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दिल्ली के जसौला में खुले नाले में गिरा 15 वर्षीय किशोर, चार दिन बाद मिला शव

नई दिल्ली: दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के जसौला गांव में पतंग पकड़ने के दौरान खुले नाले में गिरे 15 वर्षीय किशोर मिथुन
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नई दिल्ली: दक्षिण-पूर्वी दिल्ली के जसौला गांव में पतंग पकड़ने के दौरान खुले नाले में गिरे 15 वर्षीय किशोर मिथुन का शव मंगलवार को चार दिन की तलाश के बाद बरामद कर लिया गया। कक्षा 8 में पढ़ने वाला मिथुन शनिवार सुबह करीब 11 बजे नाले में गिरने के बाद लापता हो गया था। मंगलवार को बचाव दल ने नाले से उसका शव बरामद किया।

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    घटना के बाद दिल्ली फायर सर्विस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF), पुलिस और अन्य बचाव दलों ने बड़े स्तर पर तलाशी अभियान चलाया। तेज बहाव और नाले की स्थिति के कारण बचावकर्मियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। कई घंटों और दिनों तक तलाश जारी रहने के बावजूद किशोर का पता नहीं चल पाया था।

    परिवार के अनुसार, मिथुन पतंग के पीछे भाग रहा था और इसी दौरान उसका पैर फिसल गया। इसके बाद वह खुले नाले में बह गया। परिवार ने तुरंत अधिकारियों को सूचना दी, जिसके बाद बचाव अभियान शुरू किया गया।

    घटना के बाद मिथुन के पिता का एक वीडियो भी सामने आया, जिसमें वह खुद नाले में उतरकर अपने बेटे को तलाशते दिखाई दिए। बेटे के लापता होने के बाद परिवार लगातार उसके सुरक्षित मिलने की उम्मीद कर रहा था। लेकिन चार दिन बाद शव मिलने से परिवार में मातम छा गया।

    मामले ने दिल्ली में खुले नालों और नागरिक सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि नाला ढका हुआ होता या उसके आसपास पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था होती तो ऐसी दुर्घटना को रोका जा सकता था।

    घटना के बाद दिल्ली नगर निगम (MCD) ने दक्षिण-पूर्व क्षेत्र के एक जूनियर इंजीनियर को कथित लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया है। निगम ने अधिकारी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू करने की भी बात कही है।

    दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने घटना पर दुख और नाराजगी व्यक्त की है। मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, उन्होंने मुख्य सचिव को नाले के अधिकार क्षेत्र की जानकारी तत्काल उपलब्ध कराने और जिम्मेदार अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए थे।

    घटना ऐसे समय में हुई जब दिल्ली में बारिश का दौर भी जारी है। बारिश के दौरान खुले नालों में पानी का बहाव और जलस्तर बढ़ सकता है, जिससे ऐसे स्थानों पर दुर्घटना का खतरा और अधिक बढ़ जाता है।

    मिथुन का परिवार मूल रूप से उत्तर प्रदेश का रहने वाला बताया गया है और दिल्ली में मजदूरी करता है। परिवार के लिए यह घटना बेहद दर्दनाक है, क्योंकि चार दिनों तक बच्चे के वापस मिलने की उम्मीद बनी रही।

    इस हादसे ने प्रशासन के सामने खुले नालों की सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत भी बढ़ा दी है। खासकर उन स्थानों पर जहां नाले आबादी वाले इलाकों के पास हैं या जहां बच्चे और पैदल यात्री नियमित रूप से आते-जाते हैं।

    विशेषज्ञों के अनुसार, खुले नालों को ढकना, मजबूत बैरिकेड लगाना, चेतावनी संकेत लगाना और बारिश के दौरान संवेदनशील स्थानों की निगरानी बढ़ाना दुर्घटनाओं को रोकने के लिए जरूरी कदम हैं

    जसौला में 15 वर्षीय मिथुन की मौत ने दिल्ली में खुले नालों की सुरक्षा और नागरिक प्रशासन की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। चार दिन तक चले खोज अभियान के बाद मंगलवार को उसका शव बरामद हुआ। घटना के बाद MCD ने एक जूनियर इंजीनियर को निलंबित कर दिया है और विभागीय कार्रवाई शुरू की है।

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