Last updated: October 8th, 2026 at 02:10 pm

दिल्ली के सीमापुरी इलाके में बुधवार को एक दर्दनाक हादसा हुआ। यहां एक बहुमंजिला आवासीय इमारत अचानक भरभराकर गिर गई। हादसे में अब तक पांच लोगों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि आठ घायलों को मलबे से निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। मृतकों में चार महीने की गर्भवती 21 वर्षीय महिला गुलफसा और दो बच्चे भी शामिल हैं। गुरुवार को मलबा हटाने के दौरान दो और महिलाओं के शव बरामद किए गए, जिसके बाद मृतकों की संख्या पांच हो गई।
यह हादसा बुधवार दोपहर करीब 3:30 बजे उत्तर-पूर्वी दिल्ली के न्यू सीमापुरी इलाके में ईदगाह और मछली मंडी के पास हुआ। इमारत के अचानक गिरने से आसपास के इलाके में अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोग तुरंत मौके पर पहुंचे और मलबे में फंसे लोगों को निकालने में बचाव टीमों की मदद की। शुरुआती जानकारी में कई लोगों के मलबे में दबे होने की आशंका जताई गई थी।
हादसे की सूचना मिलते ही दिल्ली फायर सर्विस, दिल्ली पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल यानी NDRF, दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण और नगर निगम की टीमें मौके पर पहुंचीं। बचाव अभियान के दौरान भारी मलबे और संकरी गलियों के कारण राहत कार्य में काफी मुश्किलें आईं। बड़ी कंक्रीट स्लैब को हटाने के लिए मशीनों और क्रेन का इस्तेमाल किया गया। अधिकारियों के मुताबिक मलबा सावधानी से हटाया जा रहा था, क्योंकि उसके नीचे किसी और व्यक्ति के दबे होने की आशंका बनी हुई थी।
हादसे में जान गंवाने वाली 21 वर्षीय गुलफसा करीब चार महीने की गर्भवती थीं। इसके अलावा दो बच्चों की भी मौत हुई। गुरुवार को बचाव अभियान के दौरान दो और महिलाओं के शव बरामद किए गए। अधिकारियों ने बताया कि उनकी पहचान की प्रक्रिया पूरी की जा रही थी। आठ घायल लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनका इलाज जारी है।
इमारत की स्थिति को लेकर भी कई सवाल उठ रहे हैं। नगर निगम के अनुसार, यह संरचना करीब 20 से 25 साल पुरानी थी और दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड के अंतर्गत आने वाले इलाके में बनी थी। रिपोर्टों के मुताबिक इमारत में समय के साथ अतिरिक्त मंजिलें भी बनाई गई थीं। स्थानीय लोगों ने निर्माण की स्थिति को लेकर पहले भी चिंता जताई थी।
इमारत गिरने की असली वजह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हुई है। अधिकारियों के सामने अलग-अलग संभावनाएं सामने आई हैं। कुछ स्थानीय लोगों ने दावा किया कि हाल में आए भूकंप के झटकों के बाद इमारत में दरारें दिखाई दी थीं। वहीं, एक अन्य दावे के अनुसार पास की इमारत में तोड़फोड़ और निर्माण कार्य चल रहा था, जिसके दौरान मशीनों से होने वाले कंपन का असर इस इमारत पर पड़ा हो सकता है। प्रशासन ने मामले की जांच शुरू कर दी है, इसलिए अंतिम कारण जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा।
घटना के बाद आसपास की इमारतों की सुरक्षा को लेकर भी चिंता बढ़ गई है। जिस मकान का हिस्सा गिरा, उसके आसपास मौजूद कुछ अन्य ढांचों को भी नुकसान पहुंचने की बात सामने आई है। घनी आबादी वाले सीमापुरी इलाके में इमारतों के निर्माण और उनकी संरचनात्मक सुरक्षा को लेकर प्रशासन के सामने बड़ी चुनौती है। इस तरह की घटनाओं के बाद पुराने और कमजोर भवनों की जांच की जरूरत फिर सामने आई है।
बचाव अभियान के दौरान प्रशासन की कई एजेंसियां लगातार मौके पर मौजूद रहीं। मलबे को हटाने के साथ-साथ घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था की गई। अधिकारियों का कहना है कि जब तक यह पूरी तरह सुनिश्चित नहीं हो जाता कि मलबे के नीचे कोई व्यक्ति नहीं है, तब तक तलाशी और राहत कार्य जारी रहेगा।
सीमापुरी की यह घटना राजधानी में भवन सुरक्षा और अवैध निर्माण को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। खासकर घनी आबादी वाले इलाकों में पुराने भवनों में बिना पर्याप्त संरचनात्मक जांच के अतिरिक्त निर्माण कितना सुरक्षित है, यह बड़ा मुद्दा बन गया है। अब प्रशासन की जांच से यह पता चलेगा कि इमारत की हालत पहले से खराब थी या आसपास चल रहे किसी निर्माण कार्य ने इसके गिरने में भूमिका निभाई।
![]()
Comments are off for this post.