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दिल्ली-NCR में 5 से 20 नवंबर तक निर्माण और तोड़फोड़ पर रोक, प्रदूषण नियंत्रण के लिए CAQM का बड़ा फैसला

  दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए
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    दिल्ली और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) में सर्दियों के दौरान बढ़ने वाले वायु प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने 5 नवंबर से 20 नवंबर 2026 तक पूरे NCR में धूल पैदा करने वाली निर्माण और तोड़फोड़ गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने का आदेश दिया है। इस फैसले का उद्देश्य नवंबर के शुरुआती और मध्य दिनों में प्रदूषण के संभावित स्तर को नियंत्रित करना और हवा में धूल तथा अन्य प्रदूषकों के जमाव को कम करना है। यह प्रतिबंध दिल्ली के साथ-साथ हरियाणा, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के NCR क्षेत्रों में भी लागू होगा।

     

    केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने 30 अक्टूबर को इस फैसले की घोषणा की थी। इसके बाद CAQM ने औपचारिक आदेश जारी कर दिल्ली सरकार और NCR के संबंधित राज्य प्रशासन को निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा। आयोग के अनुसार, यह कदम पिछले वर्षों के वायु गुणवत्ता आंकड़ों और नवंबर के दौरान प्रदूषण बढ़ने के मौसमी रुझानों को ध्यान में रखकर उठाया गया है।

     

    प्रतिबंध के तहत खुले स्थानों पर होने वाले ऐसे निर्माण और विध्वंस कार्य रोकने होंगे, जिनसे धूल और वायु प्रदूषण फैलता है। इसमें सामान्य निर्माण गतिविधियां, इमारतों को तोड़ना और अन्य धूल पैदा करने वाले कार्य शामिल हैं। सड़कों, फ्लाईओवर, ओवरब्रिज, बिजली की ट्रांसमिशन लाइनों, पाइपलाइन और दूरसंचार से जुड़े कई बाहरी निर्माण कार्य भी इस आदेश के दायरे में आएंगे। संबंधित एजेंसियों और निर्माण कंपनियों को निर्धारित अवधि में इन गतिविधियों को रोकना होगा।

     

    हालांकि, आयोग ने कुछ जरूरी परियोजनाओं को प्रतिबंध से छूट दी है। रेलवे, मेट्रो सेवाओं, हवाई अड्डों, अंतरराज्यीय बस टर्मिनलों, अस्पतालों, जलापूर्ति और स्वच्छता से जुड़ी परियोजनाओं को छूट प्रदान की गई है। इसके अलावा राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा और राष्ट्रीय महत्व की परियोजनाएं भी निर्धारित शर्तों के तहत जारी रह सकेंगी। इन परियोजनाओं को भी निर्माण एवं विध्वंस से जुड़े कचरे के प्रबंधन और धूल नियंत्रण के नियमों का पालन करना होगा।

     

    CAQM ने केवल निर्माण गतिविधियों पर ही रोक नहीं लगाई है, बल्कि कार्यालयों में कर्मचारियों की उपस्थिति को लेकर भी निर्देश जारी किए हैं। 5 नवंबर से 20 नवंबर तक दिल्ली और पांच प्रमुख NCR जिलों में सरकारी तथा निजी कार्यालयों को अधिकतम 50 प्रतिशत कर्मचारियों के साथ भौतिक रूप से संचालित करने को कहा गया है। शेष कर्मचारियों को घर से काम करने की व्यवस्था करनी होगी। यह निर्देश दिल्ली के अलावा गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, गाजियाबाद और गौतम बुद्ध नगर में लागू होगा। हालांकि, जिन औद्योगिक प्रतिष्ठानों और आवश्यक सेवाओं में घर से काम करना व्यावहारिक नहीं है, उन्हें इस व्यवस्था से छूट दी गई है।

     

    आयोग ने अपने आदेश में बताया है कि नवंबर के शुरुआती और मध्य दिनों में दिल्ली-NCR में प्रदूषण बढ़ने का खतरा हर साल देखा जाता है। इस दौरान स्थानीय वाहनों और उद्योगों से निकलने वाला उत्सर्जन, निर्माण स्थलों की धूल, कृषि अवशेषों को जलाने से आने वाला धुआं और अन्य प्रदूषण स्रोत हवा की गुणवत्ता को प्रभावित करते हैं। इसके साथ ही सर्दियों में हवा की गति कम होने, वातावरण में ऊर्ध्वाधर मिश्रण घटने और प्रदूषकों के जमीन के पास जमा होने जैसी मौसमी परिस्थितियां समस्या को गंभीर बना सकती हैं।

     

    दिल्ली सरकार की ओर से पहले ही सर्दियों के प्रदूषण से निपटने के लिए अलग व्यवस्था घोषित की गई है। दिल्ली में 1 नवंबर से 31 जनवरी तक धूल पैदा करने वाली निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर मौसमी प्रतिबंध लागू रहेगा। इसके अलावा 10 दिसंबर से 20 जनवरी तक निर्माण और विध्वंस गतिविधियों पर और सख्त रोक निर्धारित की गई है। ऐसे में CAQM का 5 से 20 नवंबर वाला NCR स्तर का आदेश क्षेत्रीय स्तर पर अतिरिक्त नियंत्रण के रूप में काम करेगा।

     

    इस फैसले का असर निर्माण कंपनियों, ठेकेदारों, रियल एस्टेट परियोजनाओं और सार्वजनिक निर्माण एजेंसियों पर पड़ सकता है। निर्धारित अवधि में जिन कार्यों पर रोक लागू होगी, उन्हें रोकना होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर संबंधित अधिकारियों की ओर से कार्रवाई की जा सकती है। वहीं, कार्यालयों में 50 प्रतिशत उपस्थिति के निर्देश से कर्मचारियों की दिनचर्या और कंपनियों की कार्यप्रणाली में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।

     

    दिल्ली-NCR में प्रदूषण की समस्या किसी एक शहर या एक स्रोत तक सीमित नहीं है। इसलिए CAQM ने पूरे क्षेत्र में एक साथ कदम उठाने का फैसला किया है। हालांकि, इन प्रतिबंधों का वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि सभी संबंधित सरकारें, नगर निकाय और निर्माण एजेंसियां आदेशों को कितनी प्रभावी तरीके से लागू करती हैं। आने वाले दिनों में वायु गुणवत्ता के आंकड़ों से पता चलेगा कि इन उपायों से प्रदूषण के स्तर में कितनी राहत मिलती है।

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