Last updated: July 29th, 2026 at 03:25 pm

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में कांवड़ यात्रा को लेकर प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात व्यवस्था को लेकर व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। कांवड़ यात्रा 30 जुलाई से शुरू होने वाली है और इसे देखते हुए मेरठ, गाजियाबाद, मुजफ्फरनगर समेत पश्चिमी यूपी के कई जिलों में ट्रैफिक व्यवस्था में बड़े बदलाव किए गए हैं। प्रशासन का उद्देश्य कांवड़ियों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के साथ-साथ आम यात्रियों के लिए भी वैकल्पिक मार्ग उपलब्ध कराना है।
कांवड़ यात्रा के दौरान हरिद्वार से गंगाजल लेकर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उत्तर प्रदेश, दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान की ओर जाते हैं। इस दौरान पश्चिमी यूपी के प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्गों और संपर्क मार्गों पर वाहनों का दबाव काफी बढ़ जाता है। इसी को ध्यान में रखते हुए पुलिस और प्रशासन ने पहले से ट्रैफिक डायवर्जन की योजना तैयार की है।
प्रशासन की ओर से जारी ट्रैफिक व्यवस्था के अनुसार, 30 जुलाई की रात 12 बजे से दिल्ली-हरिद्वार हाईवे पर भारी वाहनों की आवाजाही पर प्रतिबंध लागू किया जाएगा। मुरादनगर से रुड़की की ओर जाने वाले गंगनहर पटरी मार्ग पर भी यातायात को लेकर विशेष नियम लागू किए गए हैं। भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्गों से भेजने की व्यवस्था की गई है, ताकि कांवड़ियों के लिए निर्धारित मार्गों पर यातायात का दबाव कम रहे।
कांवड़ यात्रा के आगे बढ़ने के साथ ट्रैफिक प्रतिबंध और अधिक सख्त किए जाने की योजना है। मुजफ्फरनगर पुलिस के अनुसार, 4 अगस्त से 12 अगस्त तक दिल्ली-हरिद्वार हाईवे और गंगनहर रोड के कुछ हिस्सों पर सभी प्रकार के वाहनों की आवाजाही पर रोक लगाई जा सकती है। इस अवधि में इन मार्गों का इस्तेमाल मुख्य रूप से कांवड़ियों की आवाजाही के लिए किया जाएगा। आम यात्रियों को वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।
मेरठ जोन में सुरक्षा व्यवस्था को भी मजबूत किया गया है। रिपोर्टों के अनुसार, कांवड़ यात्रा के दौरान करीब 25,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती और लगभग 7,000 CCTV कैमरों के जरिए निगरानी की व्यवस्था की गई है। संवेदनशील क्षेत्रों पर AI आधारित निगरानी तकनीक का इस्तेमाल करने की भी तैयारी है। इसका उद्देश्य भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा और किसी भी अप्रिय घटना की स्थिति में तत्काल कार्रवाई करना है।
गाजियाबाद में भी कांवड़ यात्रा को देखते हुए स्थानीय परिवहन व्यवस्था में बदलाव किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, रूट डायवर्जन के कारण यात्रियों की संख्या प्रभावित होने की संभावना को देखते हुए 30 जुलाई से 15 अगस्त तक 50 बसों वाली सिटी बस सेवा अस्थायी रूप से बंद रखने का निर्णय लिया गया है। इसके बाद सेवा दोबारा शुरू किए जाने की योजना है। यात्रियों को इस अवधि में वैकल्पिक सार्वजनिक परिवहन साधनों का इस्तेमाल करना पड़ सकता है।
कांवड़ यात्रा के दौरान दिल्ली और पश्चिमी यूपी के बीच यात्रा करने वाले लोगों के लिए भी यह ट्रैफिक प्लान महत्वपूर्ण है। दिल्ली से मेरठ, मुजफ्फरनगर, रुड़की और हरिद्वार की ओर जाने वाले यात्रियों को यात्रा से पहले रूट की स्थिति जांचने और प्रशासन द्वारा सुझाए गए वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करने की सलाह दी गई है।
प्रशासन की ओर से आम लोगों से अपील की गई है कि वे प्रतिबंधित मार्गों पर जाने से बचें और ट्रैफिक पुलिस के निर्देशों का पालन करें। विशेष रूप से भारी वाहनों के चालकों को निर्धारित डायवर्जन रूट का इस्तेमाल करना होगा। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
कांवड़ यात्रा के दौरान पुलिस और प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती सुरक्षा के साथ-साथ आम यातायात को सुचारू बनाए रखना होगी। पश्चिमी यूपी के प्रमुख शहरों और हाईवे पर बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने के कारण यातायात का दबाव बढ़ सकता है। ऐसे में ट्रैफिक डायवर्जन और पुलिस की तैनाती को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
30 जुलाई से पश्चिमी यूपी में कांवड़ यात्रा शुरू होने के साथ ट्रैफिक व्यवस्था में बड़े बदलाव लागू होने जा रहे हैं। दिल्ली-हरिद्वार हाईवे, गंगनहर रोड और दिल्ली-मेरठ क्षेत्र के कई मार्गों पर अलग-अलग चरणों में प्रतिबंध और डायवर्जन लागू होंगे। आम यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे यात्रा से पहले ट्रैफिक अपडेट की जांच करें और प्रशासन द्वारा जारी वैकल्पिक मार्गों का इस्तेमाल करें।
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