Last updated: July 27th, 2026 at 01:51 pm

बिहार के नालंदा जिले में डेयरी क्षेत्र को मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राज्य सरकार ने जिले में डेयरी विकास से जुड़ी कई नई परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य दुग्ध उत्पादन बढ़ाना, पशुपालकों की आय में वृद्धि करना, आधुनिक डेयरी सुविधाओं का विस्तार करना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती प्रदान करना है। कार्यक्रम में राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों, डेयरी विकास विभाग के प्रतिनिधियों, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और बड़ी संख्या में किसानों ने भाग लिया।
कार्यक्रम के दौरान अधिकारियों ने बताया कि बिहार में डेयरी क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। राज्य के लाखों परिवार दूध उत्पादन और पशुपालन से अपनी आजीविका चलाते हैं। ऐसे में डेयरी क्षेत्र को आधुनिक तकनीक से जोड़ना और किसानों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है। नालंदा में शुरू की गई नई परियोजनाओं से स्थानीय पशुपालकों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
नई योजनाओं के तहत दूध संग्रहण केंद्रों का विस्तार किया जाएगा, जिससे किसानों को अपने गांव के आसपास ही दूध बेचने की सुविधा मिलेगी। इसके अलावा आधुनिक दुग्ध प्रसंस्करण इकाइयों को विकसित करने पर भी जोर दिया जाएगा, ताकि दूध की गुणवत्ता बनाए रखने के साथ-साथ उससे बनने वाले विभिन्न उत्पादों का उत्पादन भी बढ़ाया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि इससे किसानों को बेहतर बाजार और उचित मूल्य मिलने में मदद मिलेगी।
डेयरी विकास विभाग ने बताया कि पशुपालकों को आधुनिक पशुपालन तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। इसमें पशुओं के बेहतर स्वास्थ्य प्रबंधन, संतुलित आहार, कृत्रिम गर्भाधान, टीकाकरण और दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के वैज्ञानिक तरीकों की जानकारी शामिल होगी। सरकार का मानना है कि आधुनिक तकनीकों को अपनाकर किसान कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं।
कार्यक्रम के दौरान महिला स्वयं सहायता समूहों की भूमिका पर भी विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने कहा कि डेयरी क्षेत्र में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है और सरकार उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के लिए कई योजनाएं चला रही है। महिलाओं को डेयरी व्यवसाय से जोड़कर ग्रामीण परिवारों की आय में वृद्धि करने का लक्ष्य रखा गया है।
कृषि और पशुपालन विशेषज्ञों के अनुसार, बिहार में डेयरी क्षेत्र रोजगार के बड़े स्रोत के रूप में उभर सकता है। यदि किसानों को आधुनिक तकनीक, पर्याप्त वित्तीय सहायता और बेहतर विपणन सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं तो राज्य का दुग्ध उत्पादन काफी बढ़ सकता है। इससे न केवल किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि राज्य की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।
सरकार ने यह भी संकेत दिया कि नालंदा मॉडल की सफलता के आधार पर इसी प्रकार की परियोजनाएं बिहार के अन्य जिलों में भी लागू की जा सकती हैं। इसके लिए सहकारी समितियों को मजबूत बनाने, दूध संग्रहण नेटवर्क का विस्तार करने और निजी निवेश को बढ़ावा देने पर भी विचार किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में डेयरी उद्योग के विस्तार से युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
कार्यक्रम में मौजूद किसानों ने सरकार की इस पहल का स्वागत किया। उनका कहना था कि यदि दूध खरीद की व्यवस्था मजबूत होगी और उचित मूल्य मिलेगा तो अधिक से अधिक किसान पशुपालन को व्यवसाय के रूप में अपनाएंगे। किसानों ने पशु चिकित्सा सेवाओं और पशु आहार की उपलब्धता को और बेहतर बनाने की भी मांग की।
विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में कृषि के साथ-साथ डेयरी क्षेत्र का विकास किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। दूध और दुग्ध उत्पादों की बढ़ती मांग को देखते हुए यह क्षेत्र आने वाले वर्षों में ग्रामीण विकास का प्रमुख आधार बन सकता है। इसके लिए सरकारी योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन और किसानों तक समय पर लाभ पहुंचाना आवश्यक होगा।
नालंदा में शुरू की गई डेयरी विकास परियोजनाओं को राज्य के ग्रामीण विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है। सरकार को उम्मीद है कि इन योजनाओं से दुग्ध उत्पादन में वृद्धि होगी, किसानों की आय बेहतर होगी और बिहार का डेयरी क्षेत्र नई ऊंचाइयों तक पहुंचेगा। आने वाले समय में इन परियोजनाओं के प्रभाव का आकलन किया जाएगा और आवश्यकता के अनुसार अन्य जिलों में भी इसी तरह की योजनाओं का विस्तार किया जाएगा।
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