Last updated: August 29th, 2026 at 11:15 am

नई दिल्ली: दिल्ली सरकार ने अपनी मौजूदा देनदारियों को व्यवस्थित तरीके से चुकाने के लिए Consolidated Sinking Fund (CSF) की स्थापना की है। यह फंड वित्तीय वर्ष 2026-27 से काम करेगा और इसका इस्तेमाल सरकार की बकाया देनदारियों के भुगतान के अलावा किसी अन्य उद्देश्य के लिए नहीं किया जा सकेगा। सरकार का उद्देश्य भविष्य में कर्ज चुकाने के लिए पहले से वित्तीय रिजर्व तैयार करना और अचानक बजट पर पड़ने वाले बड़े दबाव को कम करना है।
दिल्ली सरकार ने इस योजना से संबंधित अधिसूचना जारी कर दी है। 24 अगस्त को जारी किए गए संशोधित राजपत्र में Consolidated Sinking Fund की व्यवस्था को स्पष्ट किया गया है। इसके तहत पहले से मौजूद फंड में मार्च 2026 के अंत तक उपलब्ध राशि को नए फंड में स्थानांतरित किया जाएगा।
सरकार के अनुसार, यह फंड एक तरह के अमोर्टाइजेशन फंड के रूप में काम करेगा। इसका उद्देश्य दिल्ली सरकार की बकाया देनदारियों को धीरे-धीरे चुकाने के लिए अलग से राशि जमा करना है। इससे भविष्य में जब किसी बड़े ऋण या वित्तीय दायित्व का भुगतान करना हो तो सरकार को एक ही बार में बजट से बड़ी रकम निकालने की जरूरत कम हो सकती है।
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2025 के अंत में दिल्ली सरकार की बकाया देनदारी करीब 30,556.54 करोड़ रुपये थी। इसमें केंद्र से 2013-14 में मिले करीब 3,326.39 करोड़ रुपये के गैर-योजनागत ऋण भी शामिल हैं। इसके अलावा चंद्रावल जल उपचार संयंत्र परियोजना से संबंधित करीब 447 करोड़ रुपये की देनदारी भी इसमें शामिल थी।
हालांकि दिल्ली की कुल देनदारी राज्य की अर्थव्यवस्था के आकार की तुलना में अपेक्षाकृत कम बताई गई है। 2025-26 में दिल्ली की बकाया देनदारी उसके GSDP के करीब 2.30 प्रतिशत के बराबर थी। पिछले वर्षों में भी दिल्ली की देनदारी और ऋण का स्तर कई अन्य राज्यों की तुलना में नियंत्रित रहा है।
नई व्यवस्था के तहत सरकार को अगले पांच वर्षों में इस फंड का कोष अपनी बकाया देनदारियों के कम से कम 5 प्रतिशत तक पहुंचाने की दिशा में प्रयास करना होगा। सरकार इस फंड में साल में एक से अधिक बार भी राशि जमा कर सकती है और योगदान की संख्या पर कोई निश्चित सीमा नहीं रखी गई है।
फंड में सरकार अपने सामान्य राजस्व या अन्य स्रोतों से राशि डाल सकती है। इनमें विनिवेश से प्राप्त राशि जैसे स्रोत भी शामिल हो सकते हैं। हालांकि अधिसूचना के अनुसार सरकार इस फंड में अपना योगदान देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक से उधार लेकर राशि उपलब्ध नहीं करा सकेगी।
फंड की राशि और उससे मिलने वाली आय को सरकार के सामान्य राजस्व से अलग रखा जाएगा। इसका प्रशासन भारतीय रिजर्व बैंक के नागपुर स्थित Central Accounts Section के माध्यम से किया जाएगा। फंड में जमा राशि को केंद्र सरकार की दिनांकित प्रतिभूतियों, विशेष प्रतिभूतियों, ट्रेजरी बिल और अन्य राज्यों की सरकारी प्रतिभूतियों जैसे विकल्पों में निवेश किया जा सकता है।
फंड से पैसा निकालने पर भी कुछ प्रतिबंध लगाए गए हैं। अधिसूचना के अनुसार फंड बनने की तारीख से शुरुआती पांच वर्षों तक सामान्य निकासी की अनुमति नहीं होगी। इसके बाद भी निकासी निर्धारित नियमों और सीमा के भीतर ही की जा सकेगी। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि फंड का इस्तेमाल अन्य सरकारी खर्चों के लिए न किया जाए।
नई व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि Consolidated Sinking Fund का इस्तेमाल केवल सरकार की बकाया देनदारियों के भुगतान के लिए किया जाएगा। इसमें आंतरिक ऋण और Public Account Liabilities दोनों को शामिल किया गया है। इस तरह सरकार भविष्य में अपनी देनदारियों के लिए एक अलग वित्तीय सुरक्षा कवच तैयार करना चाहती है।
हालांकि, जरूरत पड़ने पर फंड में किए गए निवेश को RBI की शर्तों के अधीन अस्थायी नकदी प्रवाह की समस्या से निपटने के लिए Special Drawing Facility के तहत इस्तेमाल किया जा सकता है। यह सुविधा सामान्य खर्च के लिए फंड निकालने के बराबर नहीं होगी और इसके लिए RBI के निर्धारित नियम लागू होंगे।
सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था से भविष्य में कर्ज चुकाने की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी। आमतौर पर जब किसी बड़े ऋण की अदायगी एक ही समय पर करनी होती है तो वार्षिक बजट पर दबाव बढ़ सकता है। पहले से राशि जमा करने से ऐसी स्थिति में सरकार के पास अलग से उपलब्ध वित्तीय संसाधन रहेंगे। इससे विकास और बुनियादी ढांचे से जुड़े खर्चों पर अचानक कटौती का दबाव कम किया जा सकता है।
वित्तीय प्रबंधन के लिहाज से यह कदम दिल्ली सरकार के लिए दीर्घकालिक योजना का हिस्सा माना जा रहा है। सरकार अब अपनी देनदारियों की अदायगी को केवल तत्काल बजटीय प्रावधानों पर निर्भर रखने के बजाय एक निर्धारित रिजर्व के जरिए व्यवस्थित करने की कोशिश कर रही है।
दिल्ली सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 से Consolidated Sinking Fund लागू किया है। करीब 30,556 करोड़ रुपये की बकाया देनदारी के बीच सरकार का लक्ष्य अगले पांच वर्षों में इस फंड का कोष देनदारियों के 5 प्रतिशत तक पहुंचाना है। फंड का इस्तेमाल केवल सरकारी बकाया देनदारियों की अदायगी के लिए किया जाएगा।
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