Last updated: July 1st, 2026 at 03:56 pm

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन से टेलीफोन पर बातचीत कर पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति, क्षेत्रीय शांति और भारत-ईरान संबंधों को लेकर विस्तार से चर्चा की। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब पश्चिम एशिया में हालिया तनाव के बाद संघर्ष विराम और कूटनीतिक प्रयासों को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार गतिविधियां चल रही हैं। भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया कि वह सभी विवादों के समाधान के लिए संवाद और कूटनीति का समर्थन करता है।
बातचीत के दौरान राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने प्रधानमंत्री मोदी को पश्चिम एशिया के हालिया घटनाक्रम और आगे की संभावित दिशा के बारे में जानकारी दी। इसके जवाब में प्रधानमंत्री मोदी ने क्षेत्र में जारी वार्ताओं में हुई प्रगति का स्वागत किया और उम्मीद जताई कि निरंतर संवाद से स्थायी शांति स्थापित करने में मदद मिलेगी। उन्होंने कहा कि क्षेत्रीय स्थिरता केवल पश्चिम एशिया ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के आर्थिक और रणनीतिक हितों के लिए महत्वपूर्ण है।
प्रधानमंत्री मोदी ने बातचीत के दौरान भारत की लंबे समय से चली आ रही विदेश नीति को दोहराते हुए कहा कि किसी भी विवाद का समाधान सैन्य टकराव के बजाय बातचीत और कूटनीति के माध्यम से होना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि क्षेत्र में शांति बनाए रखने के लिए सभी पक्षों को संयम और सहयोग का रास्ता अपनाना चाहिए।
इस वार्ता का एक महत्वपूर्ण विषय हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) भी रहा। प्रधानमंत्री मोदी ने इस समुद्री मार्ग पर सुरक्षित और निर्बाध नौवहन तथा व्यापार की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आयात करता है और हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य वैश्विक तेल एवं गैस आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में से एक माना जाता है। ऐसे में इस मार्ग की सुरक्षा भारत की ऊर्जा सुरक्षा और वैश्विक व्यापार दोनों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भारत और ईरान के बीच संबंध केवल ऊर्जा क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। दोनों देश व्यापार, कनेक्टिविटी, सांस्कृतिक सहयोग और क्षेत्रीय विकास जैसे अनेक क्षेत्रों में लंबे समय से साझेदारी करते रहे हैं। विशेष रूप से चाबहार बंदरगाह परियोजना भारत के लिए रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जाती है, क्योंकि इसके माध्यम से मध्य एशिया और अफगानिस्तान तक संपर्क को मजबूत करने की दिशा में काम किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि दोनों देशों के बीच निरंतर संवाद से द्विपक्षीय सहयोग को और मजबूती मिल सकती है।
विदेश नीति के जानकारों का कहना है कि भारत ने हमेशा पश्चिम एशिया में संतुलित कूटनीतिक रुख अपनाया है। भारत के ईरान, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और इज़राइल सहित कई देशों के साथ मजबूत संबंध हैं। यही कारण है कि भारत क्षेत्रीय तनाव के समय किसी एक पक्ष का समर्थन करने के बजाय शांति, स्थिरता और संवाद पर जोर देता है। इस नीति से भारत को क्षेत्र के सभी प्रमुख देशों के साथ सहयोग बनाए रखने में मदद मिलती है।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पेज़ेशकियन के बीच हुई यह बातचीत ऐसे समय में महत्वपूर्ण है, जब वैश्विक अर्थव्यवस्था ऊर्जा आपूर्ति, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों से प्रभावित हो रही है। भारत का उद्देश्य अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देना है। इसी कारण भारत लगातार कूटनीतिक माध्यमों से संवाद बनाए हुए है।
दोनों नेताओं की यह बातचीत भारत और ईरान के बीच मजबूत द्विपक्षीय संबंधों तथा पश्चिम एशिया में शांति स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। आने वाले समय में दोनों देशों के बीच व्यापार, ऊर्जा, कनेक्टिविटी और रणनीतिक सहयोग के क्षेत्रों में आगे भी संवाद जारी रहने की संभावना है। भारत ने एक बार फिर स्पष्ट किया है कि वह वैश्विक शांति, सुरक्षित समुद्री व्यापार और कूटनीतिक समाधान का समर्थक बना रहेगा।
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