Last updated: September 10th, 2026 at 03:42 pm

बिहार कांग्रेस में संगठनात्मक अनुशासन को लेकर कार्रवाई का दौर तेज हो गया है। पार्टी ने ‘ऑपरेशन क्लीन’ के तहत 32 नेताओं को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इनमें पूर्व विधायक समेत पार्टी के कई नेता शामिल बताए जा रहे हैं। यह कार्रवाई ऐसे समय हुई है जब बिहार कांग्रेस के भीतर संगठन, नेतृत्व और पार्टी की कार्यप्रणाली को लेकर असंतोष की आवाजें भी सामने आ रही हैं।
जानकारी के अनुसार, बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी की अनुशासनात्मक समिति ने 10 सितंबर को 29 नेताओं को नोटिस जारी किया। इन नेताओं पर आरोप है कि उन्होंने 8 सितंबर को बिहार सरकार के खिलाफ आयोजित एक विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया था। पार्टी का कहना है कि इस तरह की गतिविधियां उसके आंतरिक नियमों और तय प्रक्रियाओं के खिलाफ थीं। अलग-अलग रिपोर्टों में व्यापक कार्रवाई के तहत 32 नेताओं को नोटिस दिए जाने की जानकारी सामने आई है।
कार्रवाई के पीछे पार्टी का मुख्य उद्देश्य संगठन में अनुशासन मजबूत करना बताया जा रहा है। कांग्रेस के लिए यह कदम इसलिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि बिहार इकाई में पिछले कुछ समय से आंतरिक मतभेद और असंतोष की खबरें सामने आती रही हैं। पार्टी नेतृत्व अब ऐसे नेताओं के खिलाफ संगठनात्मक कार्रवाई कर रहा है, जिन पर पार्टी लाइन से अलग गतिविधियों में शामिल होने या अनुशासन का उल्लंघन करने के आरोप हैं।
यह कार्रवाई उस घटनाक्रम के कुछ ही दिनों बाद हुई है, जब बिहार कांग्रेस से जुड़े कई असंतुष्ट नेताओं ने दिल्ली में कांग्रेस मुख्यालय के बाहर धरना दिया था। इन नेताओं ने बिहार कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष राजेश राम और पार्टी के बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लावरू को हटाने की मांग की थी। उन्होंने राहुल गांधी से मुलाकात की मांग भी रखी थी।
धरना देने वाले नेताओं का आरोप था कि बिहार संगठन के कामकाज को लेकर उनकी शिकायतों पर लंबे समय से पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने संगठन में बदलाव और अपनी शिकायतों पर पार्टी नेतृत्व से सीधे बातचीत की मांग की थी। हालांकि, पार्टी के भीतर इन नेताओं के खिलाफ पहले से चल रही अनुशासनात्मक कार्रवाई और निष्कासन की प्रक्रिया भी विवाद का हिस्सा रही है।
दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले नेताओं में पूर्व विधायक और पार्टी के पूर्व पदाधिकारी भी शामिल थे। उनका कहना था कि वे संगठन की स्थिति को लेकर अपनी बात केंद्रीय नेतृत्व तक पहुंचाना चाहते हैं। दूसरी ओर, कांग्रेस नेतृत्व की ओर से अनुशासन को प्राथमिकता देने का संकेत दिया जा रहा है। ऐसे में कारण बताओ नोटिस जारी होना पार्टी के भीतर चल रहे मतभेदों को और महत्वपूर्ण बना देता है।
कारण बताओ नोटिस का अर्थ यह नहीं है कि सभी 32 नेता पार्टी से निष्कासित कर दिए गए हैं। नोटिस के जरिए संबंधित नेताओं से उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों पर जवाब मांगा जाता है। उनके जवाब और पार्टी की अनुशासनात्मक प्रक्रिया के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जा सकती है। इसलिए फिलहाल इसे अंतिम निष्कासन की कार्रवाई के रूप में देखना सही नहीं होगा।
बिहार कांग्रेस के सामने संगठन को एकजुट रखने की चुनौती भी बनी हुई है। पार्टी के भीतर एक तरफ अनुशासनात्मक कार्रवाई हो रही है, वहीं दूसरी तरफ कुछ नेता सार्वजनिक रूप से संगठन के नेतृत्व और कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं। इस स्थिति में केंद्रीय नेतृत्व के सामने दोनों पक्षों के बीच संतुलन बनाने और संगठन में भरोसा कायम करने की चुनौती होगी।
ताजा कार्रवाई को कांग्रेस के बिहार संगठन को व्यवस्थित करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। पार्टी के लिए यह प्रक्रिया कितनी प्रभावी रहती है, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि नोटिस पाने वाले नेताओं के जवाब के बाद क्या कदम उठाया जाता है और क्या संगठन के भीतर चल रही नाराजगी कम होती है। फिलहाल 32 नेताओं को नोटिस जारी किए जाने से बिहार कांग्रेस में राजनीतिक और संगठनात्मक हलचल तेज हो गई है।
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