Last updated: July 7th, 2026 at 12:25 pm

पुणे: महाराष्ट्र के पुणे में चर्चित रियल एस्टेट कारोबारी केतन अग्रवाल हत्याकांड की जांच में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ सामने आया है। पुलिस जांच के दौरान यह जानकारी मिली है कि मामले की मुख्य आरोपी सिया गोयल ने कथित तौर पर कारोबारी की हत्या से कुछ महीने पहले ही अपने सहयोगी चेतन चौधरी के साथ गुपचुप शादी कर ली थी। इस खुलासे के बाद पुलिस ने मामले की जांच का दायरा और बढ़ा दिया है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि हत्या की साजिश कब और कैसे बनाई गई, इसमें किन-किन लोगों की भूमिका थी और इस पूरे घटनाक्रम के पीछे आर्थिक या व्यक्तिगत कारण क्या थे।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अब तक की जांच में कई ऐसे तथ्य सामने आए हैं जो इस मामले को केवल हत्या तक सीमित नहीं रखते, बल्कि एक सुनियोजित साजिश की ओर इशारा करते हैं। जांच में मिले दस्तावेजों और डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर यह दावा किया जा रहा है कि सिया गोयल और चेतन चौधरी के बीच पहले से गहरे संबंध थे। दोनों के कथित विवाह की जानकारी मिलने के बाद पुलिस उनके आपसी संपर्क, वित्तीय लेन-देन और घटना से पहले की गतिविधियों की विस्तार से जांच कर रही है।
जांच एजेंसियों ने दोनों आरोपियों के मोबाइल फोन, बैंक खातों, कॉल रिकॉर्ड और सोशल मीडिया गतिविधियों की भी जांच शुरू कर दी है। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि क्या हत्या की योजना पहले से बनाई गई थी और इसमें किसी अन्य व्यक्ति ने भी भूमिका निभाई थी। अधिकारियों का कहना है कि मामले से जुड़े सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की फॉरेंसिक जांच कराई जा रही है ताकि घटनाक्रम की पूरी कड़ी स्पष्ट हो सके।
सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आई हैं, जिनके आधार पर पुलिस विभिन्न स्थानों पर छापेमारी भी कर रही है। हालांकि जांच एजेंसियों ने अभी तक पूरे घटनाक्रम का आधिकारिक विवरण सार्वजनिक नहीं किया है। पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और सभी तथ्यों की पुष्टि के बाद ही अंतिम निष्कर्ष पर पहुंचा जाएगा।
केतन अग्रवाल पुणे के जाने-माने रियल एस्टेट कारोबारियों में शामिल थे। उनकी हत्या की घटना सामने आने के बाद पूरे शहर में सनसनी फैल गई थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों की निगरानी में विशेष टीम जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि मामले में किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा और यदि जांच के दौरान अन्य लोगों की संलिप्तता सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि जांच में हत्या की पूर्व नियोजित साजिश और आर्थिक लाभ के उद्देश्य की पुष्टि होती है, तो आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की गंभीर धाराओं के तहत कार्रवाई की जा सकती है। वहीं फॉरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्य और गवाहों के बयान इस मामले की जांच में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
इस हत्याकांड ने एक बार फिर हाई-प्रोफाइल अपराधों की जांच प्रक्रिया और डिजिटल साक्ष्यों के महत्व को चर्चा में ला दिया है। पुलिस का कहना है कि मामले के हर पहलू की निष्पक्ष जांच की जा रही है और किसी भी संभावना को नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है। फिलहाल सभी आरोपियों से पूछताछ जारी है और जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हत्या के पीछे वास्तविक मकसद क्या था तथा इस कथित साजिश में कितने लोग शामिल थे।
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