Last updated: July 8th, 2026 at 12:39 pm

देश में E20 (20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्र सरकार ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि E20 ईंधन को लेकर सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे कई दावे भ्रामक हैं। पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि E20 पेट्रोल के कारण बड़े पैमाने पर वाहनों को नुकसान पहुंचने के दावों का कोई ठोस वैज्ञानिक आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार भविष्य में E25 (25 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) की दिशा में तभी आगे बढ़ेगी, जब आवश्यक तकनीकी परीक्षण पूरे हो जाएंगे और वाहन निर्माताओं सहित सभी संबंधित पक्षों से व्यापक परामर्श किया जाएगा।
हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कई वीडियो और पोस्ट वायरल हुए, जिनमें दावा किया गया कि E20 पेट्रोल से पुराने वाहनों की माइलेज कम हो रही है और इंजन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। इन दावों के बाद कई वाहन मालिकों ने भी अपनी चिंताएं सार्वजनिक रूप से व्यक्त कीं। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार से जवाब मांगा। इसके बाद केंद्र सरकार ने विस्तृत स्पष्टीकरण जारी करते हुए कहा कि उपलब्ध तकनीकी परीक्षणों और ऑटोमोबाइल कंपनियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार E20 ईंधन को लेकर फैलाई जा रही अनेक आशंकाएं तथ्यों पर आधारित नहीं हैं।
केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि देश में करोड़ों दोपहिया और लाखों चारपहिया वाहन E20 ईंधन का उपयोग कर रहे हैं। उनके अनुसार वाहन निर्माता कंपनियों और सर्विस नेटवर्क ने सरकार को बताया है कि E20 के उपयोग से कोई व्यापक तकनीकी समस्या सामने नहीं आई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि भविष्य में किसी नए मिश्रण को लागू किया जाएगा तो उससे पहले व्यापक परीक्षण, उद्योग से सलाह-मशविरा और आवश्यक मानकों का पालन किया जाएगा।
सरकार का कहना है कि एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम का उद्देश्य केवल ईंधन नीति में बदलाव करना नहीं है, बल्कि कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना, विदेशी मुद्रा की बचत करना, कार्बन उत्सर्जन घटाना और किसानों की आय बढ़ाने में मदद करना भी है। एथेनॉल उत्पादन बढ़ने से गन्ना और अन्य कृषि उत्पादों की मांग में वृद्धि होती है, जिससे किसानों को अतिरिक्त आय के अवसर मिलते हैं। इसी कारण भारत पिछले कुछ वर्षों से चरणबद्ध तरीके से एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को आगे बढ़ा रहा है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि पुराने और नए मॉडल के वाहनों की तकनीकी क्षमता अलग-अलग हो सकती है। इसलिए किसी भी नए ईंधन मानक को लागू करने से पहले वाहन निर्माताओं, तेल कंपनियों और उपभोक्ताओं के साथ समन्वय आवश्यक होता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सरकार को जनजागरूकता अभियान भी चलाना चाहिए ताकि लोगों तक सही तकनीकी जानकारी पहुंच सके और अफवाहों पर रोक लगे।
राजनीतिक स्तर पर भी यह मुद्दा चर्चा का विषय बना हुआ है। विपक्ष ने सरकार से उपभोक्ताओं की चिंताओं का समाधान करने और अधिक पारदर्शिता बरतने की मांग की है। वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण दोनों को ध्यान में रखते हुए सभी फैसले वैज्ञानिक अध्ययन और विशेषज्ञों की सलाह के आधार पर लिए जा रहे हैं।
सरकार ने साफ कर दिया है कि E25 पेट्रोल को लेकर कोई जल्दबाजी नहीं की जाएगी। सभी परीक्षण पूरे होने और आवश्यक तकनीकी सहमति मिलने के बाद ही आगे का निर्णय लिया जाएगा। सरकार ने नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल अपुष्ट दावों के बजाय केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें। आने वाले समय में एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम को लेकर सरकार और उद्योग जगत के बीच संवाद जारी रहने की संभावना है।
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