपत्तिजनक तस्वीर में जोड़कर नकली सामग्री तैयार की जा सकती है। ऐसी सामग्री का इस्तेमाल ब्लैकमेलिंग और साइबर अपराध के लिए किया जा सकता है।
नाबालिगों से जुड़े मामलों में यह खतरा और गंभीर हो जाता है क्योंकि पीड़ित अक्सर सामाजिक बदनामी और परिवार के डर के कारण पुलिस या परिवार से शिकायत करने में हिचकिचाते हैं। आरोपी इसी डर का फायदा उठाकर पीड़ित को लंबे समय तक नियंत्रित करने की कोशिश कर सकते हैं।
दिल्ली पुलिस ने शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच शुरू की और आरोपी तक पहुंचने के लिए डिजिटल साक्ष्यों का इस्तेमाल किया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले में आगे की जांच जारी है।
जांच एजेंसियां ऐसे मामलों में सोशल मीडिया अकाउंट, चैट, फोन, भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर सकती हैं। इनसे आरोपी और पीड़ित के बीच संपर्क तथा कथित वसूली की पूरी प्रक्रिया को समझने में मदद मिलती है।
यह मामला यह भी दिखाता है कि AI तकनीक का इस्तेमाल केवल रचनात्मक या सकारात्मक कार्यों के लिए ही नहीं हो रहा है। साइबर अपराधी अब AI-generated या manipulated images का इस्तेमाल लोगों को डराने और पैसे वसूलने के लिए भी कर सकते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार, किसी व्यक्ति की नकली या मॉर्फ की गई अश्लील तस्वीर बनाना और उसे फैलाने की धमकी देना गंभीर साइबर अपराध की श्रेणी में आ सकता है। यदि पीड़ित नाबालिग हो तो मामले की कानूनी गंभीरता और बढ़ जाती है।
साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों की सलाह है कि यदि किसी व्यक्ति को इस तरह की धमकी मिलती है तो वह आरोपी को पैसे देने के बजाय तुरंत विश्वसनीय व्यक्ति और पुलिस को जानकारी दे। धमकी देने वाले व्यक्ति के संदेश, अकाउंट, भुगतान रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्य सुरक्षित रखना जांच में मदद कर सकता है।
नाबालिगों के मामले में माता-पिता और अभिभावकों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। बच्चों को यह समझाना जरूरी है कि ऑनलाइन किसी व्यक्ति द्वारा धमकी दिए जाने पर उन्हें अकेले समस्या का सामना नहीं करना चाहिए।
पुलिस और साइबर अपराध जांच एजेंसियों के लिए AI-generated सामग्री की पहचान और उसके स्रोत का पता लगाना आने वाले समय में महत्वपूर्ण चुनौती बन सकता है। तकनीक के तेजी से विकसित होने के साथ-साथ अपराधियों द्वारा इसके दुरुपयोग के तरीके भी बदल रहे हैं।
इस मामले में पुलिस की जांच यह पता लगाने पर भी केंद्रित हो सकती है कि आरोपी ने AI-generated तस्वीर कैसे तैयार की और क्या उसने ऐसी सामग्री का इस्तेमाल किसी अन्य व्यक्ति को भी निशाना बनाने के लिए किया था।
दिल्ली में AI के जरिए नाबालिग लड़की की नकली अश्लील तस्वीर तैयार कर उसे ब्लैकमेल करने का मामला साइबर अपराध के बदलते खतरे को सामने लाता है। पुलिस के अनुसार आरोपी ने करीब ढाई साल में लड़की से ₹1.2 लाख वसूले। आरोपी की गिरफ्तारी के बाद अब पुलिस डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर मामले की आगे जांच कर रही है।
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