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पटना में MLC मतगणना केंद्र पर हंगामा, जन सुराज प्रत्याशी दिव्या ज्योति ने लगाया वोटों में गड़बड़ी का आरोप

  बिहार विधान परिषद चुनाव की मतगणना के दौरान मंगलवार, 27 अक्टूबर को पटना के बांकीपुर गर्ल्स हाई स्कूल स्थित
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    बिहार विधान परिषद चुनाव की मतगणना के दौरान मंगलवार, 27 अक्टूबर को पटना के बांकीपुर गर्ल्स हाई स्कूल स्थित मतगणना केंद्र पर उस समय हंगामा हो गया, जब फाइलों के कई बंडल लेकर पहुंचे एक सरकारी कर्मचारी को लेकर प्रत्याशियों और उनके समर्थकों ने सवाल उठाए। जन सुराज की पटना शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र की प्रत्याशी डॉ. दिव्या ज्योति ने आरोप लगाया कि मतगणना के दौरान बड़ी संख्या में फॉर्म-16 जैसे दस्तावेज अंदर ले जाने की कोशिश की जा रही थी। घटना के बाद मतगणना केंद्र के बाहर विरोध प्रदर्शन हुआ और ‘वोट चोरी’ के नारे लगाए गए। हालांकि, प्रशासन ने दस्तावेजों को लेकर लगाए गए आरोपों को खारिज किया और कहा कि वे कार्यालय से संबंधित कागजात थे।

     

    बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों की आठ सीटों के लिए 23 अक्टूबर को मतदान हुआ था। इन सीटों की मतगणना 27 अक्टूबर को निर्धारित की गई थी। पटना में शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के मतों की गिनती बांकीपुर स्थित सरकारी कन्या उच्च माध्यमिक विद्यालय में कराई जा रही थी। मतगणना के दौरान प्रत्याशियों और उनके एजेंटों की नजर पूरी प्रक्रिया पर बनी हुई थी। इसी बीच फाइलों के बंडल को लेकर विवाद खड़ा हो गया।

     

    रिपोर्टों के अनुसार, आयुक्त कार्यालय में कार्यरत एक कर्मचारी कई बंडल फाइलें लेकर मतगणना केंद्र में प्रवेश करने की कोशिश कर रहा था। वहां मौजूद प्रत्याशियों और समर्थकों ने उसे रोककर दस्तावेजों के बारे में सवाल किए। इस दौरान फाइलों का बंडल नीचे गिर गया। जन सुराज प्रत्याशी डॉ. दिव्या ज्योति ने दावा किया कि इन दस्तावेजों में फॉर्म-16 मौजूद थे। उन्होंने सवाल उठाया कि जब मतपत्रों की गिनती चल रही थी, तब ऐसे दस्तावेजों को अंदर ले जाने की आवश्यकता क्यों पड़ी।

     

    दिव्या ज्योति ने इस घटना को लेकर चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए और चुनाव आयोग से शिकायत करने की बात कही। उन्होंने मतगणना कक्ष की व्यवस्था पर भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि कक्ष में जगह कम होने और भीड़ अधिक रहने से एजेंटों को मतगणना की निगरानी करने में परेशानी हो रही थी। उन्होंने मतगणना कक्ष में सीसीटीवी कैमरों की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठाए और प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने की मांग की।

     

    हालांकि, दस्तावेजों को लेकर विवाद के बीच प्रशासन की ओर से अलग जानकारी सामने आई। उप निर्वाचन पदाधिकारी विपिन कुमार ने आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि संबंधित फाइलों में फॉर्म-16 नहीं, बल्कि पीठासीन अधिकारियों की डायरी और रिपोर्ट थीं। इन दस्तावेजों में मतदान के दौरान अलग-अलग समय पर दर्ज किए गए मतदान संबंधी विवरण शामिल होते हैं। प्रशासन के अनुसार, कुछ कागजात कार्यालय में छूट गए थे और कर्मचारी उन्हें लेकर आ रहा था।

     

    इस स्पष्टीकरण के बाद भी घटना ने मतगणना केंद्र की व्यवस्था और चुनावी पारदर्शिता को लेकर बहस खड़ी कर दी। कांग्रेस प्रत्याशी डॉ. संजय यादव ने भी मतगणना कक्ष में सीसीटीवी कैमरों की कथित अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठाए। विरोध बढ़ने पर पुलिस ने हस्तक्षेप किया और मौके पर व्यवस्था संभाली। मतगणना केंद्र के बाहर सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की गई, ताकि किसी तरह की अव्यवस्था न फैले।

     

    दस्तावेजों को लेकर प्रत्याशी की ओर से लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन ने दस्तावेजों की प्रकृति को लेकर अपना पक्ष स्पष्ट किया है। ऐसे में किसी भी तरह की चुनावी अनियमितता या वोटों में गड़बड़ी का निष्कर्ष निकालने से पहले शिकायत, संबंधित दस्तावेजों और चुनाव अधिकारियों की जांच को देखना जरूरी होगा। चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना और प्रत्याशियों की शिकायतों का निष्पक्ष निपटारा करना प्रशासन तथा निर्वाचन आयोग की जिम्मेदारी है।

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