Last updated: October 27th, 2026 at 03:44 pm

बिहार विधान परिषद चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समर्थित उम्मीदवार नरेंद्र प्रसाद सिंह ने तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से जीत हासिल कर ली है। मंगलवार, 27 अक्टूबर को मुजफ्फरपुर में हुई मतगणना के बाद उन्हें निर्वाचित घोषित किया गया। नरेंद्र प्रसाद सिंह ने अंतिम मतगणना प्रक्रिया में 2,945 वोट प्राप्त किए और निर्दलीय उम्मीदवार भूषण कुमार झा को 594 मतों से पीछे छोड़ दिया। भूषण कुमार झा को 2,351 वोट मिले, जबकि निवर्तमान विधान पार्षद और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) के उम्मीदवार संजय कुमार सिंह 1,967 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे।
इस चुनाव का परिणाम बिहार की विधान परिषद की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नरेंद्र प्रसाद सिंह की जीत से एनडीए को तिरहुत शिक्षक सीट पर सफलता मिली है। वहीं, इस निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे संजय कुमार सिंह को हार का सामना करना पड़ा। मतगणना के दौरान मुकाबला लगातार दिलचस्प बना रहा और अंतिम नतीजे के लिए मतों की वरीयता के आधार पर गणना करनी पड़ी।
तिरहुत शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र के लिए मतदान 23 अक्टूबर को हुआ था। बिहार विधान परिषद की आठ सीटों पर चुनाव कराया गया, जिनमें चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल थे। इन चुनावों में कुल 150 उम्मीदवार मैदान में थे। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में 82.85 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया, जबकि स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान का प्रतिशत 53.42 रहा। तिरहुत शिक्षक सीट पर लगभग 82.99 प्रतिशत मतदाताओं ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया था।
मुजफ्फरपुर स्थित एमआईटी परिसर में मतगणना केंद्र बनाया गया था। मंगलवार सुबह कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच मतपत्रों की छंटाई और बंडल तैयार करने का काम शुरू हुआ। मतपत्रों के चुनाव में उम्मीदवारों को प्राथमिकता के क्रम में वोट दिया जाता है, इसलिए केवल पहली वरीयता के मतों से अंतिम जीत तय नहीं होती। नियमों के अनुसार, आवश्यक मतों का कोटा हासिल नहीं होने पर आगे की वरीयताओं की गणना और मतों का हस्तांतरण किया जाता है।
शुरुआती रुझानों में नरेंद्र प्रसाद सिंह ने बढ़त बनाई थी। पहली वरीयता के मतों की गिनती में भी वह अपने प्रतिद्वंद्वियों से आगे रहे। दूसरे चरण की गणना में उनकी बढ़त बनी रही, लेकिन किसी उम्मीदवार को जीत के लिए जरूरी कोटा नहीं मिलने के कारण प्रक्रिया आगे बढ़ी। अंतिम गणना में नरेंद्र प्रसाद सिंह को 2,945 मत मिले, जबकि निर्दलीय भूषण कुमार झा दूसरे स्थान पर रहे। संजय कुमार सिंह तीसरे स्थान पर खिसक गए। जन सुराज समर्थित उम्मीदवार श्याम नंदन यादव को 1,335 मत मिले।
इस चुनाव में संजय कुमार सिंह की हार को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि वह इस निर्वाचन क्षेत्र से पहले विधान परिषद सदस्य रह चुके थे। दूसरी ओर, नरेंद्र प्रसाद सिंह ने चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत की है। मुकाबले में निर्दलीय उम्मीदवार भूषण कुमार झा का दूसरे स्थान पर आना भी उल्लेखनीय रहा। परिणाम से संकेत मिलता है कि शिक्षक मतदाताओं के बीच मुकाबला केवल प्रमुख राजनीतिक दलों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि निर्दलीय और अन्य उम्मीदवारों ने भी प्रभाव डाला।
बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक सीटों के चुनाव विधानसभा चुनावों से अलग मतदाता समूहों के बीच होते हैं। शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों में पात्र शिक्षक मतदाता मतदान करते हैं, जबकि स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों में निर्धारित शैक्षणिक योग्यता वाले पंजीकृत मतदाता अपने प्रतिनिधि चुनते हैं। इसलिए इन चुनावों के परिणाम को पूरे राज्य की जनता के राजनीतिक रुझान का सीधा प्रतिबिंब नहीं माना जा सकता। हालांकि, इनसे राजनीतिक दलों को अपने संगठन और विशेष मतदाता वर्गों में समर्थन का आकलन करने का अवसर मिलता है।
तिरहुत शिक्षक सीट पर नरेंद्र प्रसाद सिंह की जीत के बाद एनडीए समर्थकों में उत्साह देखा गया। वहीं, विपक्षी खेमे के लिए यह परिणाम एक झटका माना जा रहा है। बिहार विधान परिषद की बाकी सीटों के परिणामों पर भी राजनीतिक दलों की नजर बनी हुई है। सभी सीटों के नतीजे सामने आने के बाद परिषद में दलों की स्थिति और आगामी राजनीतिक रणनीतियों को लेकर तस्वीर अधिक स्पष्ट होगी।
![]()
Comments are off for this post.