Last updated: June 30th, 2026 at 05:43 pm

दिल्ली सरकार ने इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से नई EV पॉलिसी 2026 को मंजूरी दे दी है। सरकार का कहना है कि इस नीति का मुख्य उद्देश्य राजधानी में प्रदूषण कम करना, स्वच्छ परिवहन को प्रोत्साहित करना और इलेक्ट्रिक वाहनों के उपयोग को बढ़ाना है। हालांकि, नीति में हाइब्रिड वाहनों को प्रोत्साहन नहीं दिए जाने के फैसले के बाद राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।
सरकार के अनुसार नई नीति के तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया, कारों और व्यावसायिक वाहनों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कई प्रोत्साहन जारी रहेंगे। इसके साथ ही राजधानी में चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर का विस्तार, बैटरी स्वैपिंग सुविधाओं को बढ़ावा और सार्वजनिक स्थानों पर अधिक चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की योजना बनाई गई है। सरकार का मानना है कि इससे दिल्ली में प्रदूषण के स्तर को कम करने में मदद मिलेगी।
दिल्ली सरकार का कहना है कि परिवहन क्षेत्र राजधानी में वायु प्रदूषण के प्रमुख कारणों में से एक है। इसलिए इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देना समय की आवश्यकता है। सरकार का दावा है कि नई EV पॉलिसी दिल्ली को स्वच्छ और टिकाऊ परिवहन व्यवस्था की दिशा में आगे ले जाएगी।
हालांकि, नई नीति में हाइब्रिड वाहनों को किसी विशेष प्रोत्साहन का लाभ नहीं मिलने पर राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने कहा कि यदि हाइब्रिड वाहन भी प्रदूषण कम करने में योगदान दे सकते हैं, तो उन्हें पूरी तरह नजरअंदाज करना उचित नहीं है। उनका कहना है कि उपभोक्ताओं को विभिन्न स्वच्छ तकनीकों के बीच विकल्प मिलना चाहिए।
दूसरी ओर आम आदमी पार्टी के नेताओं ने सरकार के फैसले का बचाव करते हुए कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन ही भविष्य का सबसे प्रभावी और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प हैं। उनका कहना है कि सीमित संसाधनों को देखते हुए सरकार का ध्यान पूरी तरह इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने पर होना चाहिए, ताकि प्रदूषण में अधिक प्रभावी कमी लाई जा सके।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि दिल्ली जैसे महानगर में इलेक्ट्रिक वाहनों का विस्तार वायु प्रदूषण कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम हो सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि केवल नई नीति बनाना पर्याप्त नहीं होगा। चार्जिंग नेटवर्क, बिजली आपूर्ति, बैटरी रीसाइक्लिंग और उपभोक्ताओं के विश्वास को मजबूत करने जैसे क्षेत्रों में भी तेजी से काम करना होगा।
ऑटोमोबाइल उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि नई नीति का असर वाहन बाजार पर भी दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ने की संभावना है। साथ ही वाहन निर्माता कंपनियां भी दिल्ली के बाजार को ध्यान में रखते हुए नए इलेक्ट्रिक मॉडल पेश कर सकती हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पर्यावरण, प्रदूषण और सार्वजनिक परिवहन जैसे मुद्दे अब दिल्ली की राजनीति के महत्वपूर्ण विषय बन चुके हैं। ऐसे में नई EV पॉलिसी पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस आगे भी जारी रहने की संभावना है।
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