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दिल्ली विधानसभा में BHASHINI तकनीक के इस्तेमाल की पहल, बहुभाषी कार्यप्रणाली को मिलेगा बढ़ावा

दिल्ली विधानसभा में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में एक नई पहल सामने आई है। विधानसभा
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दिल्ली विधानसभा में डिजिटल तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में एक नई पहल सामने आई है। विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने सदन के कामकाज में केंद्र सरकार की BHASHINI तकनीक के उपयोग को लेकर पहल की है। इसका उद्देश्य अलग-अलग भारतीय भाषाओं में उपलब्ध डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल कर विधानसभा की कार्यप्रणाली को अधिक सुलभ और बहुभाषी बनाना है।

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    BHASHINI भारत सरकार की एक भाषा-तकनीक पहल है, जिसका उद्देश्य भारतीय भाषाओं के बीच डिजिटल संचार को आसान बनाना है। इसमें अनुवाद, आवाज से टेक्स्ट और टेक्स्ट से आवाज जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। विधानसभा जैसे संस्थानों में ऐसी तकनीक का इस्तेमाल सरकारी कामकाज को अधिक लोगों तक पहुंचाने में मदद कर सकता है।

     

    दिल्ली एक बहुभाषी शहर है, जहां देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग रहते हैं। ऐसे में सरकारी सूचनाओं और विधायी कार्यवाही को विभिन्न भारतीय भाषाओं में उपलब्ध कराना नागरिकों की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

     

    विधानसभा में BHASHINI जैसी तकनीक के इस्तेमाल से भाषणों और चर्चाओं के डिजिटल अनुवाद की संभावनाएं बढ़ सकती हैं। इससे सदन की कार्यवाही को विभिन्न भाषाओं में समझने और रिकॉर्ड करने में मदद मिल सकती है। हालांकि तकनीक के वास्तविक इस्तेमाल से पहले इसकी सटीकता और तकनीकी विश्वसनीयता की जांच करना आवश्यक होगा।

     

    तकनीकी विशेषज्ञों के अनुसार, भारतीय भाषाओं में भाषण और दस्तावेजों का स्वचालित अनुवाद अभी भी चुनौतीपूर्ण क्षेत्र है। अलग-अलग भाषाओं की संरचना, उच्चारण और स्थानीय शब्दों के कारण मशीन अनुवाद में कभी-कभी गलतियां हो सकती हैं। इसलिए विधानसभा जैसी संवेदनशील संस्था में मानव सत्यापन और तकनीकी निगरानी दोनों जरूरी होंगे।

     

    विधानसभा में डिजिटल तकनीक का इस्तेमाल बढ़ाने की दिशा में यह पहल विधायी कामकाज के आधुनिकीकरण से भी जुड़ी हुई है। डिजिटल रिकॉर्ड, ऑनलाइन दस्तावेज और तकनीकी सहायता के माध्यम से सदन की कार्यप्रणाली को अधिक व्यवस्थित बनाने की कोशिश की जा रही है।

     

    अधिकारियों और तकनीकी विशेषज्ञों के बीच BHASHINI के संभावित उपयोग को लेकर चर्चा की जा रही है। इसमें यह देखा जाएगा कि किस प्रकार की तकनीक विधानसभा की मौजूदा डिजिटल व्यवस्था के साथ जोड़ी जा सकती है और इससे विधायकों, कर्मचारियों तथा आम नागरिकों को क्या लाभ मिल सकता है।

     

    यदि यह व्यवस्था सफल होती है तो भविष्य में दिल्ली विधानसभा की कार्यवाही को अधिक भाषाओं में डिजिटल रूप से उपलब्ध कराने की संभावना बढ़ सकती है। इससे उन नागरिकों को भी लाभ मिल सकता है जो अंग्रेजी या केवल एक विशेष भाषा में उपलब्ध सरकारी सामग्री को आसानी से नहीं समझ पाते।

     

    बहुभाषी डिजिटल शासन की दिशा में भारत में पहले से कई प्रयास किए जा रहे हैं। BHASHINI इसी व्यापक प्रयास का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य भारतीय भाषाओं में तकनीकी सेवाओं की उपलब्धता बढ़ाना है।

     

    विधानसभा में इसके इस्तेमाल से विधायी दस्तावेजों और चर्चाओं को डिजिटल रूप में संरक्षित करने की प्रक्रिया भी मजबूत हो सकती है। भविष्य में नागरिकों को विधानसभा से संबंधित सामग्री अपनी पसंद की भारतीय भाषा में उपलब्ध कराने के नए विकल्प विकसित किए जा सकते हैं।

     

    विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक का इस्तेमाल केवल अनुवाद तक सीमित न रखकर नागरिकों और सरकार के बीच संवाद को आसान बनाने के लिए किया जाना चाहिए। इससे डिजिटल समावेशन को बढ़ावा मिल सकता है और सरकारी संस्थानों तक लोगों की पहुंच बेहतर हो सकती है।

     

    दिल्ली विधानसभा में BHASHINI के उपयोग को लेकर पहल आगे बढ़ रही है। आने वाले समय में इसके तकनीकी परीक्षण और कार्यान्वयन से जुड़ी जानकारी सामने आ सकती है। यदि इसे प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है तो यह दिल्ली विधानसभा को अधिक डिजिटल और बहुभाषी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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