Last updated: November 7th, 2026 at 03:26 pm

बिहार की राजधानी पटना के मनेर थाना क्षेत्र में शुक्रवार, 6 नवंबर की सुबह बिहार पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (STF) और जिला पुलिस की संयुक्त टीम के साथ हुई मुठभेड़ में तीन संदिग्ध अपराधी मारे गए। यह मुठभेड़ शेरपुर गांव के पास गंगा नदी के किनारे हुई। गोलीबारी के दौरान मनेर थानेदार रजनीश कुमार भी घायल हो गए। पुलिस के मुताबिक, अपराधियों की ओर से की गई फायरिंग में एक गोली थानेदार की बांह को छूते हुए निकल गई। उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया।
पटना के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) कार्तिकेय शर्मा के अनुसार, पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि कुछ आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग शेरपुर इलाके में इकट्ठा हुए हैं और किसी बड़ी वारदात को अंजाम देने की योजना बना रहे हैं। सूचना मिलने के बाद STF और पटना जिला पुलिस की संयुक्त टीम ने इलाके में अभियान शुरू किया। शुक्रवार तड़के करीब 4:30 बजे पुलिस टीम संदिग्धों के ठिकाने पर पहुंची। पुलिस का दावा है कि टीम को देखते ही आरोपियों ने अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी।
पुलिस के मुताबिक, अचानक हुई फायरिंग के बाद जवानों ने जवाबी कार्रवाई की। करीब 20 मिनट तक दोनों तरफ से गोलीबारी होती रही। SSP ने बताया कि अपराधियों ने 24 से अधिक राउंड गोलियां चलाईं, जबकि पुलिस की ओर से 18 राउंड फायरिंग की गई। गोलीबारी थमने के बाद पुलिस टीम ने घटनास्थल की तलाशी ली, जहां तीन लोग घायल अवस्था में मिले। उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने तीनों को मृत घोषित कर दिया।
मारे गए लोगों की पहचान जय प्रकाश राय उर्फ जेपी यादव, बबलू यादव और राजा शर्मा उर्फ सूरज कुमार के रूप में हुई है। पुलिस के अनुसार, तीनों का आपराधिक इतिहास रहा है और वे पटना के मनेर, दानापुर, शाहपुर तथा आसपास के थाना क्षेत्रों में दर्ज कई मामलों में वांछित थे। पुलिस ने दावा किया है कि तीनों का संबंध हाल ही में मनेर के बयापुर गांव में हुई गोलीबारी और हत्या की घटना से भी था।
पुलिस के मुताबिक, 18 अक्टूबर को बयापुर गांव में गोलीबारी हुई थी, जिसमें संजीत कुमार उर्फ भोलू की हत्या कर दी गई थी, जबकि पिंटू कुमार घायल हो गए थे। इस मामले में पुरानी पंचायत चुनावी रंजिश और पैसों की मांग जैसे पहलुओं की भी जांच की गई थी। पुलिस का आरोप है कि मारे गए तीनों लोग इस हत्याकांड में शामिल थे। मामले के कथित मुख्य साजिशकर्ता राजेश रंजन उर्फ राजेश मुखिया को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज चुकी है।
मुठभेड़ के बाद पुलिस ने घटनास्थल से हथियार और कारतूस बरामद किए। शुरुआती जानकारी के अनुसार, एक देसी पिस्तौल, दो देसी कट्टे, नौ जिंदा कारतूस और छह खाली खोखे बरामद किए गए हैं। फॉरेंसिक साइंस लैब (FSL) की टीम ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर साक्ष्य एकत्र किए। पुलिस ने तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजा और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराने की बात कही है।
घटना के बाद दानापुर अनुमंडलीय अस्पताल में तनाव की स्थिति भी देखने को मिली। जब तीनों मृतकों के शव अस्पताल पहुंचे तो उनके परिजन और समर्थक वहां जुट गए। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए और मुठभेड़ को लेकर विरोध जताया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस बल तैनात करना पड़ा। अस्पताल परिसर में पुलिस और प्रदर्शन कर रहे लोगों के बीच तनाव की खबरें भी सामने आईं।
पटना पुलिस का कहना है कि इलाके में अपराध नियंत्रण के लिए लगातार अभियान चलाया जा रहा है। मुठभेड़ के बाद आसपास के क्षेत्रों में भी निगरानी बढ़ा दी गई है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों के नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे तथा उनके पास हथियार कहां से आए थे।
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