Last updated: July 4th, 2026 at 02:27 pm
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के साणंद में CG Semi के Outsourced Semiconductor Assembly and Test (OSAT) संयंत्र का उद्घाटन किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत अब केवल इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों का उपभोक्ता नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर सेमीकंडक्टर निर्माण का महत्वपूर्ण केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। प्रधानमंत्री ने इसे भारत की तकनीकी आत्मनिर्भरता और ‘विकसित भारत’ के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया।
उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले एक दशक में भारत ने इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। पहले देश में तैयार उत्पादों के निर्माण पर ध्यान दिया गया, उसके बाद इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स के उत्पादन को बढ़ावा मिला और अब भारत सेमीकंडक्टर निर्माण के क्षेत्र में भी मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। उन्होंने कहा कि यह पूरी इलेक्ट्रॉनिक्स वैल्यू चेन विकसित करने की दिशा में बड़ा कदम है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आने वाले समय में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), रोबोटिक्स, 5G, ऑटोमोबाइल, रक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल तकनीकों में सेमीकंडक्टर की भूमिका और अधिक बढ़ेगी। ऐसे में भारत का घरेलू चिप निर्माण उद्योग देश की आर्थिक और तकनीकी प्रगति का मजबूत आधार बनेगा। उन्होंने विश्वास जताया कि भारत के युवा इंजीनियर और वैज्ञानिक “मेड इन इंडिया” चिप्स के माध्यम से वैश्विक तकनीकी परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
सरकार के अनुसार, साणंद स्थित यह OSAT संयंत्र पूरी क्षमता से संचालन शुरू होने के बाद प्रतिवर्ष लगभग 5 अरब सेमीकंडक्टर चिप्स का उत्पादन करने में सक्षम होगा। इन चिप्स का उपयोग उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, दूरसंचार, औद्योगिक उपकरणों और अन्य आधुनिक तकनीकी क्षेत्रों में किया जाएगा। इस परियोजना से उच्च कौशल वाले रोजगार के नए अवसर भी सृजित होने की उम्मीद है।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत का सेमीकंडक्टर क्षेत्र तेजी से आगे बढ़ रहा है और सरकार इस उद्योग के लिए आवश्यक आधारभूत ढांचा तथा नीति समर्थन उपलब्ध करा रही है। उनका कहना है कि देश में चिप डिजाइन, पैकेजिंग, परीक्षण और विनिर्माण के लिए मजबूत पारिस्थितिकी तंत्र विकसित किया जा रहा है, जिससे वैश्विक कंपनियां भी भारत में निवेश के लिए आकर्षित हो रही हैं।
उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक स्तर पर चिप्स की मांग लगातार बढ़ रही है। इलेक्ट्रिक वाहन, डेटा सेंटर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और स्मार्ट उपकरणों के विस्तार के कारण सेमीकंडक्टर उद्योग आने वाले वर्षों में और अधिक महत्वपूर्ण हो जाएगा। ऐसे समय में भारत का इस क्षेत्र में निवेश बढ़ाना देश की दीर्घकालिक आर्थिक रणनीति के लिए लाभदायक माना जा रहा है। इससे आयात पर निर्भरता कम होने और निर्यात क्षमता बढ़ने की संभावना भी है।
विश्लेषकों का कहना है कि सरकार का सेमिकॉन इंडिया कार्यक्रम अब तेजी से आगे बढ़ रहा है। विभिन्न राज्यों में सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण से जुड़ी परियोजनाओं पर काम जारी है। यदि ये परियोजनाएं निर्धारित समय पर पूरी होती हैं, तो भारत वैश्विक चिप सप्लाई चेन में अपनी हिस्सेदारी मजबूत कर सकता है और विदेशी निवेश आकर्षित करने में भी सफलता हासिल कर सकता है।
गुजरात के साणंद में इस नए संयंत्र का उद्घाटन भारत के सेमीकंडक्टर मिशन के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। सरकार का विश्वास है कि इससे देश के इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग को नई गति मिलेगी, तकनीकी आत्मनिर्भरता मजबूत होगी और भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में अपनी भूमिका और प्रभाव दोनों का विस्तार कर सकेगा।
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