Last updated: November 7th, 2026 at 03:28 pm

बिहार की राजनीति में नवंबर के आखिरी सप्ताह से हलचल तेज होने वाली है। बिहार विधानमंडल का शीतकालीन सत्र 30 नवंबर से शुरू होकर 4 दिसंबर 2026 तक चलेगा। पांच दिनों के इस सत्र में कुल पांच बैठकें आयोजित की जाएंगी। विधानसभा सचिवालय की ओर से शनिवार, 7 नवंबर को सत्र का कार्यक्रम जारी किया गया। इस दौरान राज्य सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 का द्वितीय अनुपूरक बजट पेश करेगी। इसके अलावा विभिन्न सरकारी विधेयकों, वित्तीय प्रस्तावों और अन्य महत्वपूर्ण संसदीय कार्यों पर चर्चा होगी।
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174 के तहत बिहार विधानसभा का सत्र आहूत किया है। जारी कार्यक्रम के अनुसार, 30 नवंबर को सुबह 11 बजे सदन की कार्यवाही शुरू होगी। विधानसभा और विधान परिषद दोनों में निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कामकाज किया जाएगा। इस सत्र को वित्तीय और विधायी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि सरकार को चालू वित्तीय वर्ष के लिए अतिरिक्त खर्चों की मंजूरी सदन से लेनी है।
सत्र के पहले दिन यानी 30 नवंबर को कई महत्वपूर्ण संसदीय कार्य प्रस्तावित हैं। यदि किसी नवनिर्वाचित सदस्य का शपथ ग्रहण या प्रतिज्ञान बाकी होगा तो उसे पूरा कराया जाएगा। इसके बाद पिछले सत्र की समाप्ति के बाद राज्यपाल की ओर से जारी अध्यादेशों की प्रमाणित प्रतियां सदन के पटल पर रखी जाएंगी। इसी दिन सरकार वित्तीय वर्ष 2026-27 का द्वितीय अनुपूरक व्यय विवरण भी पेश करेगी। इसके अलावा दिवंगत नेताओं और अन्य प्रमुख व्यक्तियों को श्रद्धांजलि दी जाएगी।
द्वितीय अनुपूरक बजट इस सत्र का सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय एजेंडा होगा। इसके माध्यम से राज्य सरकार चालू वित्तीय वर्ष में विभिन्न विभागों और सरकारी योजनाओं के लिए अतिरिक्त धनराशि की मांग करेगी। बजट में उन खर्चों के लिए प्रावधान किया जा सकता है, जिनकी आवश्यकता मूल बजट तैयार होने के बाद सामने आई है। इसमें विकास योजनाओं, आधारभूत संरचना, प्रशासनिक जरूरतों और अन्य सरकारी कार्यक्रमों से जुड़े अतिरिक्त खर्च शामिल हो सकते हैं। हालांकि, किन विभागों को कितनी राशि मिलेगी, इसकी जानकारी बजट दस्तावेज पेश होने के बाद स्पष्ट होगी।
सत्र के दूसरे और तीसरे दिन यानी 1 और 2 दिसंबर को विधानसभा में मुख्य रूप से राजकीय विधेयकों और अन्य सरकारी कामकाज को प्राथमिकता दी जाएगी। इन दिनों सरकार की ओर से सदन में पेश किए जाने वाले विधायी प्रस्तावों पर चर्चा और आवश्यक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। विधानसभा के साथ विधान परिषद में भी निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार कामकाज होगा। परिषद में गैर-सरकारी संकल्पों और सरकारी विधेयकों से संबंधित कार्यों के लिए अलग-अलग दिन निर्धारित किए गए हैं।
3 दिसंबर को सत्र का सबसे महत्वपूर्ण वित्तीय कार्य होगा। इस दिन विधानसभा में द्वितीय अनुपूरक बजट पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। सदस्यों को सरकार की ओर से प्रस्तावित अतिरिक्त खर्चों पर अपनी राय रखने का अवसर मिलेगा। चर्चा पूरी होने के बाद बजट पर मतदान कराया जाएगा। इसके साथ ही अनुपूरक बजट से संबंधित विनियोग विधेयक को भी सदन में विचार और पारित करने के लिए रखा जाएगा। इसके पारित होने के बाद सरकार को निर्धारित अतिरिक्त खर्च करने के लिए विधायी मंजूरी मिल सकेगी।
4 दिसंबर को शीतकालीन सत्र का अंतिम दिन होगा। इस दिन विधानसभा में गैर-सरकारी सदस्यों के संकल्पों पर चर्चा की जाएगी। विधायक अपने क्षेत्रों और जनहित से जुड़े मुद्दों को सदन में उठा सकेंगे। विधानसभा सचिवालय ने सदस्यों को निर्धारित समयसीमा के भीतर संकल्पों की सूचना देने के निर्देश दिए हैं। एक सदस्य को एक दिन में एक से अधिक गैर-सरकारी संकल्प प्रस्तुत करने की अनुमति नहीं होगी।
सत्र के दौरान विधायकों की ओर से पूछे जाने वाले प्रश्नों के लिए अलग से कार्यक्रम जारी किया जाएगा। तारांकित और अल्पसूचित प्रश्नों की प्राथमिकता निर्धारित करने के लिए पहले की तरह लॉटरी प्रक्रिया अपनाई जाएगी। विधानसभा सचिवालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि आवश्यकता पड़ने पर निर्धारित कार्यक्रम में बदलाव किया जा सकता है। यदि सदन की कार्यवाही 4 दिसंबर से आगे बढ़ाने का निर्णय लिया जाता है तो संशोधित कार्यक्रम जारी किया जाएगा।
पांच दिनों का यह सत्र बिहार सरकार और विपक्ष दोनों के लिए महत्वपूर्ण रहने वाला है। सरकार के सामने अनुपूरक बजट और लंबित विधायी कार्यों को पूरा करने की जिम्मेदारी होगी, जबकि विपक्ष को राज्य के विकास, सरकारी योजनाओं, कानून-व्यवस्था और जनहित से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाने का अवसर मिलेगा। अब सबकी निगाहें 30 नवंबर से शुरू होने वाली सदन की कार्यवाही और सरकार की वित्तीय प्राथमिकताओं पर रहेंगी।
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